देश की राजधानी दिल्ली में आग लगने की घटनाएं अक्सर आती रहती हैं. इसी साल जून में मालवीय नगर में होटल में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत हो गई थी. इसके अलावा और भी कई अलग-अलग जगहों से आग लगने की घटनाएं आती रही है. आग से जुड़े हादसे के बाद क्विक रिस्पॉन्स सबसे अहम बात होती है. लेकिन कई बार क्विक रिस्पॉन्स में देरी होती है. जिससे जान-माल का नुकसान का दायरा बढ़ता है. दिल्ली में आग लगने की घटनाओं पर उप राज्यपाल तरणजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में हुई एक समीक्षा बैठक में कई बड़ी बातें सामने आई है.
आग लगने वाली 99 फीसदी घटनाओं में फायर एनओसी नहीं
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में आग की करीब 99% घटनाएं ऐसी जगहों पर हुईं, जहां वैध अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र नहीं था. अधिकारियों ने बताया कि 2025-26 में दिल्ली में 36,877 इमरजेंसी कॉल आईं, जो छह साल में सबसे ज्यादा हैं. इनमें 55.26% कॉल आग से जुड़ी थीं.
दिल्ली में फिलहाल 71 फायर स्टेशन, चाहिए 120
दिल्ली में फिलहाल 71 फायर स्टेशन हैं, जबकि पांच मिनट का रिस्पॉन्स टाइम हासिल करने के मास्टर प्लान के मुताबिक कम से कम 120 की जरूरत है. LG ने रिहायशी इमारतों, बाजारों, औद्योगिक परिसरों और मिश्रित इस्तेमाल वाली जगहों पर नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट और जांच के निर्देश दिए.
बैठक में बताया कि शहर में फिलहाल 71 दमकल केंद्र हैं, जिनमें चार केवल दिन के समय संचालित होने वाले केंद्र शामिल हैं. मास्टर प्लान के तहत पांच मिनट का प्रतिक्रिया समय सुनिश्चित करने के लिए कम से कम 120 दमकल केंद्रों की आवश्यकता है. अधिकारियों ने बताया कि अनधिकृत और अनियोजित कॉलोनियों में आग लगने की घटनाएं अधिक होती हैं.

'पुलिस, MCD और DDA में समन्वय बनाएं'
संकरी सड़कों और खराब पहुंच के कारण कई बार दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में देरी होती है. उपराज्यपाल ने दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) को क्षेत्रवार योजना तैयार करने और प्रतिक्रिया समय कम करने के लिए मापने योग्य लक्ष्य तय करने के निर्देश दिए. खास तौर पर घनी आबादी वाली कॉलोनियों, औद्योगिक क्षेत्रों और बहुमंजिला इमारतों पर ध्यान देने को कहा गया.
उन्होंने दिल्ली पुलिस, MCD और DDA के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को भी कहा, ताकि दमकल वाहनों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में बाधा न आए. इसके साथ ही नियमित रूप से अग्नि जोखिम मानचित्रण और मॉक ड्रिल कराने के निर्देश दिए गए.

अधिकारियों के साथ बैठक में दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू.
उपराज्यपाल ने बैठक में दिए ये निर्देश
- उपराज्यपाल ने आवासीय भवनों, बाजारों, औद्योगिक परिसरों और मिश्रित उपयोग वाले क्षेत्रों में नियमित अग्नि सुरक्षा निरीक्षण और ऑडिट कराने का निर्देश दिया. बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों की पहचान कर निवासियों और मालिकों की भागीदारी से सुधारात्मक कदम उठाने को कहा गया.
- उन्होंने आग की घटनाओं को रोकने के लिए छात्रों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA), उद्योग संगठनों और बाजार संघों को शामिल करते हुए लगातार अग्नि सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया.
- उपराज्यपाल ने अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने, लंबित मानव संसाधन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने और आवश्यक अग्निशमन उपकरणों की खरीद को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया.
197 नए दमकल वाहनों की खरीद की योजना
दिल्ली अग्निशमन सेवा ने 197 नए अग्निशमन वाहनों और उपकरणों की खरीद की योजना पेश की, जिनमें नौ आर्टिकुलेटेड वाटर टावर भी शामिल हैं. आपात प्रतिक्रिया व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उपराज्यपाल ने रियल टाइम वाहन ट्रैकिंग और घटनाओं से जुड़े ताजा अपडेट की सुविधा वाले एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की जरूरत पर जोर दिया.
मोबाइल ऐप की योजना भी बैठक में की गई पेश
DFS ने कंप्यूटर आधारित डिस्पैच सिस्टम, GPS से वाहन ट्रैकिंग, आग लगने वाले स्थानों से लाइव स्ट्रीमिंग और नागरिकों के लिए मोबाइल ऐप की योजना भी पेश की. बड़ी घटनाओं के दौरान संचार संपर्क बाधित होने की समस्या से निपटने के लिए पांच क्षेत्रीय नियंत्रण कक्षों और एक मास्टर कंट्रोल रूम वाला संचार नेटवर्क स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया.
23 नए दमकल केंद्रों के लिए जमीन दी गई
बुनियादी ढांचे के विस्तार को लेकर अधिकारियों ने बताया कि 23 नए दमकल केंद्रों के लिए जमीन उपलब्ध करा दी गई है, जबकि अन्य 27 केंद्रों के लिए भूमि आवंटन अभी लंबित है. उपराज्यपाल ने संबंधित एजेंसियों को भूमि हस्तांतरण में तेजी लाने और लंबित मामलों को हल करने का निर्देश दिया, ताकि दिल्ली में दमकल केंद्रों की संख्या 71 से बढ़ाकर 121 की जा सके. इसमें उच्च जोखिम वाले और घनी आबादी वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देने को कहा गया.
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