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'मॉडर्न इंडिया', 'द स्वदेशी मूवमेंट इन बंगाल'... भारतीय इतिहास से जुड़ी चर्चित किताबों के लेखक इतिहासकार सुमित सरकार नहीं रहे

मशहूर इतिहासकार सुमित सरकार का दिल्ली में देहांत हो गया. 'सबॉल्टर्न स्टडीज़ कलेक्टिव' के संस्थापक सदस्यों में से एक थे, लेकिन बाद में उन्होंने इसकी आलोचना करना शुरू कर दिया.

'मॉडर्न इंडिया', 'द स्वदेशी मूवमेंट इन बंगाल'... भारतीय इतिहास से जुड़ी चर्चित किताबों के लेखक इतिहासकार सुमित सरकार नहीं रहे
सुमित सरकार ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में काफी वक्त तक इतिहास पढ़ाया. (Photo: X/@manojkjhadu)
  • जाने-माने इतिहासकार सुमित सरकार का दिल्ली स्थित उनके आवास पर निधन हो गया.
  • उन्होंने भारतीय इतिहास से जुड़ी कई रोचक किताबें लिखी.
  • इतिहास के प्रोफेसर के तौर पर दिल्ली यूनिवर्सिटी में सुमित सरकार ने लंबी सेवा दी.
नई दिल्ली:

भारत के जाने-माने इतिहासकार सुमित सरकार का गुरुवार को दिल्ली स्थित उनके घर पर 87 साल की उम्र में निधन हो गया है. वे लंबे वक्त से बीमार चल रहे थे. इतिहासकार और परिवार की दोस्त जी. अरुणिमा ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को यह जानकारी दी. अरुणिमा ने बताया, "प्रोफेसर सरकार लंबे वक्त से बीमार थे, लेकिन कुछ समय से वे उम्र से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे थे. पिछले कुछ साल से वे सार्वजनिक रूप से एक्टिव नहीं नजर आ रहे थे."

सुमित सरकार के परिवार में उनकी पत्नी और इतिहासकार तानिका सरकार और बेटे आदित्य सरकार हैं, जो वारविक यूनिवर्सिटी (University of Warwick) में साउथ एशियन हिस्ट्री के एसोसिएट प्रोफेसर हैं.

सुमित सरकार का अंतिम संस्कार शनिवार को किए जाने की संभावना है. तारीख और समय की पक्की जानकारी खबर छपने तक नहीं मिली है.

कौन हैं सुमित सरकार?

1939 में इतिहासकार सुशोभन सरकार के घर जन्मे सुमित सरकार ने प्रेसिडेंसी कॉलेज, कलकत्ता और कलकत्ता यूनिवर्सिटी से इतिहास की पढ़ाई की. उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी में लेक्चरर और बर्दवान यूनिवर्सिटी में रीडर के तौर पर पढ़ाने का काम किया. इतिहास के प्रोफेसर के तौर पर उनका सबसे लंबा कार्यकाल दिल्ली यूनिवर्सिटी में रहा.

उनके कुछ सबसे अहम कामों में 'द स्वदेशी मूवमेंट इन बंगाल', 'मॉडर्न इंडिया: 1885–1947' और 'राइटिंग सोशल हिस्ट्री' शामिल हैं. इन कामों ने उन्हें अलग-अलग सामाजिक समूहों, वर्गों और जन-आंदोलनों के अनुभवों के जरिए उपनिवेशवाद, राष्ट्रवाद और आजादी की लड़ाई का विश्लेषण करने वाले एक अहम जानकार के तौर पर स्थापित किया.

मार्क्सवादी इतिहासकार सुमित सरकार, स्वदेशी आंदोलन पर अपनी स्टडी और भारतीय राष्ट्रवाद के पारंपरिक, नेता-केंद्रित बयानों को चुनौती देने के लिए जाने जाते हैं. वे 'सबॉल्टर्न स्टडीज़ कलेक्टिव' के संस्थापक सदस्यों में से एक थे, लेकिन बाद में उन्होंने इसकी आलोचना करना शुरू कर दिया.

सुमित सरकार को 2003 में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर उनके काम के लिए 'इंडियन हिस्ट्री एंड कल्चर सोसाइटी' की तरफ से 'सरित चटर्जी मेमोरियल अवॉर्ड' मिला. इसके एक साल बाद, उन्हें उनकी किताब 'राइटिंग सोशल हिस्ट्री' के लिए 'रवींद्र पुरस्कार' दिया गया, जिसे उन्होंने 2007 में पश्चिम बंगाल में CPI(M) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार द्वारा किसानों के साथ किए गए व्यवहार के विरोध में लौटा दिया. 

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सोशल मीडिया श्रद्धांजलि...

सुमित सरकार की मौत के बाद सोशल मीडिया पर कई पाठकों और इतिहासकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. अरुणिमा ने एक्स पर लिखा, "सुमित, आपको नमन. इतिहासकार और बेहद नेक इंसान, प्रोफेसर सुमित सरकार का निधन हो गया. आधुनिक भारतीय इतिहास में उनका योगदान अतुलनीय है."

राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने गांधी के बारे में सुमित सरकार की समझ को याद किया. मनोज झा ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "गांधी के बारे में आपकी उस समझ को कैसे भुलाया जा सकता है कि वे लोगों को एक जैसा सोचने के लिए मजबूर नहीं करते थे, बल्कि एक ऐसा 'दायरा' बनाते थे, जिसके तहत अलग-अलग सोच वाले लोग भी मिलकर संघर्ष कर सकें. आपका यह विचार, आपके कई अन्य कामों की तरह ही, आज भी हमारे वर्तमान के लिए प्रासंगिक है."

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