सोचिए... जिस कुर्सी पर बैठकर लाखों युवाओं के सपनों और भविष्य का फैसला होना था, अगर उसी कुर्सी पर बैठा व्यक्ति कथित अनियमितताओं की फाइलों पर पर्दा डालने लगे, तो उसे क्या कहा जाए? महज लापरवाही, या युवाओं के भरोसे के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात? झारखंड में JPSC को लेकर उठे आरोप अब केवल कथित पेपर लीक तक सीमित नहीं रह गए हैं. यह मामला उन लाखों अभ्यर्थियों के सपनों, वर्षों की मेहनत और व्यवस्था पर उनके भरोसे से जुड़ा सवाल बन चुका है. अगर भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े हो जाएं, तो यह सिर्फ एक परीक्षा का विवाद नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख पर गंभीर चुनौती है.
JPSC की प्रीलिम्स परीक्षा पर उठे सवाल
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक (PT) परीक्षा अब राज्य के सबसे चर्चित भर्ती विवादों में शामिल हो गई है. परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थियों ने बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगाए. OMR शीट में कथित गड़बड़ी, परीक्षा संचालन में पारदर्शिता पर सवाल, परीक्षा एजेंसी की भूमिका और JPSC अधिकारियों की कथित मिलीभगत जैसे आरोपों ने मामले को तूल दिया.
ऐसे शुरू हुआ पूरा विवाद
14वीं JPSC PT परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए. अभ्यर्थियों का आरोप था कि OMR मूल्यांकन और परीक्षा संचालन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. छात्र संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए प्रदर्शन किया और सरकार पर दबाव बढ़ता गया.
CID को सौंपी गई जांच
लगातार बढ़ते विवाद और शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंप दी. जांच शुरू होते ही CID ने परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया की जांच शुरू की. जांच के दौरान CID और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने JPSC मुख्यालय के अलावा परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी TDPL के कार्यालयों में छापेमारी की. इस दौरान कंप्यूटर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, सर्वर, मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए. इन डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि परीक्षा प्रक्रिया या परिणाम में किस तरह की तकनीकी छेड़छाड़ हुई है.
जांच का दायरा लगातार बढ़ा
जांच आगे बढ़ने के साथ CID की टीम ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के आवास तक पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की. इसके अलावा कई अधिकारियों और कर्मचारियों से घंटों पूछताछ की गई. जांच एजेंसी अब परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े हर स्तर की पड़ताल कर रही है.
अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी
CID इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. गिरफ्तार लोगों में JPSC के अधिकारी-कर्मचारी, परीक्षा संचालन एजेंसी TDPL के अधिकारी और अन्य सहयोगी शामिल हैं.
- TDPL के निदेशक रामवीर सिंह
- मुख्य आरोपी अभय कुमार तिवारी
- JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता
- JPSC कर्मचारी मोहम्मद उस्मान
- सोनू कुमार
- हेमंत वर्मा
- प्रदीप कुमार सिंह
- संजय कुमार
- अभय तिवारी का सहयोगी अरविंद कुमार
- मोहम्मद एबाद
इन पहलुओं की हो रही जांच
इन सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है. उनसे जब्त डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूछताछ की जा रही है. CID फिलहाल कई अहम पहलुओं की जांच कर रही है. इनमें OMR शीट में कथित हेरफेर, परीक्षा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया, डिजिटल डेटा में संभावित छेड़छाड़, परीक्षा संचालन एजेंसी की भूमिका, JPSC अधिकारियों और एजेंसी के बीच कथित मिलीभगत तथा वित्तीय लेन-देन की जांच प्रमुख है. जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका तो नहीं थी.
विपक्ष ने सरकार को घेरा
मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है. बीजेपी और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है. उनका कहना है कि यह भर्ती घोटाला बेहद गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच केवल केंद्रीय एजेंसी ही कर सकती है. बीजेपी का आरोप है कि CID जांच के जरिए बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है. वहीं कांग्रेस और सत्तापक्ष का कहना है कि सरकार दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शेगी और जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है.
अब किस चीज का इंतजार?
CID की जांच अभी जारी है. जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. जांच एजेंसी का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों से कई और अहम खुलासे हो सकते हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां या नए नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. फिलहाल, JPSC की 14वीं PT परीक्षा का यह विवाद झारखंड की सबसे बड़ी भर्ती जांचों में बदल चुका है. हजारों अभ्यर्थियों की नजर अब जांच के अंतिम नतीजे और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है.
ये भी पढ़ें - कोडिंग ही नहीं! IITs में जर्मन और फ्रेंच जैसी भाषाएं सीखने का भी मौका, खूब बढ़ रही डिमांड
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं