- ओडिशा के पुरी से BJP सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस द्वारा आयोजित मॉक संसद कार्यक्रम पर तीखा हमला किया है.
- उन्होंने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और वोटों पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार न होने का आरोप लगाया है.
- संबित पात्रा ने कहा कि स्वतंत्रता के समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सरदार पटेल के पक्ष में समर्थन दिया था.
ओडिशा के पुरी से BJP सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस की ओर से आयोजित मॉक संसद कार्यक्रम पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को वोटों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. बीजेपी सांसद ने कहा कि आज कांग्रेस पार्टी और उनके कुछ सहयोगी दल लोकतंत्र के साथ मजाक कर रहे हैं. ये लोग असली संसद में हंगामा करते हैं और वहां काम नहीं करने देते हैं. आज वोट चोरी को लेकर जब खरगे जी बोल रहे थे तो मैंने सोचा की हां वोट चोरी हुई थी. पंडित नेहरू सरदार पटेल का वोट चोरी करके प्रधानमंत्री बने थे. कांग्रेस पार्टी मॉक पार्लियमेंट कर रही है और पहली वोट चोरी नेहरू जी ने की थी.
संबित पात्रा ने कहा कि स्वतंत्रता के समय कांग्रेस के अधिकांश वरिष्ठ नेताओं का समर्थन सरदार वल्लभभाई पटेल के पक्ष में था. लेकिन इसके बावजूद पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर नेताओं की राय को नजरअंदाज किया गया और लोकतांत्रिक भावना के विपरीत निर्णय लिया गया.
बीजेपी नेता संबित पात्रा ने कहा कि अभी विभिन्न राज्यों में करीब 13 करोड़ लोगों के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हुए हैं. सवाल यह है कि ऐसा क्यों हुआ? इसके पीछे ASDD फॉर्मूला है. ASDD में 'A' का मतलब है 'Absent' यानी अनुपस्थित. लेकिन कौन अनुपस्थित है, कहां अनुपस्थित है और किस आधार पर अनुपस्थित माना गया है, यह समझना जरूरी है.
संबित पात्रा ने कहा कि लगभग 12 करोड़ लोग ऐसे थे, जो स्थायी रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले गए हैं. उदाहरण के तौर पर, यदि मैं जोर बाग से सिविल लाइंस शिफ्ट हो गया हूं, तो मेरी जिम्मेदारी है कि मैं फॉर्म-6 भरकर नए स्थान की मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराऊं. लेकिन अक्सर लोग इस प्रक्रिया को टाल देते हैं और सोचते हैं कि चुनाव आने पर यह काम कर लेंगे. बीजेपी नेता ने कहा कि कई लोग यह सोचते हैं कि पुरानी जगह से उनका नाम अपने आप हट जाएगा, इसलिए वे उसे हटवाने की प्रक्रिया नहीं करत, जबकि ऐसा नहीं होता. SIR की प्रक्रिया पहले भी कई बार हो चुकी है. देश में अब तक कुल 12 बार SIR हुआ है, जिनमें से 10 बार कांग्रेस के शासनकाल के दौरान आयोजित किया गया था.
संबित पात्रा ने कहा कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, वे इसी वजह से नाराज दिखाई दे रहे हैं. जब फर्जी वोटिंग पर रोक लगती है, तो कुछ लोगों में स्वाभाविक रूप से निराशा और असंतोष पैदा होता है. ASDD में एक 'D' का मतलब 'Death' यानी मृत्यु और दूसरा 'D' 'Duplicate' यानी डुप्लीकेट नाम है. उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति का नाम आंध्र प्रदेश और दिल्ली दोनों जगह या बिहार और दिल्ली दोनों जगह मतदाता सूची में दर्ज है, तो उसे एक स्थान चुनना होगा, क्योंकि एक व्यक्ति का नाम दो जगहों पर नहीं रह सकता.
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