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दिल्ली में बंद हो रहा 'पुल मिठाई', जानिए कहां है ये और इसके नाम की रोचक कहानी

दिल्ली का प्रसिद्ध 'पुल मिठाई' नवंबर से रिनोवेशन कार्य के लिए बंद किया जाएगा. इस पुल का नाम एक ऐतिहासक कहानी से जुड़ा हुआ है.

दिल्ली में बंद हो रहा 'पुल मिठाई', जानिए कहां है ये और इसके नाम की रोचक कहानी
बाबा बघेल सिंह से जुड़ा है पुल मिठाई का इतिहास, नवंबर से बंद होगा मार्ग
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राजधानी दिल्ली में कई इलाके ऐसे हैं, जो हमेशा चर्चा में रहते हैं. अगर आप नॉर्थ दिल्ली आते-जाते हैं, तो आपने 'पुल मिठाई' जरूर देखा होगा. यह रेलवे लाइन के ऊपर बना पुल है. इस पुल को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. यह पुल नवंबर में बंद कर दिया जाएगा. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस पुल के रिनोवेशन के कार्य के चलते ऐसा किया जाएगा. इससे पहले दिल्ली में पुराना लोहा पुल भी बंद किया गया था. लोहा पुल की तरह ही 'मिठाई पुल' की कहानी बेहद रोचक है. आखिर इसका नाम मिठाई पुल कैसे पड़ा? आइए बताते हैं.

आखिर कहां है पुल मिठाई?

पुल मिठाई नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और शास्त्री नगर को जोड़ता है. यह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से आजाद मार्केट और सदर बाजार-तीस हजारी, गुलाबी बाग से शास्त्री, लाहौरी गेट को जोड़ता है. इसके बंद होने से इन इलाकों में ट्रैफिक कीबड़ी समस्या पैदा हो जाएगी. वैसे भी अक्सर देखा जाता है की पुरानी दिल्ली का यह इलाका भीड़भाड़ और जाम में फंसा रहता है.

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1783 में सिखों ने फतह की थी दिल्ली

इतिहास के अनुसार, मार्च 1783 में बाबा बघेल सिंह, नवाब जस्सा सिंह आहलूवालिया और सरदार जस्सा सिंह रामगढ़िया के नेतृत्व में सिख सेना ने दिल्ली पर विजय प्राप्त की थी और मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय को पराजित किया था. शाह आलम की सेना कमजोर हो चुकी थी. वहीं बघेल सिंह ने दिल्ली के लाल किले पर चढ़ाई कर दी. लेकिन यह जंग खूनी नहीं थी. सिखों ने मुगलों से समझौता किया. इसके बाद दिल्ली में सात गुरुद्वारे बनाए गए. दिल्ली के प्रसिद्ध बंगला साहिब, रकाबगंज, शीशगंज जैसे पवित्र स्थल आज भी उनकी देन हैं.

देखिए कैसा है पुल मिठाई?

आखिर कैसे नाम पड़ा पुल मिठाई?

मुगलों और सिखों की जंग की बात तो हो गई, लेकिन अब सवाल आता है कि आखिर इस पुल का इससे क्या लेना देना? दरअसल बाबा बघेल सिंह मिठाई खाने के शौकीन थे. उन्होंने एक खास गुड़ से बनी चिपचिपी मिठाई पसंद थी. ये मिठाई दिल्ली के गलियों में बड़े चाव से खाई जाती थी. जब मुगलों पर विजय प्राप्त करने के बाद बघेल सिंह वापस लौटे, तो उन्होंने सेना के साथ मिठाइयों की बड़ी खेप लटवाई थी. आज जहां ये पुल मौजूद है, वहां मिठाइयों को बांटा गया. भीड़ इतनी उमड़ी कि इलाके पर मिठाई का अंबार लग गया. इसके बाद ही ये पुल 'पुल मिठाई' कहलाने लगा.

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