- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण पर स्वतः संज्ञान लेकर गंभीर सुनवाई की है.
- दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बेहद गंभीर श्रेणी में पहुंच चुका है और कई इलाकों में AQI लेवल 450 के पार है
- पराली जलाने से दिल्ली के प्रदूषण में बढ़ोत्तरी होती है, जिसमें पराली जलाने का योगदान भी ज्यादा है.
दिल्ली-NCR बढ़ते हुए प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत संज्ञान लेते हुए शुक्रवार को अहम सुनवाई की है. जहां सीनियर वकील अमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी के आसपास बना हुआ है, यह ऐसा है जैसे कोई व्यक्ति रोजाना 30 सिगरेट पी रहा हो. वहीं मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने तंज कसते हुए कहा कि उम्मीद है आप सभी दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे, इस मामले की मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की है. बता दें कि दिल्ली में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है कई इलाकों में AQI का लेवल 450 के पार चला गया है, जो बेहद गंभीर श्रेणी में आता है.
सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती
दिल्ली में बढ़ते हुए प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती जताई है. सीजेआई ने कहा बारिश होने की वजह से प्रदूषण का स्तर नीचे गया था, जिस पर वकील अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि 5 नवंबर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान 14 फीसदी था. उन्होंने कहा कि दिल्ली पहले से ही प्रदूषित है और पराली जलाने से स्थिति और गंभीर हो जाती है. दिल्ली-NCR में प्रदूषण की सबसे बड़ी समस्या परिवहन है. स्थानीय स्तर पर होने वाले प्रदूषण और पराली जलाने की समस्या पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह वह समय है जब किसान अगली फसल की बुवाई करेंगे और उम्मीद है कि पराली जलाने की गतिविधियां अब रुक गई होंगी.
पराली पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया सुझाव
दिल्ली-एनसीआर में पराली की वजह से बढ़ते हुए प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम सुझाव दिए हैं. अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि किसानों को पराली प्रबंधन के उपकरण देने के बावजूद कई किसानों के पास उन्हें चलाने के लिए ईंधन खरीदने के पैसे नहीं हैं. जबकि छोटे खेतों में इन मशीनों का इस्तेमाल भी व्यावहारिक नहीं है. इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि अधिकारियों ने एक निश्चित दर पर किसानों से पराली खरीदने का प्रस्ताव दिया था, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सरकार की ओर से कहा कि इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं. इस पर सीजेआई ने कहा कि पराली खरीदने की दर पहले ही अधिसूचित की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि मशीनें ग्राम पंचायतों को दी जानी चाहिए, क्योंकि व्यक्तिगत किसान इन्हें खरीदने और इनका खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं. मशीनों की कीमत भी काफी होती है.
सीजेआई बोले-बयानबाजी से काम नहीं चलेगा
सीजेआई को सरकार की तरफ से आधिकारिक चार्ट दिखाया गया था. जिस पर उन्होंने कहा कि इस चार्ट में पीले रंग से दिखाए गए हिस्से के बारे में क्या जानकारी है. पराली को लेकर केवल बयान देने से काम नहीं चलेगा, किसानों के बीच जागरूकता और शिक्षा की जरूरत है. किसानों को पराली के आर्थिक महत्व और उससे होने वाले फायदे समझ में आएंगे तो वे उसे जलाने के बजाय अपने पास रखना पसंद करेंगे. कुछ किसान शुरुआत में इसके लिए तैयार नहीं होंगे, लेकिन इस प्रक्रिया में समय लगेगा. वहीं निजीन वाहनों की भूमिका पर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं. सीजेआई ने सरकार से पूछा कि प्रदूषण के लिए केवल पराली जिम्मेदार है या अभिजात्य वर्ग और उनके वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी एक बड़ी समस्या है?.
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से संकेत दिया कि प्रदूषण की समस्या का समाधान सिर्फ किसानों पर दोष मढ़ने से नहीं होगा, बल्कि परिवहन, ऊर्जा और कचरा प्रबंधन जैसे स्थानीय कारणों पर भी उतनी ही गंभीरता से काम करना होगा. फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और आने वाले दिनों में कोर्ट की ओर से और निर्देश आने की उम्मीद है.
जश्न और जागरुकता के साथ मनाए दीवाली: सुप्रीम कोर्ट
दिल्ली एनसीआर में बढ़ते हुए प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा 'प्रदूषण बढ़ रहा है जागरूकता बढ़ाने का बेहतर तरीका क्या हो सकता है?. इसके लिए राज्यों से अनुपालन रिपोर्ट और ताजा जानकारी भी मांगी गई है. केंद्र सरकार की तरफ से पेश की गई है, ASG ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि सरकार जागरूकता अभियान को और तेज करेगी. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि बार-बार न्यायिक आदेश जारी करने से उल्लंघनों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि लोगों के बीच यह मानसिकता बन रही है कि अदालत जितने ज्यादा आदेश पारित करेगी, उतने ही ज्यादा उल्लंघन होंगे. ASG ने बताया कि केंद्र ने विभिन्न राज्यों की ओर से उठाए गए कदमों और उनके अनुपालन का विवरण भी पेश किया है. यदि सुप्रीम कोर्ट सीधे राज्यों से अनुपालन रिपोर्ट मांगता है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा. इस पर कोर्ट ने कहा कि वह पेश किए गए दस्तावेजों और सामग्री का अध्ययन करेगा, यदि जरूरत हुई तो उचित निर्देश जारी किए जाएंगे. कोर्ट राज्यों से रिपोर्ट और ताजा अपडेट मांगने के लिए भी आदेश पारित करेगा. दिवाली की छुट्टियों के तुरंत बाद इस मामले में अगली सुनवाई होगी.
दिल्ली एनसीआर में हर दिन बढ़ रहा प्रदूषण
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर हर दिन तेजी से बढ़ रहा है. 30 अक्टूबर से 6 नवंबर के बीच में ही दिल्ली में प्रदूषण कई स्थानों पर 450 पार कर गया है. जबकि औसत प्रदूषण का स्तर 300 से ज्यादा बना हुआ है. 5 नवंबर को AQI का लेवल 369 और 6 नवंबर की सुबह 8 बजे तक यह 389 से 391 के बीच हो गया था. दिल्ली लगातार 5वें दिन बहुत खराब श्रेणी में बनी हुई है. वहीं एनसीआर के शहरों में भ हालात खराब हैं, नोएडा में AQI का लेवल 330, ग्रेटर नोएडा में 309, गाजियाबाद में 257 और गुरुग्राम में 322 की हवा बेहद खराब श्रेणी में है.
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