इंडिया गठबंधन की दिल्ली में बुधवार को एक बड़ी बैठक हुई जिसमें देश भर से तमाम दलों के नेता शामिल हुए. बैठक के अंदर से जो तस्वीरें आई उसमें सब व्यवस्थित था, सबकी जगह निर्धारित थी. वो लोग वहीं बैठे. एक बड़े आयताकार की व्यस्था की गई थी और सब कुछ सामान्य ढंग से हो गया. और जब इंडिया गठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू हुई तब भी वहां पर सबके नाम की पर्ची लगी हुई थी.
हुआ यूं कि सोनिया गांधी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आ गई और किसी को अंदाजा नहीं था कि वो प्रेस कॉन्फ्रेंस में आएंगी. फिर क्या था प्रेस कॉन्फ्रेंस में भगदड़ वाली स्थिति हो गई. प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ नेता आगे की लाइन में तो होते हैं तो कुछ पीछे बैठते हैं.
ये एक ऐसी एक व्यवस्था है जो हर पार्टी में देखने को मिलती है ताकि सबका सम्मान बना रहे. जिनके कम सांसद हैं वो पीछे बैठते हैं और जो मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं उनको आगे की लाइन में जगह मिलती है.
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क्या है पूरा माजरा?
हुआ ये कि प्रेस कॉन्फ्रेंस वाले हॉल में कुर्सियां कुछ इस तरह लगी थीं कि पोडियम के बीच में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की कुर्सी लगी थी, उनके एक तरफ राहुल गांधी और फिर तेजस्वी यादव की.खरगे के दूसरे तरफ ममता बनर्जी और सीपीएम महासचिव एम ए बेबी की कुर्सी थी.
प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने से पहले कांग्रेस के कई नेता और तृणमूल कांग्रेस की तरफ से डेरेक ओ'ब्रायन भी सिटिंग व्यवस्था देख कर जा चुके थे. लेकिन जब प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने वाली थी तो उससे पहले ही सोनिया गांधी भी हॉल में आ गईं और उनके आने की भनक किसी को नहीं थी.
सोनिया गांधी हॉल में आईं तो उनके नाम की कोई पर्ची वहां थी ही नहीं. ममता बनर्जी और सुप्रिया सुले उनके नाम की पर्ची देखने लगीं कि सोनिया गांधी कहां बैठेंगी. सबने सोनिया गांधी को राहुल गांधी की सीट पर बैठने को कहा और इशारा करने लगीं मगर सोनिया गांधी उस कुर्सी पर ना बैठ कर तेजस्वी यादव की सीट पर बैठ गईं.

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फिर कहां बैठीं सोनिया गांधी?
इसी बीच में खरगे हॉल में आ गए और उन्होंने सोनिया गांधी को अपने बगल में बैठने का इशारा किया और सोनिया गांधी के बगल में ममता बनर्जी बैठीं जिसके बाद सुप्रिया सुले बैठीं और उनके बगल में समाजवादी पार्टी के सांसद हरेन्द्र मलिक बैठे.
जब राहुल गांधी आए तो वो खरगे के बगल में दूसरी तरफ बैठे, फिर उमर अब्दुल्ला उनके बगल में, फिर सीपीएम महासचिव एम ए बेबी, माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और उनके बगल में तेजस्वी यादव और कपिल सिब्बल बैठे.
हुआ ये कि आगे की पंक्ति में पी चिदंबरम के नाम की भी तख्ती लगी हुई थी मगर वो वहां थे नहीं इसलिए सोनिया गांधी के प्रेस कांफ्रेंस में आने के बाद सबके लिए जगह बन गई और किसी को पीछे नहीं बैठना पड़ा. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब ममता बनर्जी का बोलने का मौका आया तो उन्होंने बड़ी जोरदार आवाज में प्रेस को संबोधित किया और बीच बीच में सोनिया गांधी उनकी पीठ थपथपाती रहीं.
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