- ईडी ने दिल्ली-NCR में बिल्डरों के ठिकानों पर स्कीम में धोखाधड़ी के आरोप में छापेमारी की है.
- आरोप है कि बिल्डरों ने सबवेंशन स्कीम का लालच देकर होम बायर्स से फ्लैट बुक कराए.
- ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच CBI की FIR पर आधारित है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई थी.
दिल्ली-एनसीआर में बिल्डरों के ठिकानों पर ईडी ने ताबड़तोड़ छापेमारी की है. घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों को आए दिन बेवकूफ बनाकर पैसे लूटने की खबरें आती ही रहती हैं. ऐसे में ‘No EMI Till Possession' यानी फ्लैट मिलने तक EMI नहीं देने का भरोसा देकर कथित तौर पर ठगी करने वाले बिल्डरों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है. ईडी दो अलग-अलग बिल्डर-बैंक नेक्सस मामलों की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत छापेमारी कर रही है.
'नो EMI टिल पॉजेशन' का भरोसा!
जांच में सामने आया कि इन बिल्डरों की तरफ से होम बायर्स के लिए ऐसी स्कीमें पेश की गई थीं, जिनमें कहा गया कि फ्लैट का कब्जा मिलने तक खरीदारों को अपने होम लोन की EMI नहीं देनी होगी. इस तरह की स्कीम को आम तौर पर ‘No EMI Till Possession' या ‘Subvention Scheme' कहा जाता है.
इन स्कीमों के भरोसे कई लोगों ने बैंक से होम लोन लिया और संबंधित प्रोजेक्ट्स में फ्लैट या अपार्टमेंट बुक किए. लेकिन आरोप है कि कई साल गुजर जाने के बावजूद खरीदारों को उनके फ्लैट का कब्जा नहीं मिला. दूसरी तरफ, होम बायर्स के नाम पर लिए गए बैंक लोन और उससे जुड़ी देनदारियों का बोझ बना रहा.
CBI की FIR के बाद ED की एंट्री
मामले में ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच सीधे शुरू नहीं हुई, बल्कि सीबीआई की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई. ईडी ने बताया कि उसके दिल्ली जोनल ऑफिस-I ने इन मामलों में ECIR दर्ज की थी. ये ECIR सीबीआई की दो FIR के आधार पर दर्ज की गईं.
CBI ने 28 जुलाई 2025 को दोनों शिकायतें दर्ज की थीं. ये FIR सुप्रीम कोर्ट के 29 अप्रैल 2025 के आदेश के अनुपालन में दर्ज की गई थीं.
कई साल गुजरे, नहीं मिला फ्लैट...
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे मामले में सबसे बड़ी परेशानी उन होम बायर्स को हुई, जिन्होंने बिल्डरों के भरोसे अपनी जिंदगी की कमाई लगाई और बैंक से होम लोन लिया. उन्हें बताया गया कि पजेशन मिलने तक EMI का भुगतान बिल्डर की तरफ से किया जाएगा या सबवेंशन स्कीम के तहत EMI की व्यवस्था होगी.
बिल्डर-बैंक नेक्सस की भी जांच
ईडी की जांच सिर्फ बिल्डरों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बिल्डर-बैंक नेक्सस की भूमिका भी जांच के दायरे में है. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि होम बायर्स के नाम पर लिए गए बैंक लोन की रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया, पैसा किन खातों में गया और क्या इस रकम को दूसरी कंपनियों या संपत्तियों में डायवर्ट किया गया.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं