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अनिल अंबानी ग्रुप पर CBI की बड़ी कार्रवाई, मुंबई-दिल्ली में 15 जगह छापेमारी; ₹27,337 करोड़ घोटाले की जांच तेज

₹27,337 करोड़ के कथित बैंक घोटाले की जांच में बड़ा एक्शन. अनिल अंबानी समूह से जुड़े ठिकानों पर CBI की छापेमारी ने देश के सबसे चर्चित कॉरपोरेट मामलों में से एक को फिर सुर्खियों में ला दिया है. आखिर जांच एजेंसियों को क्या सुराग मिले हैं?

अनिल अंबानी ग्रुप पर CBI की बड़ी कार्रवाई, मुंबई-दिल्ली में 15 जगह छापेमारी; ₹27,337 करोड़ घोटाले की जांच तेज
अनिल अंबानी की कंपनियों पर CBI का बड़ा एक्शन, मुंबई-दिल्ली में 15 जगह छापेमारी
दिल्ली:

CBI Raid: अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस एडीए (Reliance ADA) ग्रुप से जुड़े मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए मुंबई और दिल्ली में 15 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. यह कार्रवाई रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) से जुड़े कथित बैंक लोन घोटाले की जांच के तहत की गई. CBI के मुताबिक, जांच के दौरान कुल 23 ऐसी आपस में जुड़ी कंपनियों और संस्थाओं को निशाने पर लिया गया, जिनका संबंध रिलायंस एडीए ग्रुप से बताया गया है.

पूर्व अधिकारियों के ठिकानों पर भी छापे

एजेंसी का आरोप है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल RCFL और RHFL द्वारा बैंकों से लिए गए कर्ज को दूसरी रिलायंस एडीए ग्रुप की कंपनियों में डायवर्ट करने के लिए किया गया. इससे सरकारी बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ.

CBI ने सिर्फ कंपनियों तक ही जांच सीमित नहीं रखी, बल्कि तीन पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के ठिकानों पर भी तलाशी ली. इनमें RHFL के पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर , रिलायंस एडीए ग्रुप के पूर्व सेक्रेटेरियल हेड और RHFL के पूर्व चीफ ट्रेजरी कंसल्टेंट शामिल हैं. जांच एजेंसी को शक है कि फंड डायवर्जन में इन अधिकारियों की भी भूमिका हो सकती है.

यह छापेमारी मुंबई की विशेष CBI अदालत द्वारा जारी सर्च वारंट के आधार पर की गई. तलाशी के दौरान CBI ने कई अहम दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है. एजेंसी अब इन दस्तावेजों की जांच कर रही है और मामले में आगे की कार्रवाई जारी है.

LIC को करीब ₹27,337 करोड़ का नुकसान

CBI ने बताया कि अब तक रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़े कुल सात अलग-अलग मामले दर्ज किए जा चुके हैं. इनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom), रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL) शामिल हैं. ये मामले विभिन्न सरकारी बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम  की शिकायतों के आधार पर दर्ज किए गए हैं.

जांच एजेंसी के अनुसार, इन सात मामलों में सरकारी बैंकों और LIC को करीब 27,337 करोड़ रुपये का कथित नुकसान हुआ है. इससे पहले भी CBI इस मामले में 38 जगहों पर छापेमारी कर चुकी है. एजेंसी चार चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है. CBI के मुताबिक, सभी आरोपी इस समय न्यायिक हिरासत में हैं.

CBI ने यह भी बताया कि इन मामलों की जांच पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी है. एजेंसी का कहना है कि वह पूरे मामले की निष्पक्ष, व्यापक और जल्द से जल्द जांच पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध है.

फंड डायवर्जन की जांच तेज

रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़े इस कथित बैंक घोटाले को देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट वित्तीय मामलों में से एक माना जा रहा है. ऐसे में CBI की ताजा कार्रवाई को जांच का अहम चरण माना जा रहा है, क्योंकि एजेंसी अब फंड डायवर्जन की पूरी चेन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रही है.

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