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कॉकरोज जनता पार्टी से चर्चा में तिलचट्टे, डायनासोर से भी पुराना है इतिहास, 35 करोड़ साल से कर रहे 'राज', कहानी जान लीजिए

Real Story of Cockroaches Viral Because of Cockroach Janta Party: कॉकरोज नाम पिछले कुछ दिनों में खूब चर्चा में है, इसका पहला कारण है मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की कथित टिप्पणी और फिर बनी कॉकरोज जनता पार्टी. यहां जानिए कॉकरोज की 35 करोड़ साल डायनासोर से भी पुरानी कहानी. गंदगी में पाए जाने वाले तिलचट्टे में कई खूबियां हैं जो इसे सबसे अलग बनाती हैं. ये जहाज में सफर कर भारत आए और फिर लगभग हर घर तक पहुंच गए.

कॉकरोज जनता पार्टी से चर्चा में तिलचट्टे, डायनासोर से भी पुराना है इतिहास, 35 करोड़ साल से कर रहे 'राज', कहानी जान लीजिए
Real Story of Cockroaches: Ancient Survivors Now Viral Because of Cockroach Janta Party.

Cockroach Janta Party Put Cockroaches in Spotlight: कॉकरोज... ये अब सिर्फ नाली और गंदगी में पाए जाने वाले एक कीड़े भर का नाम नहीं रह गया है. अब 'कॉकरोज' की एंट्री सियासत में भी हो गई है, यानी 'कॉकरोज जनता पार्टी', जो मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की एक कथित टिप्पणी के बाद बनी है. लेकिन, हम यहां इस 'कॉकरोज' ही नहीं, असली वाले कॉकरोज की बात करेंगे, जिनका इतिहास डायनासोर से भी पुराना है. कॉकरोज करीब 30-35 करोड़ साल पहले से धरती पर मौजूद हैं. 

इसकी गवाही यूरोप और उत्तरी अमेरिका में मिले जीवाश्म देते हैं. करीब 6.6 करोड़ साल पहले जब धरती पर उल्कापिंड गिरे तो डायनासोर खत्म हो गए, लेकिन कॉकरोज बच गए. वैज्ञानिका का मानना है कि कॉकरोज में जीवित रहने की क्षमता बहुत अधिक होती है, क्योंकि यह बहुत छोटे होते और कहीं भी छिप जाते हैं, ये बिना भोजन के लंबे समय तक जिंदा रह सकते हैं और जररूत पर कुछ भी खा सकते हैं. इनके प्रजनन की क्षमता भी अधिक होती है. 

अगर, भारत में कॉकरोज के वजूद की बात करें तो साल साल 2024 में राजस्थान के बीकानेर जिले की कोयला खदान में इसके जीवाश्म मिले थे. वैज्ञानिकों के अनुसार, ये करीब 5.3 करोड़ साल पुराने थे. तब यहां रेगिस्तान नहीं, बल्कि पानी और दलदली जमीन थी. 
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कैसे पड़ा कॉकरोज नाम, जिसे हिंदी में कहते हैं तिलचट्टा?

आज हम जिसे कॉकरोज के नाम से जानते हैं, उसकी शुरुआत स्पेनिश शब्द 'कुकराचा' (Cucaracha) से हुई थी. 16वीं सदी में जब अंग्रेजी नाविकों और व्यापारियों से इस जीव का सामना हुआ तो उन्होंने इसे कॉकरोच (Cockroach) बना दिया. भारत में इसे 'तिलचट्टा' कहा जाता है, इसके पीछे का तर्क है कि ये पुराने समय में जब लोग रात में घरों में तेल और घी के दिए जलाते थे तो ये उसे चाटने के लिए आते थे. इसकी कारण इसका यह नाम पड़ गया.    

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भारत कैसे पहुंचे विदेशी कॉकरोज?

आज के दौर में घरों में पाए जाने वाले कॉकरोज को भारतीय के नहीं हैं. ये अमेरिकी कॉकरोच (Periplaneta americana) और  ​जर्मन कॉकरोच (Blattella germanica- छोटे आकार का कॉकरोच) हैं जो मूल रूप से उष्णकटिबंधीय अफ्रीका (Tropical Africa) की प्रजाति थी. 16वीं-17वीं शताब्दी के बीच ब्रिटिश और पुर्तगाली का भारत के साथ व्यापार शुरू हुआ तब ये कॉकरोच जहाजों से आने वाले सामन के जरिए देश के अलग-अलग तटीय शहरों तक पहुंचे. इसके बाद ये पूरे देश में फैल गए. 

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देश-दुनिया में कॉकरोज की कितनी प्रजातियां?

दुनिया भर में कॉकरोज की 4,600 से अधिक प्रजातियां हैं. इनमें से सिर्फ 30 प्रजातियां ऐसी हैं जो हमारे घरों और उनके आसपास रहती हैं. बाकी बची करीब 4570 प्रजातियां जंगलों और गुफाओं में पाई् जाती हैं. ZSI (​Zoological Survey of India) के अनुसार, देश (भारत) में कॉकरोच की करीब 181 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनका कनेक्शन 72 अलग-अलग वंश (Genera) से हैं. इनमें से करीब 89 प्रजातियां दुनिया में कहीं और नहीं सिर्फ भारत में ही पाई जाती हैं, जो जंगलों और पहाड़ों में ही पैदा हुई हैं. इसका सबसे बड़ा डोमिनो कॉकरोच है जो दक्षिण भारत के जंगल (जैसे तमिलनाडु की येलागिरी पहाड़ियों और पश्चिमी घाट) में पाया जाता है. इसे देश का सबसे प्राचीन कॉकरोज माना जाता है. यह काले रंग का होता है और इसके शरीर पर सात सफेद डॉट्स होते हैं.  

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देश में कहां मिले 5.3 करोड़ साल पुराने कॉकरोज के जीवाश्म? 

साल 2024 में राजस्थान के बीकानेर में स्थित एक कोयला खदान में 'गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय' और फ्रांस के वैज्ञानिकों ने जमीन से करीब 60-100 मीटर की गहराई (196 फीट से 328.08 फीट ) में कॉकरोच के जीवाश्म (Fossils) खोजे, जो जांच में लगभग 5.3 करोड़ साल पुराने पाए गए. उस समय यह इलाका दलदली जमीन, पानी और वनस्पति वाला माहौल था. 

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वर्ल्ड में पाए जाने वाले सबसे बड़े और छोटे कॉकरोज?

Guinness World Records के अनुसार, मेगालोब्लाटा लोंगिपेनिस (Megaloblatta longipennis) दुनिया का सबसे बड़ा पंखों वाला कॉकरोज माना जाता है. इसकी लंबाई करीब 9.7 सेंटीमीटर (3.8 इंच) होती है, पंख फैलाने पर यह करीब  करीब 20 सेंटीमीटर यानी 8 इंच का हो जाता है. यह मुख्य रूप से अमेरिकी महाद्वीपों में स्थित तीन प्रमुख देश पेरू, इक्वाडोर और पनामा में पाया जाता है. वजन के हिसाब से बिना पंख वाला Giant burrowing cockroach सबसे बड़ा होता है. 8 इंच के इस कॉकरोज का वजन 30–35 ग्राम तक होता है. सबसे छोटा कॉकरोज अट्टाफिला फंगीकोला (Attaphila fungicola) है. यह उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्से और मैक्सिको एक दो अन्य जगह पाया जाता है. भारत में सबसे बड़े कॉकरोज में अमेरिकन कॉकरोज है, जिसकी लंबाई 4–5 सेंटीमीटर तक होती है, यह उड़ भी सकता है और इंसानी आबादी वाले क्षेत्रों और घरों में पाया जाता है. जर्मन कॉकरोज देश में सबसे छोटा कोकरोज है जिसकी लंबाई 1.1 से 1.6 सेंटीमीटर तक होती है. यह देश के लगभग हर राज्य में पाया जाता है. 

Older Than Dinosaurs! The Untold Story of Cockroaches Trending After Cockroach Janta Party.

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घरों में दिखने वाले कॉकरोज कौन से हैं?

भारतीय मूल के अधिकतर कॉकरोज जंगल में पाए जाते हैं, अधिकांश लोग उन्हें कभी देख नहीं पाते. घरों में जो कॉकरोज दिखाई देते हैं उनके अमेरिकन, जर्मन और ओरिएंटल कॉकरोज शामिल हैं. ये सभी अफ्रीका,दक्षिण एशिया और मध्य एशिया से ताल्लुक रखते हैं. 

कॉकरोज की वो खूबियां जो इसे बनाती हैं खास? 

  • कॉकरोज मुंह से नहीं शरीर के छोटे छिद्रों से सांस लेता है, इस कारण यह सिर कटने के बाद भी 6-7 दिन से अधिक जिंदा रह सकता है. इसकी मौत पानी न मिलने के कारण होती है. 
  • ये सर्वाहारी होते हैं, भूख लगने पर बचा खाना ही नहीं, कागज, कपड़ा, मृत जीव और गंदगी समेत लगभग ज्यादार चीजें खा लेता है. 
  • ये करीब 1 से 2 साल तक जिंदा रहते हैं, मादा कॉकरोज अपने जीवन काल में सैकड़ों बच्चे पैदा करती है. 
  • बिना भोजन के महीने भर जिंदा रह सकते हैं और बिना पानी के करीब दो हफ्ते तक. 
  • रेडिएशन झेलने की क्षमता इंसानों की तुलना में 10-15 गुना अधिक होती है. 
  • इनके पैर पर छोटे सेंसर होते हैं, कंपन बहुत जल्दी महसूस कर लेते हैं, कुछ प्रजातियां उड़ भी सकती हैं. 

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