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दिल्ली में बाढ़ से बचाव के लिए यमुना किनारे बनेगी 4.7 KM लंबी RCC दीवार, 99 करोड़ का प्रोजेक्ट मंजूर

दिल्ली सरकार ने राजधानी को बाढ़ से बचाने के लिए यमुना नदी के किनारे 4.7 किलोमीटर लंबी कंक्रीट दीवार बनाने की योजना को मंजूरी दी है.

दिल्ली में बाढ़ से बचाव के लिए यमुना किनारे बनेगी 4.7 KM लंबी RCC दीवार, 99 करोड़ का प्रोजेक्ट मंजूर
दिल्ली में फ्लड कंट्रोल का ब्लूप्रिंट तैयार (फाइल फोटो)
IANS
  • दिल्ली सरकार ने यमुना नदी के किनारे चार दशमलव सात किलोमीटर लंबी कंक्रीट दीवार बनाने की योजना को मंजूरी दी है
  • यह परियोजना बाढ़ प्रबंधन और जल निकासी योजना के अंतर्गत लगभग निन्यानवे करोड़ रुपये की लागत से पूरी की जाएगी
  • दीवार मैगजीन रोड ड्रेन और पुराने रेलवे पुल के बीच बनाई जाएगी जहां बाढ़ का खतरा सबसे अधिक रहता है

दिल्ली सरकार ने राजधानी को बाढ़ से बचाने के लिए यमुना नदी के किनारे 4.7 किलोमीटर लंबी कंक्रीट दीवार बनाने की योजना को मंजूरी दी है. इस परियोजना पर करीब 99 करोड़ रुपये खर्च होंगे. यह योजना दिल्ली सरकार की 622 करोड़ रुपये की बाढ़ प्रबंधन और जल निकासी योजना का हिस्सा है.

दिल्ली सरकार ने लिया फैसला

दिल्ली सचिवालय में हुई फ्लड कंट्रोल बोर्ड की 40वीं बैठक में यह फैसला लिया गया. बैठक की अध्यक्षता सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश वर्मा ने की. प्रस्तावित दीवार मैगजीन रोड ड्रेन और पुराने रेलवे पुल के बीच बनाई जाएगी. यह वह इलाका है जहां मॉनसून के दौरान यमुना का जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ का खतरा सबसे ज्यादा रहता है.

सरकार का मानना है कि यह दीवार नदी का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में बाढ़ के पानी को निचले और संवेदनशील इलाकों में घुसने से रोकेगी. हालांकि इसकी प्रभावशीलता अंतिम डिजाइन और आसपास की जल निकासी व्यवस्था के साथ इसके समन्वय पर निर्भर करेगी.

2023 में बाढ़ में डूब गए थे कई इलाके

दिल्ली में बाढ़ सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत 2023 की भीषण बाढ़ के बाद और ज्यादा महसूस की गई. जुलाई 2023 में पुराने रेलवे पुल के पास यमुना का जलस्तर रिकॉर्ड 208.66 मीटर तक पहुंच गया था, जो खतरे के निशान 205.33 मीटर से काफी ऊपर था. इससे राजधानी के कई इलाके जलमग्न हो गए थे और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा था. 2025 में भी यमुना का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया था.

बैठक में नालों की सफाई के बाद निकाली जाने वाली गाद के निपटान की समस्या पर भी चर्चा हुई. अक्सर गाद नालों के किनारे ही छोड़ दी जाती है, जो बारिश में दोबारा नालों में पहुंचकर उन्हें चोक कर देती है और जलभराव की समस्या बढ़ जाती है.

इस समस्या के समाधान के लिए बोर्ड ने 260 करोड़ रुपये लागत की तीन बायोमाइनिंग परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं के तहत गाद का वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेसिंग और निपटान किया जाएगा. इससे नजफगढ़ नाले समेत अन्य प्रमुख नालों को फायदा मिलने की उम्मीद है.

इसके अलावा नालों के किनारे खाली और उपेक्षित स्थानों को सार्वजनिक उपयोग के लिए विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई. बारापुला नाले के विकास की तर्ज पर तैयार इस प्रस्ताव में नालों के किनारों पर पैदल रास्ते, ग्रीन बेल्ट, पेड़-पौधे लगाना, लाइटिंग और सुरक्षा के लिए फेसिंग लगाना शामिल है. इसका उद्देश्य इन इलाकों को सुरक्षित बनाना और अतिक्रमण रोकना है.

मंत्री प्रवेश वर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी परियोजनाएं तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाएं और उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए.

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