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मिलेनियम सिटी का 'पाताल लोक'-सड़क पर बाइकर महिला को कुचला, वॉर हीरो को पीटा, सरेआम मर्डर- गुरुग्राम में दर्द

गुरुग्राम में महिला बाइकर को टक्कर मारकर छोड़ दिया गया, पूर्व वायुसेना वार हीरो से मारपीट हुई और बेटे को निशाना बनाने आए हमलावरों ने पिता की हत्या कर दी. क्या ये सिर्फ अलग-अलग वारदातें हैं या मिलेनियम सिटी में बढ़ते डर और हिंसा की बड़ी कहानी? जानिए पूरी पड़ताल.

ऊपर से देखिए तो गुरुग्राम भारत की नई अर्थव्यवस्था का पोस्टर बॉय है. कांच की ऊंची इमारतें, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दफ्तर, करोड़ों रुपये के अपार्टमेंट और देशभर से नौकरी की तलाश में आने वाले हजारों युवा. लेकिन इसी शहर की एक दूसरी तस्वीर भी है, जो पिछले कुछ दिनों में सामने आई तीन घटनाओं ने फिर दिखा दी. यहां एक महिला बाइकर को कार से टक्कर मारकर छोड़ दिया जाता है, Amit Gupta जैसे पूर्व वायुसेना वार हीरो को सड़क पर घेरकर पीटा जाता है और बेटे को निशाना बनाने आए हमलावर उसके पिता की हत्या कर देते हैं.

ये तीनों घटनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन एक सवाल एक जैसा छोड़ जाती हैं. आखिर गुरुग्राम में ऐसा क्या बदल रहा है कि शहर की चमक के साथ-साथ हिंसा, गुस्सा और असुरक्षा की खबरें भी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं? चौंकाने वाली बात यह है कि गुरुग्राम पुलिस के आंकड़े कई अपराधों में गिरावट की बात करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ हत्या के मामले 2021 के 75 से बढ़कर 2024 और 2025 में 93 तक पहुंच चुके हैं. अवैध हथियारों की बरामदगी बढ़ी है, साइबर अपराध रिकॉर्ड स्तर पर हैं और सड़क पर होने वाली हिंसक घटनाएं लगातार सुर्खियां बन रही हैं. ऐसे में सवाल सिर्फ अपराध का नहीं, बल्कि उस माहौल का भी है जो धीरे-धीरे इस मिलेनियम सिटी की पहचान के साथ जुड़ता जा रहा है.

तीन घटनाएं, जिसने फिर खड़े कर दिए पुराने सवाल

मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में अपराध कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में सामने आई तीन घटनाओं ने फिर शहर की कानून-व्यवस्था को बहस के केंद्र में ला दिया है. सड़क पर महिला को टक्कर मारकर भागने का मामला हो, पूर्व वायुसेना अधिकारी के साथ मारपीट हो या फिर रंजिश में पिता की हत्या, तीनों घटनाएं एक ही बात की ओर इशारा करती हैं... छोटी हो या बड़ी बात...गुरुग्राम शहर में हिंसा का रास्ता चुनने का चलन बढ़ता जा रहा है. दिलचस्प यह भी है कि ये घटनाएं ऐसे समय में हुई हैं, जब पुलिस दावा कर रही है कि शहर में कई बड़े अपराधों में कमी आई है. आगे बढ़ने से पहले देख लेते हैं कि ग्रुरुग्राम की क्राइम डायरी क्या कहती है? अगर पिछले पांच साल के उपलब्ध पुलिस आंकड़ों को देखें, तो तस्वीर एकदम सीधी नहीं दिखती.

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2021 में गुरुग्राम में 75 हत्या के मामले दर्ज हुए थे. 2022 में यह संख्या बढ़कर 88 पहुंच गई. 2024 और 2025 में हत्या के मामले 93-93 दर्ज हुए. यानी पांच साल में हत्या के मामलों में करीब 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली. स्नैचिंग के मामलों का ग्राफ भी दिलचस्प है. 2021 में 170 मामले दर्ज हुए, जो 2022 में बढ़कर 218 हो गए. हालांकि 2025 तक यह संख्या घटकर 167 रह गई.  लूट के मामलों में भी उतार-चढ़ाव दिखा. 2021 में 63 मामले, 2022 में 62, फिर 2024 में 94 और 2025 में 67 मामले दर्ज हुए.
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गन कल्चर क्यों बढ़ रहा है?

सबसे ज्यादा चिंता पैदा करने वाला ट्रेंड अवैध हथियारों का है. 2025 में गुरुग्राम पुलिस ने अवैध हथियारों से जुड़े 387 आरोपियों को गिरफ्तार किया. उनके कब्जे से 160 पिस्टल, 91 देसी कट्टे और सैकड़ों कारतूस बरामद किए गए. पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि यह संख्या पिछले साल की तुलना में अधिक थी.  यही वजह है कि जब भी फायरिंग, गैंगवार या हत्या की कोई घटना होती है, तो लोग इसे एक अलग घटना की तरह नहीं देखते. उन्हें लगता है कि शहर में हथियारों और गैंग नेटवर्क की मौजूदगी लगातार बनी हुई है.

पुलिस अपराध घटने का दावा करती है, फिर डर क्यों बढ़ रहा है?

गुरुग्राम पुलिस के 2025 के सालाना आंकड़े बताते हैं कि वाहन चोरी 2,903 से घटकर 2,613 हो गई. हत्या की कोशिश के मामले 263 से घटकर 255 हुए. लूट, स्नैचिंग और कई अन्य अपराधों में भी गिरावट दर्ज की गई. पुलिस ने 104 संगठित गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई की और 279 बड़े अपराधियों को गिरफ्तार किया.  यानी कागज पर तस्वीर पहले से बेहतर दिखती है लेकिन दूसरी तरफ हर कुछ दिनों में सामने आने वाली हाई-प्रोफाइल घटनाएं लोगों के मन में अलग कहानी लिख रही हैं. यही वजह है कि आंकड़े और जमीनी धारणा एक-दूसरे से मेल खाते नहीं दिखते.

शहर पहले से ज्यादा असुरक्षित क्यों हुआ? 

गुरुग्राम की पहचान आईटी और कॉर्पोरेट शहर की है. लेकिन इसी पहचान के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ा है . 2024 में साइबर अपराध से जुड़ी 40,051 शिकायतें दर्ज हुई थीं. 2025 में यह संख्या बढ़कर 41,395 पहुंच गई. पुलिस ने 2025 में 2,649 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया. मतलब अपराध का चेहरा बदल रहा है. सड़क पर अपराध एक चिंता है, लेकिन मोबाइल स्क्रीन के पीछे बैठा अपराधी भी अब उतना ही बड़ा खतरा बन चुका है. गुरुग्राम की सबसे बड़ी विडंबना यही है. आंकड़े बताते हैं कि कई अपराधों में कमी आई है. पुलिस गैंगों पर कार्रवाई कर रही है. वाहन चोरी और स्नैचिंग जैसे मामलों में गिरावट दर्ज हुई है. ऐसे में सवाल उठता है कि शहर खुद को ज्यादा असुरक्षित क्यों महसूस कर रहा है?  शायद इसलिए क्योंकि हत्या के आंकड़े अब भी ऊंचे हैं. अवैध हथियार बरामद हो रहे हैं. गैंगस्टर नेटवर्क सुर्खियों में बने रहते हैं. और सबसे बड़ी बात, सड़क पर गुस्सा अब पहले से ज्यादा खतरनाक दिखाई देने लगा है.  महिला को टक्कर मारकर भागने वाला चालक, पूर्व सैन्य अधिकारी पर हमला और रंजिश में हुई हत्या केवल तीन क्राइम स्टोरी नहीं हैं. ये उस बेचैनी की तीन तस्वीरें हैं, जो आज गुरुग्राम की चमक के पीछे दिखाई देने लगी है. मिलेनियम सिटी अभी भी करोड़ों के निवेश और सपनों का शहर है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह शहर अपने नागरिकों को पहले जितना सुरक्षित महसूस भी करा पा रहा है?
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