- कर्नाटक के बेलगावी में एक बिजनेसमैन को सीबीआई डायरेक्टर बनकर करीब 15 करोड़ रुपये का साइबर फ्रॉड किया गया
- पीड़ित अजीत गोपालकृष्ण को तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर मनोवैज्ञानिक दबाव में धोखाधड़ी के लिए मजबूर किया गया था
- आरोपी ने मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा आरोप लगाकर केनरा बैंक खाते से पच्चीस लाख रुपये की रकम का हवाला दिया था
देश में साइबर फ्रॉड के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं. अपराधी नए-नए पेंतरे लोगों को ठगने के निकाल रहे हैं. अब सीबीआई डायरेक्टर बन एक बिजनेसमैन से 15 करोड़ 45 लाख रुपये ठगने का मामला सामने आया है. मामला कर्नाटक के बेलगावी शहर का है, जहां अजीत गोपालकृष्ण को लगभग तीन दिनों तक डिजिटल अरेस्ट किया गया. पुलिस जांच में सामने आया है कि इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क के तार हैदराबाद से दिल्ली और पश्चिम बंगाल तक फैले हुए हैं. फ्रॉड में शामिल कई बैंक खातों की पहचान पुलिस ने कर ली है.
25 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का लागया आरोप
शिकायतकर्ता अजीत गोपालकृष्ण सराफ बेलगावी शहर के तिलकवाड़ी में रहते हैं. अजीत ने पुलिस को बताया, मुझे के. सुब्रमण्यम नाम के शख्स का फोन आया, जिसने खुद को सीबीआई निदेशक बताया. फोन करने वाले शख्स ने आरोप लगाया कि उसके नाम पर रजिस्ट्रेशन दो सिम कार्ड जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल से जुड़े हुए हैं. धोखेबाज ने आगे दावा किया कि नरेश गोयल को गिरफ्तार कर लिया गया है और जांच के दौरान पता चला है कि पीड़ित ने गोयल के साथ मिलकर अपने केनरा बैंक खाते से 25 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की थी और कमीशन कमाया था.
3 दिन रखा डिजिटल अरेस्ट, RTGS से ट्रांसफर कराए पैसे
अजीत को साइबर अपराधी ने डिजिटल अरेस्ट कर लिया. इसके बाद फोन कर रहे शख्स ने पीड़ित को सहयोग न करने पर तुरंत गिरफ्तार कर जेल में डालने की धमकी दी. पुलिस ने बताया कि पीड़ित पर बेहद ज्यादा मनोवैज्ञानिक दबाव डाला गया, जिसके कारण वह धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर हो गया. गिरफ्तारी के डर से पीड़ित ने 7 फरवरी से 9 मार्च 2026 के बीच आरटीजीएस के जरिए कुल 15,45,00,000 रुपये आरोपी के बताए अकाउंट में ट्रांसफर कर दिये.
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हैदरााद से पश्चिम बंगाल तक फैला अपराधियों का नेटवर्क
जांच के दौरान, पुलिस ने धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए कम से कम 10 शुरुआती बेनिफिशियर बैंक खातों की पहचान कर ली है. ये खाते हैदराबाद, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में पाए गए हैं, जो एक ऑर्गेनाइज्ड इंटरस्टेट साइबर क्राइम नेटवर्क के इस मामले में शामिल होने का संकेत देते हैं. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों का पता लगाने, पहचाने गए खातों को फ्रीज करने और धोखाधड़ी की गई राशि की वसूली के प्रयास जारी है.
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