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जनगणना का दूसरा चरण: क्या जाति-धर्म के लिए देना होगा प्रमाणपत्र, पूछी जा सकती है माता-प‍िता की ये ड‍िटेल

लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ़बारी वाले इलाकों (जहां जनगणना एक साथ नहीं हो पाती) में जनगणना का दूसरा चरण यानी आबादी की गिनती 1 से 30 सितंबर के बीच होगा.

जनगणना का दूसरा चरण: क्या जाति-धर्म के लिए देना होगा प्रमाणपत्र, पूछी जा सकती है माता-प‍िता की ये ड‍िटेल
  • जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या की गि‍नती को लेकर आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी
  • लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ल‍िए नोट‍िफ‍िकेशन
  • देश के बाकी हिस्सों में जनसंख्या गिनती का दूसरा चरण अगले साल शुरू होने की संभावना है

नई द‍िल्‍ली: जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या की गि‍नती को लेकर आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. केंद्र सरकार ने यह नोटिफिकेशन लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ़बारी वाले उन इलाकों के ल‍िए जारी क‍िया है, जहां सामान्य मौसम में काम करने में द‍िक्‍कत होती है. पहली बार जनगणना के 'जनसंख्या गणना' चरण के दौरान जाति संबंधी जानकारी भी ली जाएगी. हालांक‍ि, इसके ल‍िए किसी भी प्रकार का जाति प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज दिखाने की कोई जरूरत नहीं होगी. इसके अलावा माता-पिता की जन्म-तारीख और जन्म-स्थान का भी रिकॉर्ड ल‍िया जा सकता है. 

लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ़बारी वाले इलाकों में जनगणना का दूसरा चरण 1 से 30 सितंबर के बीच होगा. केंद्र सरकार ने  सोमवार को नोटिफिकेशन जारी क‍िया. इसमें भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि इन इलाकों में इस साल 1 से 30 सितंबर के बीच जनगणना का काम किया जाएगा और इसके बाद 1 से 5 अक्टूबर तक जानकारी को दोबारा जांचने (रिविजनल राउंड) का काम होगा. नोट‍िफ‍िकेशन के मुताब‍िक, घर-घर जाकर जनसंख्या की गिनती शुरू होने से पहले 17 से 31 अगस्त तक खुद जानकारी भरने (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प होगा. 

नोटिफिकेशन के मुताब‍िक, इन इलाकों के लिए जनगणना की रेफरेंस तारीख 1 अक्टूबर, 2026 को रात 12 बजे होगी. इसी तारीख के आधार पर यहां की जनसंख्या का आधिकारिक डेटा दर्ज होगा. वहीं, देश के बाकी हिस्सों में जनसंख्या गिनती का दूसरा चरण अगले साल शुरू होने की संभावना है. 

दो चरणों में की जा रही जनगणना 

आजादी के बाद से यह आठवीं जनगणना दो चरणों में की जा रही है. पहला चरण 'हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस' (HLO) कहलाता है और दूसरा चरण 'जनसंख्या जनगणना' है. पहली बार जनगणना के जनसंख्या गणना चरण के दौरान जाति संबंधी जानकारी भी एकत्र की जाएगी. इस जनगणना में जाति की गिनती को शामिल करने का फैसला पिछले साल 30 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स ने लिया था. 

पहले चरण में 33 सवाल 

पहला चरण घरों की सूची बनाना और आवास जनगणना (HLO), 30 सितंबर तक चल रहा है. कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 16 अप्रैल से घरों की लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस (आवास जनगणना) के लिए फील्ड विज‍िट शुरू हो गई. जनगणना करने वाले कर्मचारी देश भर में सभी इमारतों, घरों और परिवारों की लिस्ट बनाएंगे, ताकि जनसंख्या की गिनती के लिए आधार तैयार किया जा सके. घरों की लिस्टिंग के काम के दौरान, कर्मचारी हर घर और इमारत में जाकर 33 सवाल पूछते हैं. इन सवालों में घरों में बुनियादी सुविधाओं, परिवार के मुखिया की जानकारी (जैसे नाम और लिंग), घर के मालिकाना हक की स्थिति और दूसरी जानकारियां शामिल होती हैं.

बता दें क‍ि 2021 में होने वाली दस-सालाना जनगणना की प्रक्रिया को COVID-19 महामारी के कारण टाल दिया गया था. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना कराने के लिए 11,718 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. यह लोगों की गिनती करने का सबसे बड़ा अभियान होगा. 

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