दिल्ली में आयोजित हो रही ब्रिक्स समिट को लेकर पूरी दुनिया की निगाहें भारत की ओर टिकी है. इस समिट में रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, यूएई सहित कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. खास बात यह है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी इस समिट में हिस्सा लेने भारत आ रहे हैं. जिनपिंग की इस भारत यात्रा को अंतिम शुरुआत में संशय था. लेकिन बाद में यह क्लियर हो गया कि जिनपिंग समिट में शामिल होंगे. मालूम हो कि गलवान में भारत-चीन सैनिकों के बीच हुए झड़प के बाद जिनपिंग पहली बार भारत आ रहे हैं. जिनपिंग के दिल्ली दौरे को लेकर भारत-चीन रिश्ते पर भी फिर से बात शुरू हो गई है.
कहा जा रहा है कि बीते कुछ समय में दोंनो देशों के बीच के रिश्ते में तेजी से बदलाव आया है. इस बीच एनडीटीवी ने चीन की एक पत्रकार से बात की, इस बातचीत के दौरान चीनी पत्रकार ने बताया कि चीन और वहां के लोग भारत के बारे में क्या सोचते हैं?
CGTN रिपोर्टर ने की NDTV से बातचीत
चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क के इंटरनेशनल मीडिया संगठन CGTN की रिपोर्टर हुआंग युए (Huang Yue) ने NDTV से बातचीत में बताया, "भारत हमारा एक पुराना पड़ोसी है, और यह एक ऐसा पड़ोसी है जिसे हम संजोकर रखते हैं." हुआंग युए की एनडीटीवी के साथ हुई बातचीत के वीडियो अंश को भारत में चीनी दूतावास की स्पोर्कपर्सन यू जिंग ने एक्स पर साझा किया है.
What do Chinese think of Indians?
— Yu Jing (@ChinaSpox_India) September 11, 2026
"India is one of our long-term neighbours, and that's a neighbour we cherish”.🇨🇳🇮🇳
credit: @ndtv pic.twitter.com/S63dOhtNP6
कॉलेज का किस्सा, जब भारतीय छात्रों के साथ की पढ़ाई
चीन भारत के बारे में क्या सोचता है? एनडीटीवी के इस सवाल पर CGTN की रिपोर्टर हुआंग युए ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि मैंने जिस यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की, वो चीनी भाषा पढ़ाई के लिए मशहूर है. जब मैं वहां पढ़ाई करती थी, तब मैंने देखा कि वहां बहुत सारे भारतीय स्टूडेंट भी है. वहां हम उन्हीं के साथ बैठते थे, पढ़ाई करते थे. एक-दूसरे से बात करते थे.
'हमलोग दोस्त, पड़ोसी... ज्यादातर चीनी की यही सोच'
उन्होंने आगे कहा कि हम पढ़ाई के दौरान हम लोगों में कोई विवाद नहीं था, कोई अंतर नहीं था. हम सभी एक दूसरे के कल्चर के बारे में बात करते थे. भारत-चीन की दोस्ती के बारे में बात करते थे. यह दोस्ती कैसे और आगे बढ़े इसके बारे में बात करते थे. और मुझे लगता है कि चीन के ज्यादातर लोग भारत के बारे में ऐसी ही सोच रखते हैं. हम लोग पड़ोसी हैं, दोस्त हैं, ज्यादातर चीनी लोगों की भारत के प्रति यही सोच है.
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