- दिल्ली में प्रस्तावित आंदोलन को देखते हुए सुरक्षा के लिए पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है
- दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर बीएसएफ को तैनात किया गया है
- आईटीबीपी की सात कंपनियां राजधानी के संवेदनशील इलाकों में तैनात की गई हैं
दिल्ली में प्रस्तावित आंदोलन को देखते हुए राजधानी को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है. सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ-साथ CAPF के 23 हजार जवानों ने मोर्चा संभाल लिया है.
BSF की तैनाती
दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर BSF को तैनात कर दिया गया है, ताकि नोएडा की तरफ से प्रदर्शनकारी दिल्ली में प्रवेश न कर सकें. दुनिया के सबसे बड़े सीमा सुरक्षा बलों में शामिल BSF में 2.75 लाख से अधिक जवान हैं. सियाचिन की बर्फीली चोटियों से लेकर थार के रेगिस्तान तक दुर्गम सीमाओं की सुरक्षा करने वाली BSF को अब दिल्ली की किलाबंदी के लिए उतारा गया है.
ITBP ने संभाला मोर्चा
कनॉट प्लेस, जंतर-मंतर और अन्य प्रमुख इलाकों में ITBP की 7 कंपनियां तैनात की गई हैं. हिमालय की दुर्गम सीमाओं, पहाड़ों और कठिन मोर्चों की सुरक्षा के लिए जानी जाने वाली ITBP को आम तौर पर आंतरिक सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के दौरान भी तैनात किया जाता है.
CRPF और RAF की बड़ी तैनाती
देश की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ मानी जाने वाली CRPF की 70 कंपनियां, यानी करीब 7 हजार जवान, दिल्ली में तैनात किए जा रहे हैं. दंगा नियंत्रण, नक्सल विरोधी अभियानों और हिंसक स्थितियों से निपटने में विशेषज्ञ मानी जाने वाली CRPF की कई यूनिट्स बंगाल और छत्तीसगढ़ से दिल्ली बुलाई गई हैं.
वहीं, CRPF की विशेष इकाई RAF ने भी मोर्चा संभाल लिया है. नीली वर्दी वाली RAF को 'जीरो रिस्पांस फोर्स' भी कहा जाता है. यह भीड़ नियंत्रण, दंगों और संवेदनशील स्थितियों से निपटने में विशेषज्ञ मानी जाती है.
दिल्ली पुलिस भी पूरी तरह अलर्ट
राजधानी में कानून-व्यवस्था, वीआईपी सुरक्षा और आम लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली दिल्ली पुलिस के 15 हजार जवान भी मैदान में हैं. पुलिसकर्मी संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी कर रहे हैं और केंद्रीय बलों के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था संभाले हुए हैं.
जनता के नाम दिल्ली पुलिस का खुला खत
प्रस्तावित आंदोलन से ठीक पहले दिल्ली पुलिस की ओर से सोशल मीडिया पर एक पोस्टकार्ड साझा किया गया है. आम लोगों के नाम लिखे गए इस खुले खत में पुलिसकर्मियों के मानवीय पक्ष को सामने लाने की कोशिश की गई है. दिल्ली पुलिस ने लिखा यूनिफॉर्म के पीछे भी एक इंसान है, जिसका अपना परिवार है, अपने लोग हैं. फर्क सिर्फ यूनिफॉर्म का है, इंसानियत का नहीं.
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