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झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए संकट, निर्दलीय उम्मीदवार आया तो ब‍िगड़ जाएगा खेल

Jharkhand Rajya Sabha elections: झारखंंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है. बीजेपी, कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. 

झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए संकट, निर्दलीय उम्मीदवार आया तो ब‍िगड़ जाएगा खेल
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और हरियाणा के कांग्रेस नेता अजय शर्मा ने हेमंत सोरेन से मीटिंग करने के बाद दोनों सीटों पर जीत का दावा किया है. (Photo- NDTV)

Jharkhand Rajya Sabha elections: झारखंड में राज्यसभा चुनाव के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने एक उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी है. झामुमो के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि विधानसभा में जितने हमारे विधायक हैं, उसके अनुसार हम एक ही उम्मीदवार दे सकते हैं, इसलिए अनुसूचित जाति के बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाया जाता है.

झामुमो के पास 34 विधायक 

झामुमो के झारखंड विधानसभा में 34 विधायक हैं, और एक सीट जीतने के लिए 28 विधायक चाहिए. अब झारखंड की बची एक सीट के लिए कांग्रेस ने प्रणव झा के नाम की घोषणा पहले ही कर चुकी है. इसके बाद झामुमो के सूत्रों से यह खबर आई कि हेमंत सोरेन नाराज हैं, क्योंकि कांग्रेस ने नाम घोषित करने में जल्दबाजी कर दी है. हालांकि, कांग्रेस की तरफ से हमें बताया गया कि प्रणव झा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सचिव हैं, इसलिए वो खुद इस मामले को देख रहे हैं.

हेमंत सोरेन से एक घंटे तक मीटिंग 

खरगे जी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और हरियाणा के कांग्रेस नेता अजय शर्मा को पर्यवेक्षक बनाकर रांची रवाना किया. इन दोनों नेताओं ने रांची में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की. दोनों नेताओं ने हेमंत सोरेन से एक घंटे बातचीत की और उसके बाद कहा कि महागठबंधन में सब ठीक है हम लोग दोनों सीट जीतेंगे. मगर कहानी इतनी आसान नहीं है. 

बीजेपी के गौरव वल्लभ ने खरीदा पर्चा 

झारखंड से राज्यसभा का चुनाव लड़ने के लिए बैजनाथ राम और प्रणव झा के अलावा परिमल नथवानी, बीजेपी के गौरव वल्लभ और वाईएसआर कांग्रेस के विजय साईं रेड्डी ने भी नामांकन का पर्चा खरीदा है. विजय साईं रेड्डी 2016 से 2025 तक वाईएसआर कांग्रेस की तरफ से राज्यसभा का सदस्य रह चुके हैं, और वाईएसआर कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं. मगर इन सभी नेताओं में से परिमल नथवानी सबसे गंभीर उम्मीदवार हैं.

परिमल नथवानी एक बड़े औद्योगिक घराने से संबंध रखते हैं, और अभी आंध्र प्रदेश से राज्यसभा के सांसद है, वो 2020 में वाईएसआर कांग्रेस में भी शामिल हुए, और राज्यसभा में आए, लेकिन इसके पहले नथवानी 2008 से 2020 तक झारखंड से ही निर्दलीय चुन कर राज्यसभा में आ चुके हैं.

परिमल कांग्रेस का बिगाड़ सकते हैं खेल 

अब इस बार परिमल नथवानी ने राज्यसभा के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा भरा तो वो कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकते हैं. झारखंड में एनडीए के पास 24 विधायक हैं, और एक जयराम महतो हैं, जो किसी गुट में नहीं हैं. जीत के लिए 28 विधायकों की संख्या जुटाने के लिए परिमल नथवानी को तीन और अतिरिक्त वोट चाहिए, और जाहिर है वो महागठबंधन से ही आएंगे.

क्रॉस वोटिंंग भी होने की उम्मीद  

झामुमो को अपना उम्मीदवार जितवाने के बाद 6 अतिरिक्त वोट हैं, जबकि आरजेडी के पास 4, माले के पास 2 वोट और कांग्रेस के पास 16 वोट हैं. झारखंड कांग्रेस के एक नेता ने ऑफ द रिकॉर्ड हमें बताया, "यदि परिमल नथवानी चुनाव लड़ते हैं तो वो हारने के लिए नहीं जीतने के लिए लड़ेंगे.” इसका मतलब है कि झारखंड में राज्यसभा चुनाव के लिए अब वोटिंग भी होगी और क्रॉस वोटिंग भी होनी तय है. 

कांग्रेस मुश्किल में फंस सकती है, मगर इस सबके पहले यह देखना होगा कि परिमल नथवानी सोमवार को राज्यसभा के लिए पर्चा भरते हैं या नहीं. यदि वो पर्चा भरते हैं तो झारखंड का यह राज्यसभा चुनाव राज्य में आने वाले दिनों में राजनीतिक उठापटक की ओर ले जाएगा, जहां देखना होगा कि झामुमो और कांग्रेस के रिश्ते कैसे रहते हैं.

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