दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रंका के खिलाफ दर्ज एक और मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने यह रिपोर्ट सूत्रों के हवाले से छापी है. दूसरी तरफ दोनों मंगलवार की रात ही दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे और अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के खिलाफ रात में ही सुनवाई की अपील की. संभावना है कि आज यानी बुधवार, 21 अक्टूबर को उनकी याचिका पर सुनवाई हो सकती है.
इसका मतलब यह हुआ कि अब क्राइम ब्रांच इन दोनों CJP नेताओं के खिलाफ दर्ज दो मामलों की जांच करेगी. सौरव दास और आशुतोष रंका से जुड़ा एक और मामला, जिसमें उन पर जंतर-मंतर इलाके में अवैध रूप से घुसने का आरोप है, सोमवार को ही क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया था.
हाईकोर्ट पहुंचे सौरव और आशुतोष
सौरव दास और आशुतोष रांका ने मंगलवार को ही दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया और अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के खिलाफ तत्काल सुनवाई की मांग की. दोनों ने हाई कोर्ट में रात के समय सुनवाई की अपील की थी, जबकि हाई कोर्ट दशहरा की छुट्टियों के कारण इस हफ्ते बंद है. संभावना है कि हाई कोर्ट बुधवार को इस याचिका पर सुनवाई करेगा.
अपनी याचिका में, सौरव दास और आशुतोष रंका ने विशेष मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत उन्हें दो दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. उन्होंने कहा कि यह आदेश कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके 'स्वतंत्रता के अधिकार' के खिलाफ है. याचिका में तर्क दिया गया है कि यह आदेश गैर-कानूनी और मनमाना है, जिसे रद्द किया जाना चाहिए. इसमें कहा गया है कि कई बार जरूरी जमानतदार पेश करने के बावजूद, दोनों छह दिनों से हिरासत में हैं.
याचिका में आगे कहा गया, "हालांकि, यह आधार गलत है, क्योंकि 19.10.2026 को याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश किए गए जमानतदार पूरी तरह से कानून के अनुरूप थे."
याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि सार्वजनिक व्यवस्था के हित में किसी की स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए, उस व्यक्ति के कार्यों और सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी के बीच एक "सीधा और वास्तविक संबंध" होना चाहिए, न कि केवल कोई दूर की संभावना. इसमें यह भी दलील दी गई है कि किसी 'डीनोटिफाइड' जगह पर विरोध-प्रदर्शन का मामला, ज्यादा से ज्यादा, केवल नियमों के पालन या विनियमन से जुड़ा हो सकता है; इसे सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा नहीं माना जा सकता.
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रंका, अजिंक्य शिंदे और कॉकरोच जनता पार्टी के 11 अन्य मेंबर निजी परिसरों से होते हुए जंतर-मंतर पहुंच गए थे. वहां उन्होंने तिरंगा लहराया था. लेकिन इससे पहले ही प्रशासन ने जंतर-मंतर को आधिकारिक तौर पर विरोध-प्रदर्शन के तौर पर डिनोटिफाइड कर दिया था यानी यहां अब विरोध प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं है. फिर वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव किया और उन्हें रोकने की कोशिश की. सभी 14 लोगों को हिरासत में ले लिया गया और उनके खिलाफ दो FIR दर्ज की गईं.
शांति भंग करने के आरोप में, एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 14 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. सोमवार को उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई. दूसरी तरफ अजिंक्य शिंदे को छह महीने तक शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार करने का पाबंद किया गया, और उन्हें एक निजी मुचलके तथा 5,000 रुपये की जमानत पर रिहा कर दिया गया.
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