- अंकिता भंडारी के माता-पिता को इंडिया गेट से हिरासत में लिया, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने की मांग
- कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
- अंकिता भंडारी केस में न्याय की मांग को लेकर फिर गरमाई सियासत
अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर राजनीति और न्याय की मांग को लेकर चर्चा में आ गया है. गुरुवार तड़के इंडिया गेट और राष्ट्रपति भवन क्षेत्र में चल रहे धरना-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने अंकिता भंडारी के माता-पिता समेत कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया. यह विरोध प्रदर्शन भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति के खिलाफ किया जा रहा था. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मामले से जुड़े कथित वीआईपी एंगल की जांच पूरी होने से पहले यह नियुक्ति नहीं होनी चाहिए.
तड़के चार बजे पुलिस की कार्रवाई
न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने गुरुवार सुबह करीब चार बजे इंडिया गेट क्षेत्र में धरना दे रहे अंकिता भंडारी के माता-पिता और कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया. इसके बाद प्रदर्शन स्थल पर तनाव की स्थिति बन गई.
#WATCH | Ankita Bhandari murder case | Delhi | Ankita Bhandari's parents, along with several opposition leaders and protestors, were detained by Delhi Police at India Gate after an overnight protest. https://t.co/JBhQsbMp1c
— ANI (@ANI) October 14, 2026
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती बरती और महिला प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया गया. पार्टी नेताओं का कहना है कि न्याय की मांग कर रहे लोगों को निशाना बनाया जा रहा है.
माता-पिता ने दी 24 घंटे की चेतावनी
हिरासत में लिए जाने से पहले अंकिता भंडारी की मां ने कहा, 'हम यह कहना चाहते हैं कि जब तक उनकी (दुष्यंत गौतम) नियुक्ति रद्द नहीं होती, हम अपने रुख पर कायम रहेंगे. यदि हमें यहां बैठने की अनुमति नहीं दी गई तो हम अपने घरों में ही भूख हड़ताल पर बैठेंगे.
#WATCH | Ankita Bhandari murder case | Delhi | Ankita Bhandari's mother says, "We want to state that we will remain steadfast until his (Dushyant Gautam) appointment is revoked... If we are not permitted to sit here, we will sit on a hunger strike in our own homes..." Her father says, "We give the government a 24-hour ultimatum: the appointment of Dushyant Kumar as the Governor of Sikkim must be cancelled. If it is not revoked, the people across the entire country will take to the streets, and the government will be held responsible"
— ANI (@ANI) October 15, 2026
कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों के क्षरण को दर्शाती है. उन्होंने कहा, 'यह बर्बरता है. आप देख सकते हैं कि इंडिया गेट पर लोकतंत्र खत्म हो रहा है. सुबह चार बजे लोकतंत्र को खत्म किया जा रहा है.' कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि चार साल से न्याय की मांग कर रहे माता-पिता के साथ इस तरह का व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने सवाल उठाया कि न्याय दिलाने के बजाय प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई क्यों की जा रही है. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी और विधायक काजी निजामुद्दीन ने भी पुलिस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए कहा कि पार्टी न्याय की लड़ाई जारी रखेगी.
अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा, 'दुष्यंत कुमार को जेल में होना चाहिए. मैं माननीय राष्ट्रपति से आग्रह करता हूं कि सीबीआई जांच पूरी होने तक उन्हें राज्यपाल नियुक्त न किया जाए.'
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी मिले थे
इससे पहले बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इंडिया गेट पर धरना दे रहे अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की थी. दोनों नेताओं ने परिवार को समर्थन दिया था और उनकी मांगों को सुना था. इसके बाद यह मामला राजनीतिक रूप से और अधिक चर्चाओं में आ गया.
नियुक्ति रद्द करने की मांग
प्रदर्शनकारी दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि कथित वीआईपी एंगल की केंद्रीय एजेंसी से जांच पूरी होने तक इस नियुक्ति पर रोक लगाई जानी चाहिए. अंकिता के पिता ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है और जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक संबंधित लोगों को संवैधानिक पद नहीं दिया जाना चाहिए.
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
अंकिता भंडारी की 18 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई थी. बाद में 24 सितंबर 2022 को उसका शव चिल्ला नहर से बरामद किया गया था. मामले में रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य, उसके सहयोगी सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था. लंबी सुनवाई के बाद 30 मई 2025 को कोटद्वार की अदालत ने तीनों दोषियों को हत्या, सबूत मिटाने और अन्य आरोपों में उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
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