- पंजाब कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को बरकरार रखने का फैसला चन्नी गुट को मंजूर नहीं
- चरणजीत सिंह चन्नी ने प्रदेश अध्यक्ष पद की मांग को लेकर राहुल गांधी से पुनर्विचार की अपील करने की योजना बनाई है
- पंजाब कांग्रेस में नाराजगी के चलते मनीष तिवारी और सुखजिंदर रंधावा ने भी पार्टी की रणनीति पर सवाल उठाए हैं
पंजाब में कांग्रेस की मुसीबत बढ़ती जा रही है जहां विधानसभा चुनाव करीब आठ महीने दूर है. कांग्रेस नेतृत्व द्वारा पंजाब प्रदेश अध्यक्ष पद पर अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को बरकरार रखने के फैसले के ख़िलाफ़ पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने मोर्चा खोल दिया है. पंजाब चुनाव के बाद लिए बनी कांग्रेस की नई टीम के एलान के बाद वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी सवाल उठा चुके हैं, एक अन्य सांसद सुखजिंदर रंधावा ने भी अपनी नाखुशी जाहिर की है.
क्या फैसले पर पुनर्विचार करेंगे राहुल गांधी
जालंधर से सांसद चन्नी के पंजाब स्थित घर हुई बैठक में प्रदेश कांग्रेस के कई बड़े नेता पहुंचे. सूत्रों के मुताबिक चन्नी के घर हुई बैठक में तय किया गया कि राहुल गांधी के विदेश से लौटने के बाद उनसे मिलने का समय मांगा जाएगा और फिर पार्टी के फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया जाएगा. चन्नी का गुट चाहता है कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए या फिर सीएम का चेहरा घोषित किया जाए. चन्नी गुट पार्टी नेतृत्व को संदेश देना चाहता है कि राजा वडिंग के नेतृत्व में कांग्रेस को जीत नहीं मिल सकती. सूत्रों के मुताबिक बैठक में एक वरिष्ठ नेता ने यहाँ तक कह दिया कि राजा वडिंग के लिए राहुल गांधी धृतराष्ट्र (आंखों पर पट्टी बांध ली है) बन गए हैं!
बैठक के बाद चन्नी ने सोशल मीडिया पर अपने इरादे जाहिर करते हुए पोस्ट किया, “कांग्रेस के नेताओं ने मुलाक़ात कर पंजाब के लोगों की भावनाओं को आलाकमान तक पहुंचाने को कहा”. बैठक में आए नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए खुल कर राजा वडिंग को हटाने और चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की बात कही. लंबे मंथन के बाद दो दिन पहले ही कांग्रेस ने एलान किया कि राजा वडिंग पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बने रहेंगे. इसी के साथ सांसद चन्नी को कैंपेन कमिटी (प्रचार कमिटी) का प्रमुख बनाया गया. चन्नी प्रदेश अध्यक्ष बनना चाहते थे. कांग्रेस का आंतरिक सर्वे और अजय माकन कमिटी की रिपोर्ट भी उनके पक्ष में थी.
कांग्रेस के सर्वे से लेकर रिपोर्ट में आगे चन्नी की अहमियत क्यों है
नाराज़ चन्नी गुट अभी भी माँग कर रहा है कि पार्टी अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करते हुए चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए. चन्नी के पक्ष में सबसे बड़ा फ़ैक्टर है उनका दलित होना. पंजाब में दलितों की आबादी करीब 33% है. इसी वोट बैंक के मद्देनज़र कांग्रेस के कई जट सिख नेता चन्नी की पैरवी कर रहे हैं. सीएम के रूप में कुछ महीने के कार्यकाल में उनकी लोकप्रियता भी बढ़ी थी. यही वजह है कि चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की माँग को लेकर कुछ महीने पहले पंजाब कांग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी आलाकमान को चिट्ठी लिखी थी. इसके बाद से दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष खरगे और राहुल गांधी ने पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें की. अजय माकन को पंजाब की रिपोर्ट देने को कहा गया. माकन कमिटी ने पंजाब कांग्रेस के करीब सौ नेताओं के साथ बात की.
क्यों नहीं बदला पंजाब कांग्रेस का प्रधान
अंत में कांग्रेस नेतृत्व को महसूस हुआ कि बदलाव के लिए देर हो चुकी है और चुनाव से ठीक पहले प्रदेश अध्यक्ष पद पर बदलाव से संतुलन बिगड़ सकता है. आशंका थी कि जट सिख नेता (राजा बराड़) को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का नकारात्मक असर पड़ सकता है. लुधियाना से सांसद राजा वडिंग राहुल गांधी के भरोसेमंद नेता माने जाते हैं. ईडी के चल रहे मामलों से भी चन्नी का दावा कमजोर हुआ. एक समस्या यह भी थी कि प्रदेश अध्यक्ष के लिए एक से ज्यादा दावेदार थे. हिंदू चेहरे के तौर पर विजय सिंगला को कमान सौंपने पर भी विचार किया गया. आखिरी दौर में प्रियंका गांधी ने भी सक्रिय हुईं. अंत में कांग्रेस नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष के पद पर कोई बदलाव किए बिना सभी वरिष्ठ नेताओं को कोई ना कोई चुनावी ज़िम्मेदारी सौंप दी और सामूहिक नेतृत्व में चुनाव में उतरने का संदेश दिया.
रंधावा नाखुश, अमित शाह से मुलाकात के बाद कयास तेज
इस एलान के बाद से पंजाब कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है. चन्नी ने पंजाब में शक्ति प्रदर्शन किया तो दिल्ली में सांसद सुखजिंदर रंधावा ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की. हालांकि, रंधावा ने कहा कि यह बैठक पूर्वनिर्धारित थी और उन्होंने गृह मंत्री के साथ सीमापार पाकिस्तान से चलाई जा रही आतंकी गतिविधियों और गैंगस्टर समस्या को लेकर चर्चा की. लेकिन इस मुलाकात की टाइमिंग को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं क्यूँकि पंजाब को लेकर कांग्रेस के फैसलों से रंधावा भी ख़ुश नहीं हैं. पार्टी में नेताओं की नाराज़गी को लेकर रंधावा ने कहा कि ऐसी नौबत नहीं आनी चाहिए थी. इतनी बैठकों के बाद भी संतुष्ट नहीं होना (नेताओं का) पाना दुखद है. गुरुदासपुर से सांसद और चन्नी सरकार में उप मुख्यमंत्री रह चुके रंधावा ने माना कि इससे नुक़सान हो सकता है.
मनीष तिवारी ने भी जाहिर की नाराज़गी
एक दिन पहले ही पंजाब कांग्रेस की नई चुनावी टीम में जगह नहीं मिलने से आहत मनीष तिवारी ने पार्टी पर यह कह कर निशाना साधा कि कभी-कभी हुनर ही कमी बन जाती है और उन्हें लोगों की असुरक्षा को दूर करना नहीं आता. चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी को सलाह मशविरे में भी शामिल नहीं किया गया था जबकि वो पूर्व में लुधियाना और आनंदपुर साहिब से सांसद रह चुके हैं.
पांच साल पहले भी हुआ था “गृहयुद्ध”
2021 सितंबर में कांग्रेस नेतृत्व ने अचानक कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटा कर चन्नी को पंजाब का पहला दलित सीएम बनाया था. इसके पीछे राहुल गांधी थे. उससे पहले नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था. बाद में जब चन्नी को अगला मुख्यमंत्री उम्मीदवार भी घोषित कर दिया गया तो सिद्धू नाराज़ हो गए और आख़िरकार चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई. 5 साल बाद पंजाब कांग्रेस का नया गृहयुद्ध आकार ले रहा है. पार्टी के हालात पर निराशा जताते हुए पंजाब कांग्रेस के एक नेता ने एनडीटीवी से कहा कि क्या इस तरह हम भगवंत मान सरकार को चुनौती दे भी पाएंगे? जब सिद्धू का माहौल था तब पार्टी ने चन्नी को आगे कर दिया, अब चन्नी का माहौल है तो राजा वडिंग पर दांव लगा रहे हैं! चन्नी की नाराज़गी पंजाब में कांग्रेस को भारी पड़ सकती है.
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