- कांग्रेस ने केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीशन को चुना, जो 10 दिन के मंथन के बाद तय हुआ
- बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के दबाव में मुख्यमंत्री पद के लिए सतीशन को चुना है
- इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने कांग्रेस के फैसले का समर्थन किया और इसे केरल के लिए सही निर्णय बताया
कांग्रेस ने आखिरकार केरलम के नए मुख्यमंत्री को चुन ही लिया. 10 दिन तक चले मंथन के बाद कांग्रेस हाईकमान ने वीडी सतीशन के नाम पर मुहर लगाई है. लेकिन इस नाम पर अब बीजेपी की तरफ से तीखे हमले होने शुरू हो गए हैं. बीजेपी ने कांग्रेस को 'मुस्लिम लीग' तक कह डाला. ऐसा इसलिए क्योंकि बीजेपी का मानना है कि कांग्रेस ने यह फैसला इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के दबाव में लिया है.
IUML, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) का हिस्सा है. केरल के विधानसभा चुनाव में यूडीएफ ने 140 में से 102 सीटें जीती हैं.
बीजेपी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने 'IUML के आगे घुटने टेक दिए हैं' और वह 'तुष्टीकरण की राजनीति' कर रही है. 'तुष्टीकरण की राजनीति' एक ऐसा आम शब्द है जिसका इस्तेमाल अक्सर उन विरोधी दलों की आलोचना करने के लिए किया जाता है, जिनके बारे में यह माना जाता है कि वे अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं और उनसे जुड़े मुद्दों से प्रभावित होते हैं.
आज दोपहर बाद ही सतीशन के नाम पर केरल के मुख्यमंत्री के तौर पर मुहर लग गई. इसके साथ ही, इस पद के लिए चल रहा 10 दिनों का सस्पेंस भी खत्म हो गया. 61 साल के सतीशन को एक जमीनी स्तर का नेता माना जाता है.
पिछले महीने हुए चुनावों में कांग्रेस की शानदार जीत में उनकी भूमिका काफी अहम रही थी. हालांकि, मुख्यमंत्री पद की इस दौड़ में उन्हें कमजोर दावेदार माना जा रहा था, जबकि लोकसभा सांसद और कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल को इस पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था. लेकिन IUML के समर्थन के कारण कांग्रेस को सतीशन को चुनना पड़ा. एक वजह यह भी थी कि अगर वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया जाता तो उन्हें 6 महीने के अंदर उपचुनाव लड़कर जीतना पड़ता.
यह भी पढ़ेंः वीडी सतीशन होंगे केरल के CM: क्या केसी वेणुगोपाल का नाम सिर्फ एक गुब्बारा था?
मुस्लिम लीग की भूमिका क्या रही?
IUML शायद सतीशन की सबसे बड़ी समर्थक थी. IUML के पास 22 सीटें हैं, जो कांग्रेस की 63 सीटों के बाद दूसरे नंबर पर हैं.
अगर IUML अपना समर्थन वापल भी ले लेती तो भी कांग्रेस के पास बहुमत होता. उदाहरण के लिए, अगर वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर IUML गठबंधन से बाहर हो जाए, तब भी वह 71 सीटों के बहुमत के आंकड़े से ऊपर बनी रहेगी.
लेकिन इसका मतलब यह होता कि राष्ट्रीय पार्टी मुस्लिम लीग से मिलने वाला जमीनी स्तर का अहम समर्थन खो देती. मुस्लिम लीग का असर वायनाड जैसी अहम सीटों पर माना जाता है. जहां 45 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं और जो प्रियंका गांधी वाड्रा की लोकसभा सीट भी है.

राज्य की कई विधानसभा और लोकसभा सीटों पर कांग्रेस के लिए IUML का समर्थन भी बहुत अहम है, जिसका मतलब है कि सतीशन के पास एक बहुत ही मजबूत तुरुप का पत्ता था.
क्या सतीशन को सिर्फ IUML के कहने पर ही मुख्यमंत्री बनाया गया था? ऐसा होना मुश्किल है. अगर वेणुगोपाल को चुना जाता, तो पार्टी को और चुनावों के लिए तैयार रहना पड़ता. इस बात पर संदेह भी एक वजह रही होगी. लेकिन, आखिरी फैसले में मुस्लिम लीग का समर्थन लगभग निश्चित रूप से एक अहम वजह थी.
फिर भी, किसी पार्टी का अपने सहयोगी के दबाव को मानना कोई हैरानी की बात नहीं है, न ही यह कोई अजीब बात है.
यह भी पढ़ेंः केरलम की कुर्सी से क्यों खाली हाथ रहे केसी, राहुल के फैसले की इनसाइड स्टोरी
IUML की मंजूरी
घोषणा के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, IUML के प्रदेश अध्यक्ष सैय्यद सादिक अली शिहाब थंगल ने सतीशन को बधाई दी और कहा कि उनकी पार्टी 'कांग्रेस के फैसले का पूरी तरह समर्थन करती है.' उन्होंने कहा, 'यह फैसला आ गया है, और केरल की जनता के साथ-साथ हम भी इसका समर्थन करते हैं. सतीशन सुशासन दे पाएंगे.' उन्होंने यह भी माना कि कांग्रेस ने IUML से सलाह ली थी।
लेकिन इस चुनाव ने BJP को अपने विरोधी पर यह ताना कसने का मौका दे दिया है कि 'कांग्रेस ही मुस्लिम लीग है.'
यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस को 'मुस्लिम लीग' वाला ताना सुनना पड़ा हो. पिछले हफ्ते ही AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने कहा था कि कांग्रेस अब 'मुस्लिम लीग पार्टी' बन गई है. यह तीखी टिप्पणी तब आई जब कांग्रेस के पवन खेड़ा ने BJP की इस आलोचना का जवाब दिया कि उनके 19 में से 18 विधायक अल्पसंख्यक समुदाय से हैं.

अजमल ने आरोप लगाते हुए कहा, 'आप दोनों समुदायों को प्रतिनिधित्व सुनिश्चित क्यों नहीं कर पाए? आप असमिया इलाकों से कुछ सीटें भी क्यों नहीं जीत पाए? इससे पता चलता है कि आपकी पार्टी का पतन हो गया है और वह 'मुस्लिम लीग' जैसी पार्टी बन गई है.'
हालांकि, इससे पहले भी कांग्रेस को इस तरह का ताना सुनना पड़ा है. पिछले साल नवंबर में, जब बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने बिहार में जबरदस्त जीत हासिल की थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यही ताना मारा था. उन्होंने कहा था, 'कांग्रेस MMC है - मुस्लिम लीग माओवादी कांग्रेस.'
यह भी पढ़ेंः 'सीएम नहीं, तो मिनिस्टर भी नहीं' काम कर गई ये शर्त, मुस्लिम लीग का भी दबाव...और मुख्यमंत्री चुन लिए गए सतीशन
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं