सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को संविधान की 10वीं अनुसूची की व्याख्या को चुनौती देने वाली कपिल सिब्बल की याचिका पर सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट मामले का परीक्षण करने को तैयार हो गई है. केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है.
जस्टिस पीएस नरसिम्हा बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, ''ये ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें आम तौर पर सदन में उठाया जाना चाहिए. 10वीं अनुसूची का मकसद विधायकों के बीच के कामकाज के तरीके को रेगुलेट करना है, हमने 10वीं अनुसूची को सही ठहराया है. हम इसे देखते रहे हैं. 10वीं अनुसूची के साथ बहुत सारी दिक्कतें हैं, लेकिन इसे किसने बनाया? इसे सांसदों ने ही बनाया है.''
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर कपिल सिब्बल ने जवाब देते हुए कहा, ''जैसे कोर्ट से गलती हो सकती है, वैसे ही सांसदों से भी गलती हो सकती है. वे इसे कभी हल नहीं होने देंगे, क्योंकि इसमें सत्ता में बैठे लोगों का फ़ायदा है.''
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से एक याचिका दायर कर संसद की संरचना में हो रहे बदलाव और संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) की व्याख्या से जुड़े सवाल उठाए हैं. सिब्बल का तर्क है कि मौजूदा व्याख्या अलग हुए गुटों को दूसरे राजनीतिक दलों के साथ विलय करके दल-बदल विरोधी कानून की सख्ती से बचने की इजाजत देती है.
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