बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठ रहे हैं. आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों और विपक्ष के आरोपों के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा है कि चुनाव आयोग को जनता के मन में पैदा हुई शंकाओं को दूर करने के लिए अधिक मजबूती के साथ अपना पक्ष सामने रखना चाहिए. उनका मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का भरोसा सबसे महत्वपूर्ण होता है.
संवैधानिक संस्था का बचाव नहीं करना चाहता
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और हाजीपुर से सांसद चिराग पासवान ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सरकार का हिस्सा होने के बावजूद उनका उद्देश्य किसी संवैधानिक संस्था का बचाव करना नहीं है. उन्होंने कहा कि विपक्ष अक्सर अपने राजनीतिक हितों के अनुसार बयान देता है, इसलिए वे उन आरोपों को अधिक महत्व नहीं देते.
चिराग पासवान ने कहा, "मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि सरकार का हिस्सा होने के नाते मेरा उद्देश्य किसी संवैधानिक संस्था का बचाव करना नहीं है. विपक्ष हमेशा अपने राजनीतिक हित के अनुरूप ही रुख अपनाएगा, इसलिए उसके आरोपों को लेकर मैं बहुत चिंतित नहीं हूं."
जनता का भरोसा कमजोर होना चिंताजनक
हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि जनता का चुनावी प्रक्रिया से विश्वास उठने लगे तो यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं होगा. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को विपक्षी नेताओं के बयानों का जवाब देने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन जनता के बीच जो संदेह पैदा हुए हैं, उनका समाधान जरूर करना चाहिए.
उनके अनुसार, "अगर जनता का चुनावी व्यवस्था से भरोसा उठने लगे तो यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं होगा. इसलिए निर्वाचन आयोग को और अधिक मजबूती से अपना स्पष्टीकरण सामने रखना चाहिए." चिराग पासवान का यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनका रुख भाजपा से कुछ अलग नजर आया है. भाजपा जहां चुनाव आयोग का खुलकर बचाव कर रही है, वहीं पासवान ने सीधे तौर पर आयोग से जनता की शंकाओं का समाधान करने की बात कही है.
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