विज्ञापन

जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन मामला: दिल्ली पुलिस बोली- हिस्ट्रीशीटर भी आ गए थे, हमने ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों को नकारा है. पुलिस ने शपथपत्र दाखिल कर शीर्ष अदालत में कहा कि 30 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी थे और पुलिस 5 हजार जवान.

जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन मामला: दिल्ली पुलिस बोली- हिस्ट्रीशीटर भी आ गए थे, हमने ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस का जवाब (फाइल फोटो)
  • दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है
  • पुलिस ने बताया कि 30 हजार प्रदर्शनकारी थे जबकि 5 हजार पुलिसकर्मी थे
  • पुलिस ने बताया कि संसद मार्च करने की अनुमति सरकार की तरफ से नहीं थी
नई दिल्ली:

बिहार के बाद अब दिल्ली पुलिस ने भी जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से सुप्रीम कोर्ट में इनकार किया है. दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामे में कहा है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने कई स्तरों की बैरिकेडिंग तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद स्थिति शांतिपूर्ण नहीं रही और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से बल का इस्तेमाल किया गया. हालांकि, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप नकारे हैं.

डीसीपी सचिन शर्मा की ओर से दाखिल हलफनामा  उन याचिकाओं के जवाब में है, जिनमें कथित पुलिस ज्यादती की कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है. इसे चार संबंधित याचिकाओं में साझा जवाब के रूप में भी दाखिल किया गया है.

30 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी, 5 हजार पुलिसकर्मी

पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन स्थल और आसपास करीब 3 किलोमीटर क्षेत्र में 30 हजार से अधिक लोग मौजूद थे, जबकि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लगभग 5 हजार पुलिसकर्मी तैनात थे. पुलिस का कहना है कि जब भीड़ पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई तो प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ. हलफनामे के अनुसार, इस दौरान 240 से अधिक पुलिसकर्मी/वर्दीधारी अधिकारी और करीब 200 आम लोगों या प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं. पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्व और हिस्ट्रीशीटर भी शामिल हो गए थे. इतने बड़े जमावड़े और अलग-अलग स्थानों पर मौजूद भीड़ को देखते हुए पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप टिकता नहीं है.

संसद मार्च की अनुमति नहीं थी-पुलिस

दिल्ली पुलिस ने कहा कि संसद तक मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई थी. इसलिए पुलिस के अनुसार, भीड़ का संसद की ओर बढ़ना कानून-विरुद्ध था और उस समय प्रदर्शनकारी एक अवैध जमावड़े का हिस्सा बन गए थे. पुलिस ने दावा किया कि बल प्रयोग तभी किया गया जब प्रदर्शनकारियों ने कई स्तरों की बैरिकेडिंग पार कर हिंसक गतिविधियां शुरू कर दीं. 

चुनिंदा तस्वीरों और वीडियो पर सवाल

पुलिस ने याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश किए गए सबूतों पर भी सवाल उठाए हैं. हलफनामे में कहा गया है कि याचिकाओं में चुनिंदा तस्वीरों, अधूरे वीडियो, अप्रमाणित मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा किया गया है. पुलिस के मुताबिक ये सामग्री घटनाओं का एकतरफा तस्वीर पेश करती है और पुलिस अधिकारियों द्वारा की गई वैध कार्रवाई को पूरी तरह नहीं दिखाती है. 

कील लगी लाठी के आरोप पर पुलिस का जवाब

प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कील लगी लाठी इस्तेमाल किए जाने के आरोप पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि उपलब्ध वीडियो में ऐसा एक अकेला मामला दिखाई देता है, लेकिन वह वस्तु पुलिसकर्मी के हाथ में नहीं बल्कि एक प्रदर्शनकारी के हाथ में थी. पुलिस का कहना है कि वह लाठी नहीं बल्कि एक डंडा था, जिस पर राष्ट्रीय ध्वज लगा हुआ था. हलफनामे में यह भी कहा गया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठियों का इस्तेमाल कानूनन अनुमति पुलिस उपकरणों में शामिल है और अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों के कथित हमलों के बाद भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया. 

सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती का बचाव

प्रदर्शन स्थल पर लाठी लेकर सादे कपड़ों में नजर आए पुलिसकर्मियों के संबंध में भी दिल्ली पुलिस ने सफाई दी है. पुलिस ने बताया कि ये ‘स्पॉटर्स' थे, जिन्हें भीड़ के भीतर रणनीतिक रूप से तैनात किया गया था. हलफनामे के मुताबिक विशेष शाखा, स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस के अधिकारियों को परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए भीड़ में शामिल किया गया था. पुलिस ने इसे गैरकानूनी या असामान्य नहीं बताया और कहा कि स्वतंत्रता दिवस तथा गणतंत्र दिवस जैसे बड़े आयोजनों में भी इस तरह की रणनीति अपनाई जाती है.

पुलिसकर्मियों पर हमले का भी आरोप

दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कई समूहों ने अकेले पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया. पुलिस के अनुसार कुछ वीडियो में प्रदर्शनकारियों द्वारा अधिकारियों का सुरक्षा उपकरण खींचने, उन्हें जमीन पर घसीटने और पत्थर वाले रास्तों पर धकेलने की घटनाएं दिखाई देती हैं. पुलिस ने यह भी बताया कि करीब 2,873 लोगों के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, बलात्कार और POCSO जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं. हालांकि इन व्यक्तियों की भूमिका की जांच के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त द्वारा गठित SIT जांच करेगी. पुलिस ने कहा कि बल प्रयोग की वैधता और आवश्यकता का स्वतंत्र आकलन कोर्ट द्वारा प्रस्तावित समिति कर सकती है और दिल्ली पुलिस इस प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेगी. 

चेहरे की पहचान तकनीक पर भी पुलिस की सफाई

प्रदर्शन स्थल पर Facial Recognition Software के इस्तेमाल पर पुलिस ने इसे अनुपातिक और वैध पुलिसिंग उपाय बताया है. पुलिस का दावा है कि यह तकनीक प्रदर्शन स्थल पर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति की प्रोफाइल अपने आप तैयार नहीं करती और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की सर्विलांस या व्यक्तिगत जानकारी जुटाने के लिए इस्तेमाल नहीं की गई. पुलिस के अनुसार, केवल Facial Recognition के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है. पहले फील्ड वेरिफिकेशन किया जाता है कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में प्रदर्शन स्थल पर मौजूद था या नहीं. पुलिस ने यह भी कहा कि सिस्टम गंभीर आपराधिक मामलों में पहले से रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों की पहचान के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जबकि ट्रैफिक चालान जैसे छोटे मामलों वाले लोगों को इसके दायरे में नहीं रखा जाता.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Jantar Mantar Agitation, Delhi Police, Supreme Court
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com