- जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान हुई कार्रवाई की विपक्षी नेताओं ने तीव्र आलोचना की.
- लेकिन कांग्रेस ने जंतर-मंतर की घटना पर प्रतिक्रिया देने में देरी की और सोनम वांगचुक का नाम नहीं लिया.
- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र और संविधान के ऊपर काला धब्बा बताया.
जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल में आज जो कुछ हुआ, उसे पूरे देश ने देखा. कई विपक्षी दलों के नेताओं ने इसकी आलोचना भी की. लेकिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का रवैया हैरानी भरा रहा. कांग्रेस ने इस मामले में प्रतिक्रिया देने में देरी की. बाद में जब कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी तो उसमें सोनम वांगचुक का जिक्र तक नहीं था. जबकि दूसरी ओर अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने जाने की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए. कांग्रेस ने जंतर-मंतर की घटना की कड़ी आलोचना की और इस कार्रवाई को देश के लोकतंत्र और संविधान के ऊपर 'एक और काला धब्बा' बताया है. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी ने तो इस मामले पर प्रतिक्रिया तक नहीं दी.
खरगे ने जीडी अग्रवाल, महिला पहलवान का नाम लिया लेकिन वांगचुक का नहीं
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘एक्स' पर पोस्ट कर कहा, '111 दिन तक मां गंगा को बचाने के लिए आमरण अनशन पर बैठे प्रो जी.डी. अग्रवाल हों या हरियाणा की ओलंपिक पहलवान हों, हमारे 750 अन्नदाता किसान हों, दलित-आदिवासी हों, या फिर पेपर लीक की बलि चढ़े 25 बच्चे और उनके परिजन, इस तानाशाह सरकार ने किसी को नहीं बख्शा.'
उन्होंने कहा, ‘‘इनकी नजर में कोई भी अगर आवाज उठाता है तो वह राष्ट्र विरोधी है, परजीवी है. जंतर-मंतर पर आज जो हुआ वह लोकतंत्र और संविधान के ऊपर एक और काला धब्बा है.'' खरगे ने कहा, ‘‘कोटा और देहरादून से ‘छात्रों की गूंज' का आगाज हो चुका है…यह दिल्ली की दहलीज तक जरूर पहुंचेगी.''
जंतर-मं

जंतर-मंतर की घटना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रतिक्रिया.
तर की घटना पर पवन खेड़ा ने क्या लिखा?
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने ‘एक्स' कहा, ‘‘हमारा संविधान हर नागरिक को अपनी आवाज उठाने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का बुनियादी अधिकार देता है. लेकिन आज गृह मंत्रालय का रवैया देखकर लगता है कि उसने इसी संवैधानिक अधिकार को अपना निशाना बना लिया है.''
उन्होंने कहा, ‘‘इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र आज दुनिया के सबसे अलोकतांत्रिक और लोकतंत्र-विरोधी राजनीतिक दल के कब्जे में है.'' खेड़ा ने कहा, ‘‘दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है, और कल ही इसी मंत्रालय ने दिल्ली को नया पुलिस आयुक्त दिया है. अगर आज की बर्बर कार्रवाई आयुक्त साहब का पहला संदेश है, तो इससे साफ पता चलता है कि उनकी वफादारी संवैधानिक कर्तव्य से ज्यादा सत्ता के प्रति है.''
उन्होंने कहा, ‘‘महिला पहलवानों को सड़कों पर घसीटना हो या पूर्व सैनिकों के साथ बदसलूकी करना- यह सरकार बार-बार दिखा चुकी है कि उसे न संविधान की इज्जत है और न ही लोकतांत्रिक मर्यादा की.''

जंतर-मंतर की घटना पर पवन खेड़ा का एक्स पोस्ट.
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘आज की घटना ने एक बार फिर इस सोच को बेनकाब कर दिया है. इस सरकार के लिए शांतिपूर्ण विरोध किसी नागरिक का बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार नहीं, बल्कि ‘‘कानून एवं व्यवस्था'' की एक समस्या है, जिसे डंडे के जोर पर कुचलना सही माना जाता है.''
पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस दूसरे को नहीं देता चाहती हाइप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे हो या मीडिया सेल के प्रमुख पवन खेड़ा दोनों ने जंतर-मंतर की घटना पर सवाल तो उठाया लेकिन सोनम वांगचुक का नाम तक नहीं लिया. जानकारों का मानना है कि कांग्रेस पेपर लीक के मुद्दे को अपने स्तर से उठा रही है. वो इस मुद्दे में किसी दूसरे को हाइप नहीं देना चाहते. इन दोनों नेताओं का पोस्ट शायद इसी ओर इशारा कर रहा है.
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