अरुणाचल प्रदेश में एक डैम प्रोजेक्ट के खिलाफ हो रहा आंदोलन अब हिंसक होता जा रहा है. प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को एक सरकारी गाड़ी में आग लगा दी. वहीं, सरकार का कहना है कि वह प्रदर्शनकारियों से बातचीत करना चाहती है.
ये सारा बवाल अपर सियांग में प्रस्तावित एक डैम प्रोजेक्ट को लेकर हो रहा है. इस प्रोजेक्ट को चीन के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है.
वैसे तो इस प्रोजेक्ट को लेकर कई दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहा है. लेकिन बुधवार को ये तब हिंसक हो गया, जब यिंगकियोंग में प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों को फूंक दिया. इस कारण मुख्यमंत्री पेमा खांडू को अपना यिंगकियोंग का दौरा बीच में ही खत्म करना पड़ा.
बुधवार को क्या कुछ हुआ?
ऊपरी सियांग के यिंगकियोंग में बुधवार को हिंसक प्रदर्शन हुए. यिंगकियोंग में आगजनी की खबरें हैं. जब आगजनी हुई, तब मुख्यमंत्री पेमा खांडू जिले में मौजूद थे. हालांकि, विश्वसनीय सूत्रों ने बताया है कि मुख्यमंत्री को यिंगकियोंग से लौटना पड़ा है.
बताया जा रहा है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर सड़कें जाम की गईं और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई.
सियांग प्रोजेक्ट को लेकर अरुणाचल के ऊपरी सियांग में हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान गेकु और कोमकर में ग्रामीणों ने सरकारी और पुलिस की गाड़ियों में आग लगा दी.
यह भी पढ़ेंः धीरेंद्र शास्त्री के 'भैया-सैंया' बयान पर बवाल: शाही इमाम और ईसाई नेताओं ने खोला मोर्चा
पूरा प्रोजेक्ट क्या है?
ऊपरी सियांग जिले के यिंगकियोंग में 11,000 मेगावॉट क्षमता वाले प्रस्तावित सियांग अपर मल्टी-पर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) का विरोध हो रहा है. केंद्र सरकार ने 2008 में इसे 'नेशनल प्रोजेक्ट' घोषित किया था, लेकिन पिछले 18 सालों में कुछ वजहों से यह प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया है.
इस प्रोजेक्ट को चीन के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है. चीन LAC पर अपनी तरफ यारलुंग त्संगपो नदी पर मेगा डैम बना रहा है. चीन 2021 से यहां डैम बना रहा है.
यह नदी ऊपरी सियांग के रास्ते भारत में आती है. अरुणाचल में इसे सियांग नदी कहा जाता है और बाद में यह ब्रह्मपुत्र में मिल जाती है.
विरोध किस बात का हो रहा है?
इस प्रोजेक्ट का गेकू और कोमकार गांव में जमकर विरोध हो रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे सामाजिक और पर्यावरण पर असर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
स्थानीय लोगों को डर है कि अगर प्रोजेक्ट बनता है तो उन्हें पलायन करना पड़ सकता है. उनकी पुश्तैनी जमीन छीन सकती है. जंगलों और नदियों पर असर पड़ सकता है. उनका यह भी कहना है कि भूंकप के लिहाज से भी इलाका संवेदनशील है, इसलिए यहां डैम बनाना सही नहीं है.
लोगों ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या सर्वे के काम से पहले लोगों से ठीक से बातचीत की गई और उन्हें जागरूक किया गया.
उन्होंने प्रीलिमिनरी फिजिबिलिटी रिपोर्ट (PFR) के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती पर भी सवाल उठाए हैं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की मांग की है.
यह भी पढ़ेंः आरक्षण पर जंग के बीच यह दलित जाति नहीं चाहती कोटा, बोले- हमें तो जनरल में ही डाल दो
सरकार का क्या है कहना?
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को बातचीत करनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि PFR प्रस्तावित प्रोजेक्ट से जुड़े तथ्यों का पता लगाने की दिशा में पहला कदम है, जिसके तहत इसकी बुनियादी व्यवहार्यता और संभावित प्रभावों का आकलन किया जाएगा.
उन्होंने साफ किया कि PFR के निष्कर्ष आगे की जांच और सही फैसला लेने का आधार बनेंगे, लेकिन इसे परियोजना की अंतिम मंजूरी या इसके निर्माण का अंतिम निर्णय मानकर नहीं देखा जाना चाहिए.
खांडू ने जोर देकर कहा कि सरकार की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी रहे और इसमें स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं और जमीनी हकीकत का पूरा ध्यान रखा जाए.
खांडू ने कहा, 'हम हर कदम पर आपके साथ रहेंगे, आपकी चिंताओं को दूर करेंगे और अपने काम से आपका विश्वास जीतेंगे.'
ये वीडियो भी देखेंः डरे ट्रम्प, लगाएंगे 100% टैरिफ... मोदी भी तैयार
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं