- पंजाब कांग्रेस में अंतर्कलह है और चन्नी गुट ने राजा वडिंग को हटाने तक बैठकों में शामिल न होने का निर्णय लिया
- प्रभारी भूपेश बघेल ने विवाद सुलझाने के लिए पंजाब में बैठकें बुलाई हैं और वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे
- सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने चन्नी से मुलाकात कर भावी रणनीति पर चर्चा की और एकता का संदेश दिया है
पंजाब कांग्रेस में मची अंतर्कलह समाप्त होती नहीं दिख रही है. इस बीच सांसद और पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी का कुनबा बढ़ता जा रहा है. सांसद और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने चन्नी से मुलाकात की है. सूत्रों के मुताबिक चन्नी गुट ने अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद से हटाए जाने तक पार्टी की बैठकों में शामिल नहीं होने का फैसला किया है. चन्नी गुट प्रभारी भूपेश बघेल का बहिष्कार कर सकता है जो विवाद के बाद पहली बार चंडीगढ़ पहुंचे हैं.
भूपेश बघेल से क्यों खफा है चन्नी गुट
चन्नी गुट भूपेश बघेल से इसलिये नाराज है क्योंकि बघेल शुरू से ही प्रदेश अध्यक्ष पद पर राजा वडिंग को बरकरार रखने के पक्षधर थे. कई दौर की बैठक के बाद पिछले हफ़्ते एक जुलाई को कांग्रेस ने पंजाब में राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष और प्रताप सिंह बाजवा को नेता विपक्ष के पद पर बनाए रखने का एलान किया था. इसके साथ ही तीन कार्यकारी अध्यक्ष और कई चुनाव समितियों का गठन किया गया जिसमें चन्नी को प्रचार अभियान समिति की कमान सौंपी गई. इस फ़ैसले से पंजाब कांग्रेस के ज्यादातर नेता नाराज़ हैं जिनकी अगुवाई चन्नी कर रहे हैं.
नई टीम के एलान और उसके बाद शुरू हुए विवाद के बाद प्रभारी भूपेश बघेल पहली बार चंडीगढ़ पहुंचे हैं. प्रभारी भूपेश बघेल कुछ दिन तक पंजाब में डेरा डाल कर इस विवाद को सुलझाने की कोशिश करेंगे. सूत्रों के मुताबिक उन्होंने पहले कार्यकारी अध्यक्षों और जिला अध्यक्षों की बैठक बुलाई है. बघेल अलग से कुछ वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात करेंगे.
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चन्नी-रंधावा में क्या बात हुई
लेकिन बघेल के दौरे से कुछ घंटे पहले ही चन्नी ने अपने इरादे जाहिर कर दिए. रंधावा ने चन्नी से मुलाकात की और भावी रणनीति पर चर्चा की. सोमवार सुबह कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और विधायक परगट सिंह समेत कुछ अन्य नेताओं ने चन्नी से मुलाक़ात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जारी की और लिखा “एकता में बल है”. ऐसा ही पोस्ट चन्नी की तरफ़ से भी किया गया. इसके ज़रिए चन्नी ने एक बार फिर अपनी ताक़त दिखाई है. इससे पहले तीन जुलाई को भी चन्नी के घर कांग्रेस नेताओं की बड़ी बैठक हुई थी. सूत्रों के मुताबिक चन्नी राहुल गांधी से मुलाकात करना चाहते और इसलिए उनके विदेश से वापस लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं.
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राजा वडिंग की रणनीति
दिलचस्प तरीके से राजा वडिंग और पंजाब कांग्रेस की तरफ से भी सोशल मीडिया पर चन्नी की रंधावा और अन्य नेताओं की मुलाकात वाली तस्वीर को साझा करते हुए लिखा गया “एकता में बल है”. राजा वडिंग ने इन बैठकों को लेकर चल रही अटकलों को खारिज करने की कोशिश भी की. कुल मिलाकर राजा वडिंग पूरे विवाद पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं. दरअसल इसके ज़रिए राजा पार्टी आलाकमान और तटस्थ नेताओं-कार्यकर्ताओं की सहानुभूति हासिल करना चाहते हैं.
राहुल गांधी के देश लौटने का इंतज़ार
लेकिन यह विवाद अब बिना राहुल गांधी के दखल के खत्म होने वाला नहीं है. चन्नी गुट राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं है. देखना होगा कि इस हफ़्ते के अंत तक भारत लौटने के बाद राहुल गांधी ख़ुद ही लिए गए अपने फैसले वापस लेंगे या कोई बीच का रास्ता निकालेंगे? पंजाब में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं. राज्य में मुख्य विपक्ष कांग्रेस ने भगवंत मान सरकार का मुक़ाबला करने के लिए टीम का एलान तो कर दिया लेकिन टीम की आपस में ही भिड़ंत हो रही है.
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