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This Article is From Aug 31, 2025

SCO समिट में चीन की रोबोट स्योखा का जलवा, भारत को लेकर क्या बोली? देखिए वीडियो

स्योखा को देखकर साफ़ लगता है कि चीन इस समिट के ज़रिए दुनिया को AI और रोबोटिक्स की ताकत को भी दिखाना चाहता है. यह रोबोट तीन भाषाओं अंग्रेज़ी, चीनी और रूसी में बातचीत कर सकता है.

  • चीन इस बार शंघाई सहयोग संगठन समिट की मेज़बानी कर रहा है और आयोजन के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं
  • चीन क्षेत्रीय कूटनीति में अपनी भूमिका मजबूत करने के साथ टेक्नोलॉजी में अपनी प्रगति भी दिखाना चाहता है
  • स्योखा नामक रोबोट तीन भाषाओं में बातचीत कर सकता है और समिट की जानकारी देने के लिए इसे लाया गया है
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तियानजिन:

चीन इस बार शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट की मेज़बानी कर रहा है और आयोजन को लेकर बेहतरीन तैयारियां की गई हैं. समिट के ज़रिए चीन न केवल क्षेत्रीय कूटनीति में अपनी भूमिका मज़बूत करना चाहता है, बल्कि यह दिखाना भी चाहता है कि टेक्नॉलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में वह कितना आगे बढ़ चुका है.  इसी सिलसिले में NDTV इंडिया की टीम पहुंची इंटरनेशनल मीडिया सेंटर, जहां से समिट की हर गतिविधि पर नज़र रखी जा रही है. यहां परंपरागत मीडिया सेटअप के बीच सबसे ज़्यादा ध्यान खींचा स्योखा नाम के रोबोट ने. 

स्योखा: टेक्नॉलॉजी का नया चेहरा

स्योखा को देखकर साफ़ लगता है कि चीन इस समिट के ज़रिए दुनिया को AI और रोबोटिक्स की ताकत दिखाना चाहता है. यह रोबोट तीन भाषाओं अंग्रेज़ी, चीनी और रूसी में बातचीत कर सकता है. NDTV इंडिया ने स्योखा से समिट से जुड़े सवाल पूछे, और उसने अपने प्रोग्राम्ड जवाबों के ज़रिए SCO समिट की रूपरेखा और कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी. 

लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि जैसे ही स्योखा से भारत-चीन संबंधों या नेताओं की द्विपक्षीय मुलाकातों पर व्यक्तिगत राय मांगी गई, रोबोट ने कोई जवाब नहीं दिया. यह वाकया इस ओर भी इशारा करता है कि चीन में प्रेस पर सख़्त सरकारी नियंत्रण है और यहां निजी मीडिया की भूमिका बेहद सीमित है. 

भारत-चीन रिश्तों पर नज़रें

इस बीच सबकी नज़रें अब टिकी हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की होने वाली मुलाकात पर. दोनों नेताओं के बीच यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक राजनीति और व्यापार में तेज़ी से बदलाव आ रहे हैं. सीमा पर तनाव कम होने के बाद उम्मीद है कि इस मुलाकात से भारत-चीन संबंधों को नई दिशा मिलेगी. 

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस समिट में सीमा प्रबंधन, व्यापारिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर अहम चर्चा हो सकती है. साथ ही यह देखना भी दिलचस्प होगा कि भारत और चीन वैश्विक मंच पर अपने रिश्तों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं. 

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