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कॉकरोच जनता पार्टी बनाने वाले अभिजीत कौन हैं? अमेरिका की इस यूनिवर्सिटी से की है पढ़ाई

Cockroach Janata Party : कॉकरोच जनता पार्टी बनाने वाले अभिजीत एक प्रोफेशनल पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजिस्ट हैं, जो आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम के साथ भी काम कर चुके हैं.

कॉकरोच जनता पार्टी बनाने वाले अभिजीत कौन हैं? अमेरिका की इस यूनिवर्सिटी से की है पढ़ाई
Abhijeet Deepke कौन हैं

Cockroach Janata Party : कुछ दिन पहले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के बयान ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया था. उन्होंने कुछ युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच' से की थी. इसके इसके बाद सोशल मीडिया पर मीम्स और ट्रोलिंग की भरमार हो गई. इसी चर्चा के बीच ‘कॉकरोच जनता पार्टी' नाम का सोशल मीडिया हैंडल ट्रेंड करने लगा है. लॉन्च होने के 24 घंटे के अंदर ही 10 हजार फॉलोअर्स जुटाने वाला यह हैंडल अब इंस्टाग्राम पर 35 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स के साथ सुर्खियां बटोर रहा है. 

‘कॉकरोच जनता पार्टी' क्या है?

सोशल मीडिया पर एक्टिव इस हैंडल को खुद को युवाओं का राजनीतिक मोर्चा बताते हुए पेश किया गया है. इसका मकसद राजनीतिक व्यंग्य के जरिए लोगों का ध्यान खींचना और युवाओं के मुद्दों पर हल्का-फुल्का मजाक करना है. हैंडल ने सदस्य बनने की कुछ मजेदार शर्तें भी रखी गई हैं. जैसे - इसका सदस्य बनने के लिए बेरोजगार और आलसी होना जरूरी है. इसके अलावा सदस्य को रोजाना कम से कम 11 घंटे ऑनलाइन रहना होगा. 

इसे बनाने वाले अभिजीत कौन हैं?

अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के रहने वाले हैं. वह एक प्रोफेशनल पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजिस्ट हैं. उन्होंने पुणे से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन की और इसके बाद हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका का रुख किया. अभिजीत ने अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (PR) में मास्टर ऑफ साइंस (MS) की डिग्री हासिल की है. 

2020 से 2022 के बीच वे आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम के साथ भी काम कर चुके हैं. दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान AAP के पक्ष में सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ में उनका योगदान अहम माना जाता है. इसके अलावा अभिजीत दिल्ली के शिक्षा विभाग में कम्युनिकेशंस एडवाइजर के तौर पर भी काम कर चुके हैं.

CJI सूर्यकांत ने क्या कहा 

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच' से की थी. हालांकि, बाद में कोर्ट की तरफ से सफाई दी गई कि यह टिप्पणी आम बेरोजगार युवाओं के लिए नहीं, बल्कि फर्जी डिग्री रखने वालों के लिए थी. लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर विवाद और आक्रोश भड़क चुका था.

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