- दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर शनिवार शाम और रात को करीब 18 विमानों ने जीपीएस स्पूफिंग की शिकायत की है.
- सरकारी एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं और यह पता लगाने में लगी हैं कि यह समस्या फिर से क्यों आई.
- जीपीएस स्पूफिंग के कारण विमानों के बीच दूरी बढ़ाकर सुरक्षा सुनिश्चित की गई, जिससे उड़ानों में देरी हुई.
दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक बार फिर जीपीएस स्पूफिंग का मामला सामने आया है. सूत्रों के अनुसार, शनिवार शाम और रात को करीब 16 से 18 विमानों ने जीपीएस स्पूफिंग की शिकायत की. फिलहाल सरकारी एजेंसियां मामले की जांच कर रही है और यह जानने में जुटी है कि आखिर यह समस्या फिर क्यों शुरू हुई.
जीपीएस स्पूफिंग के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने सुरक्षा के लिए विमानों के बीच दूरी बढ़ा दी, जिससे रडार की मदद से उन्हें सुरक्षित उतारा जा सके. इस कारण से एयरपोर्ट पर भीड़ बढ़ गई और कई विमानों के उड़ान भरने में देरी हुई.
स्पूफिंग के कारण ये हुआ असर
सामान्य तौर पर 14,000 फीट से नीचे विमानों के बीच 3 नॉटिकल माइल की दूरी रखी जाती है, लेकिन शनिवार रात इसे बढ़ाकर 5 नॉटिकल माइल कर दिया गया. GPS गड़बड़ी के कारण विमानों को सीधे रास्ते से लाने के बजाय “पॉइंट टू पॉइंट” तरीके से उड़ाया गया, जिससे निगरानी बढ़ानी पड़ी.
दिल्ली एयरपोर्ट सामान्य स्थिति में एक घंटे में करीब 42 विमानों की लैंडिंग संभाल सकता है, लेकिन GPS स्पूफिंग के दौरान यह संख्या घटकर करीब 30 रह गई.
GPS स्पूफिंग एक साइबर हमला होता है, जिसमें नकली रेडियो सिग्नल भेजकर असली सैटेलाइट सिग्नल को गड़बड़ा दिया जाता है.
जीपीएसस से जुड़ी दो बड़ी समस्याएं
विमानन क्षेत्र में जीपीएस से जुड़ी दो बड़ी समस्याएं होती हैं-
- जैमिंग: युद्ध वाले इलाकों में सेना द्वारा लोकेशन छिपाने के लिए सिग्नल बंद करना
- स्पूफिंग: नकली सिग्नल भेजकर पायलट को गलत लोकेशन दिखाना
स्पूफिंग के दौरान पायलट को विमान की लोकेशन असली जगह से हजारों किलोमीटर दूर तक दिखाई दे सकती है.
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