- दीपेंदर हुड्डा ने सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार को जनता से जुड़ाव का उदाहरण बताया था, जिससे विवाद हुआ
- हरियाणा कांग्रेस नेता कुलदीप शर्मा ने हुड्डा के बयान पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र लिखा था
- हुड्डा ने कहा कि उनका बयान गलत तरीके से पेश किया गया और सिख समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का इरादा नहीं था
सिख दंगों के दोषी ठहराए गए कांग्रेस नेता सज्जन कुमार का पिछले दिनों निधन हो गया था. उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंदर हुड्डा ने उनकी तारीफ कर दी थी और कहा था कि जनता से उनका जुड़ाव एक मिसाल था. इस पर खूब विवाद हुआ और सिख दंगों के दोषी को मिसाल बताए जाने पर वह घिर गए थे. यहां तक कि हरियाणा कांग्रेस के ही नेता कुलदीप शर्मा ने उनके खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लेटर लिखा था. अब इस मामले में दीपेंदर हुड्डा की सफाई आई है और उनका कहना है कि उनकी बात को गलत ढंग से पेश किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि सिख समाज के लोगों को ठेस पहुंचाने की बात तो मैं सोच भी नहीं सकता. वह हमारा अपना परिवार हैं और यदि उनकी भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं खेद प्रकट करता हूं. सिख समाज हमारे देश का गौरवशाली समाज है और उनकी कुर्बानियां कभी भूली नहीं जा सकती. सफाई देते हुए हुड्डा ने कहा, 'पिछले दो दिन से मैं देख रहा हूं कि मेरे बयान को घुमा-फिराकर लोगों के सामने पेश किया जा रहा है. मेरे बयान में एक ऐसा भी अंग्रेजी का शब्द डाला जा रहा है, जो मैंने बोला ही नहीं, न ही मेरा दूर-दूर तक ऐसा कोई मतलब था. मेरी कोई भी मंशा किसी हमारे भाई को ठेस पहुँचाने की नहीं थी. सिख समाज के हमारे भाईयों को तो ठेस पहुंचाने की मैं सोच भी नहीं सकता. ना मेरी कभी कोई भावना ऐसी थी.
पिछले दो दिन से मैं देख रहा हूँ कि मेरे बयान को घुमा-फिराकर लोगों के सामने पेश किया जा रहा है। और मेरे बयान में एक ऐसा भी अंग्रेजी का शब्द डाला जा रहा है, जो मैंने बोला ही नहीं, न ही मेरा दूर-दूर तक ऐसा कोई मतलब था।
— Deepender Singh Hooda (@DeependerSHooda) August 23, 2026
मेरी कोई भी मंशा किसी हमारे भाई को ठेस पहुँचाने की नहीं थी। सिख… pic.twitter.com/W5qFlGUbI2
दीपेंदर हुड्डा ने कहा कि हमारा सिख समाज के साथ एक परिवार जैसा रिश्ता है. कभी भी जरूरत हुई तो छोटे-बड़े भाइयों की तरह आपस में हम हमेशा साथ खड़े रहे. ऐसा हमारा रिश्ता है.' उन्होंने कहा कि जब 1908 में पंजाब में 'पगड़ी संभाल जट्टा' आंदोलन था, तो शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जी के चाचा सरदार अजीत सिंह जी के साथ मेरे खुद के परदादा चौधरी मातूराम जी को काले पानी की सजा हुई थी. तब से लेकर जब किसान आंदोलन हुआ, जब पंजाब से हमारे किसान भाई आए, तो सबसे पहले उनके साथ मैं स्वयं पहुंचा. हमेशा हर संघर्ष में हम साथ रहे हैं. और19 84 में जो हुआ, सिख समाज के न्याय की उस लड़ाई में भी हम उनके साथ हैं. उनको न्याय मिलना चाहिए, कोई दोषी नहीं बचना चाहिए.
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