"हमको शकील बॉस ने भेजा है. 6 महीने में छोटा राजन को फिर मारेंगे." ये धमकी एनडीटीवी के कैमरे पर मुन्ना झिंगाड़ा नाम के दाऊद इब्राहिम गिरोह के शूटर ने सितंबर 2000 में तब दी थी जब बैंकॉक पुलिस उसे अदालत में पेश करने ले जा रही थी. ये वही झिंगाड़ा है जिस पर दिल्ली में पकड़े गये आतंकियों के हैंडलर होने का आरोप है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आईएसआई के 9 एजेंटों को गिरफ्तार किया. इसके बाद मोहम्मद सलीम उर्फ मुन्ना झिंगाड़ा का नाम एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है.
1994 में, जब छोटा राजन ने दाऊद इब्राहिम से अलग होने का फैसला किया, तो एक खूनी गैंगवार शुरू हो गया, जिसकी धमक विदेशों तक सुनाई दी. इसी गैंगवार के तहत डी कंपनी ने "मिशन बैंकॉक" शुरू किया और इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई एक शूटर - मुन्ना झिंगाड़ा को.
ऐसे अपराधी बना मुन्ना झिंगारा
रिहाई के बाद, झिंगाड़ा शरीफ जिंदगी जीना चाहता था और अपने पिता के प्लंबिंग बिजनेस में हाथ बंटाने लगा. लेकिन वज़ीर के भाई उसे मारने की ताक में थे. एक बार, वज़ीर का भाई उसकी हत्या करने आया, लेकिन झिंगाड़ा ने पलटकर हमला किया और उसका सिर फोड़ दिया. दुश्मनी चलती रही और आखिरकार 1995 में झिंगाड़ा ने वज़ीर के भाई को भी मार डाला. अब वह फिर जेल नहीं जाना चाहता था, इसलिए वह उत्तर प्रदेश भाग गया और अपनी सुरक्षा के लिए एक देसी कट्टा खरीद लिया.

मुन्ना झिंगाड़ा (फाइल फोटो)
मुंबई पुलिस ने कई दिनों तक उसकी तलाश की और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया गया और वह फिर से आर्थर रोड जेल पहुंच गया. लेकिन यहीं से उसकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया. जेल में उसकी मुलाकात डी कंपनी के इस्माइल मलबारी से हुई. झिंगाड़ा की क्रूरता देखकर मलबारी ने छोटा शकील से उसकी बात कराई और उसे डी कंपनी में भर्ती करवा दिया. जल्द ही, गिरोह ने उसकी जमानत करवा दी.
छोटा शकील ने झिंगारा को दिया अंडरवर्ल्ड डॉन अरुण गवली की हत्या का काम
छोटा शकील ने उसे पहला बड़ा काम सौंपा - अंडरवर्ल्ड डॉन अरुण गवली की हत्या करने का. गवली के आदमियों ने 1991 में दाऊद के साले इब्राहिम पारकर की हत्या कर दी थी, और दाऊद बदला लेना चाहता था. 1997 में, जब गवली मुंबई के आज़ाद मैदान में अपनी पार्टी की रैली निकालने वाला था, तो झिंगाड़ा एक गुलदस्ते में पिस्तौल छुपाकर वहां पहुंच गया. लेकिन गवली उस दिन आया ही नहीं और मिशन फेल हो गया.
इसके बाद, छोटा शकील के कहने पर झिंगाड़ा ने मुंबई में कई हत्याएं कीं. 1997 में उसने छोटा राजन के करीबी कुशाल जैन को मार डाला. पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी, तो छोटा शकील ने उसे नेपाल के रास्ते दुबई भेज दिया. कुछ समय बाद, वह पाकिस्तान चला गया.
इसी बीच, छोटा शकील को पता चला कि छोटा राजन बैंकॉक में रह रहा है. शकील ने अशोक शेट्टी नाम के अपने आदमी को राजन के गिरोह में शामिल करवाया. धीरे-धीरे, उसने राजन के लोगों को लालच देकर विश्वासघात के लिए तैयार कर लिया और उसका ठिकाना पता कर लिया.

दाउद इब्राहिम के साथ मुन्ना झिंगारा
15 सितंबर 2000 की रात, अशोक शेट्टी एक केक लेकर रोहित वर्मा के फ्लैट पर पहुंचा और दरवाजा खटखटाया. जैसे ही वर्मा ने दरवाजा खोला, झिंगाड़ा और उसके साथी ने गोलियों की बौछार कर दी. छोटा राजन अंदर के कमरे में था. वह दरवाजे पर कुंडी लगाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन झिंगाड़ा ने उस पर भी गोलियां चला दीं. जान बचाने के लिए राजन बालकनी से नीचे कूद गया. कुछ देर बाद, बैंकॉक पुलिस ने उसे अस्पताल पहुंचाया और उसकी जान बच गई.
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थोड़ी ही देर में बैंकॉक पुलिस ने झिंगाड़ा को गिरफ्तार कर लिया. अदालत में पेशी के दौरान, उसने कैमरों के सामने कबूल किया कि "शकील बॉस" ने उसे राजन को मारने भेजा था और छह महीने के अंदर डी कंपनी उसे खत्म कर देगी. भारत सरकार ने थाईलैंड में उसके प्रत्यर्पण की कोशिश की, लेकिन मामला हार गई. अंततः झिंगाड़ा को पाकिस्तान के हवाले कर दिया गया.
मुन्ना झिंगाड़ा तो मुंबई पुलिस के हाथ नहीं लगा, लेकिन 19 नवंबर 2009 को क्राइम ब्रांच ने बोरीवली इलाके में एक एनकाउंटर के दौरान उसके भाई इमरान झिंगाड़ा को ढेर कर दिया. इमरान भी अपने भाई की तरह डी कंपनी का खतरनाक शूटर था और उस पर 6 हत्याओं का आरोप था. उसने मलेशिया में छोटा राजन के खासमखास बालू डोकरे की भी हत्या की थी.
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