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पंजाब कांग्रेस का झगड़ा सुलझाने बनाए गए सरपंच, मीनाक्षी नटराजन भी कमेटी में शामिल

साल 2021 में अजय माकन की रिपोर्ट के बाद ही कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम पद से हटा कर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया था.

पंजाब कांग्रेस का झगड़ा सुलझाने बनाए गए सरपंच, मीनाक्षी नटराजन भी कमेटी में शामिल
पंजाब में कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या ये है कि कम से कम आधा दर्जन नेता अपने आप को मुख्यमंत्री के रेस में देखते हैं.

कांग्रेस ने पंजाब में अब विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी करना शुरू कर दिया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पंजाब को लेकर तीन नेताओं की एक समिति बनाई है जिसमें अजय माकन,मीनाक्षी नटराजन और भजनलाल जाटव को शामिल किया गया है. इन नेताओं से कहा गया है कि पंजाब में कांग्रेस की क्या हालत है वहां पर पार्टी को क्या करना चाहिए इस पर वहां के नेताओं से बातचीत करके एक रिपोर्ट बना कर दें जिसमें सुझाव भी होने चाहिए.

सबसे मजेदार बात है कि अजय माकन को सितंबर 2021 में भी पंजाब का पर्यवेक्षक बना कर भेजा गया था और माना जाता है कि उन्हीं के रिपोर्ट के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटा करके चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया था. हालांकि कांग्रेस का यह प्रयोग विफल रहा था और पंजाब में कांग्रेस के हाथ से सत्ता चली गयी थी. अभी हाल में ही पंजाब में जो स्थानीय निकाय के चुनाव हुए हैं उसमें कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही है.

पंजाब को लेकर राहुल गांधी दिल्ली में एक बैठक कर चुके हैं और सभी नेताओं को एकजुट रहने के लिए कहा है क्योंकि बैठक के दौरान ही इन नेताओं के मतभेद सबके सामने खुल कर सामने आ गए थे. तब ये कहा गया था कि पंजाब में कांग्रेस को अपना घर दुरुस्त करने की जरूरत है और पार्टी संगठन में बदलाव करने पड़ेंगे.

पंजाब में क्या है कांग्रेस की समस्या?

पंजाब में कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या ये है कि कम से कम आधा दर्जन नेता अपने आप को मुख्यमंत्री के रेस में देखते हैं और इसके लिए एक दूसरे के खिलाफ ही साजिश रचने में व्यस्त रहते हैं. कांग्रेस आलाकमान ने अब यह साफ कर दिया है कि किसी एक चेहरे पर चुनाव नहीं लड़ा जाएगा और पार्टी सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव लड़ेगी. पंजाब में मुख्यमंत्री का चेहरा तो कोई सिख ही बनेगा मगर कौन ये बड़ा सवाल है जिसका उत्तर कांग्रेस पार्टी ढूंढ रही है. 

दलित सिख के साथ पिछली बार कांग्रेस चुनाव में उतरी थी तब कांग्रेस को पंजाब के दलितों का सबसे ज्यादा वोट मिला था मगर बाकी समुदायों का वोट नहीं मिला. इसलिए कांग्रेस को इस बार पंजाब में समुदायों के बीच संतुलन बनाना पड़ेगा. यही वजह है कि हिंदू समुदाय से आने वाले विजय इंदर सिंगला को संगठन में बड़ा स्थान देने की बात हो रही है. इनके कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की चर्चा है.

बीजेपी सिख वोट में सेंध लगाने की तैयारी में 

पंजाब में हमेशा सिख और हिंदू समुदाय के बीच ही राजनीति चलती है.  यहां 57 फीसदी सिख हैं और 38 फीसदी हिंदू. बीजेपी को शहरी हिन्दू वोटों का सहारा है मगर सिख वोटों में सेंध लगाने के लिए बीजेपी ने इस पर सुनील जाखड़ को हटा कर सरदार केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. कांग्रेस आलाकमान को लगता है कि पंजाब में कांग्रेस की जड़ें हैं और यहां विधानसभा में अच्छा प्रदर्शन किया जा सकता है.

2024 के लोकसभा में पंजाब की 13 सीटों में से 7 कांग्रेस के पास है और आम आदमी पार्टी के पास 3,जब कि वो वहां पर सत्ता में हैं. कांग्रेस को दलित,सिख और हिंदुओं के बीच पैठ बनानी होगी उसके लिए कांग्रेस के नेताओं में एकता जरूरी है. यही वजह है कि सबकी निगाहें अजय माकन समिति पर है कि वो क्या फार्मूला कांग्रेस आलाकमान के सामने रखते हैं और क्या पार्टी नेतृत्व पूरे पंजाब कांग्रेस में फेरबदल का साहस दिखा पाता है?

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