- सीबीआई ने ओमान से सौरभ चंद्राकर को भारत लाकर महादेव ऐप मामले में गिरफ्तार किया है
- सौरभ चंद्राकर महादेव ऐप का मास्टरमाइंड माना जाता है, जो आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त था
- ओमान पुलिस की मदद से अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत सौरभ चंद्राकर को गिरफ्तार किया गया था
छत्तीसगढ़ के चर्चित महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क के प्रमुख आरोपी और कथित मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने ओमान से भारत प्रत्यर्पित कर लिया है. अन्य केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से हुई इस कार्रवाई के बाद सीबीआई की विशेष टीम उसे भारत लेकर पहुंची. अब उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराने और ट्रांजिट रिमांड लेने के बाद रायपुर ले जाया जाएगा, जहां सोमवार को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा. सौरभ चंद्राकर सीबीआई के दो मामलों में वांछित है, जिनमें एजेंसी पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है. इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय के एक मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की जा चुकी है.
देश के सबसे बड़े अवैध बेटिंग नेटवर्क की जांच में बड़ा कदम
सीबीआई ने महादेव ऑनलाइन बुक प्रकरण की जांच छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर शुरू की थी. जांच में सामने आया कि यह देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में से एक था, जिसका संचालन विदेश से किया जा रहा था. इस प्लेटफॉर्म के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और अन्य आयोजनों पर अवैध सट्टा लगाया जाता था. जांच एजेंसियों के अनुसार, देशभर में फैले फ्रेंचाइजी आधारित पैनल और शाखाओं के माध्यम से लोगों को जोड़ा जाता था और उनसे दांव की रकम एकत्र की जाती थी.
हवाला के जरिए विदेश भेजा जाता था पैसा
जांच में यह भी पता चला कि अवैध सट्टेबाजी से कमाई गई रकम को बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों के जरिए विभिन्न लेनदेन कर परत-दर-परत घुमाया जाता था. इसके बाद धन को हवाला नेटवर्क के माध्यम से विदेश भेजा जाता था. सीबीआई का दावा है कि इस अवैध कमाई का एक हिस्सा कुछ लोक सेवकों को कथित तौर पर संरक्षण राशि देने में भी इस्तेमाल किया गया, ताकि सिंडिकेट बिना किसी बाधा के अपना कारोबार जारी रख सके.
भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और साजिश समेत कई धाराएं
सीबीआई ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अलावा भारतीय दंड संहिता की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं तथा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किए हैं. सौरभ चंद्राकर इन मामलों में प्रमुख आरोपियों में शामिल है. वहीं, ईडी इस मामले में भारत और विदेश में स्थित कई संपत्तियों को पहले ही अटैच कर चुकी है.
रेड कॉर्नर नोटिस के बाद ओमान में हुई गिरफ्तारी
सौरभ चंद्राकर के खिलाफ जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे तलाश कर हिरासत में लिया था. इसके बाद सीबीआई और ईडी ने उसके खिलाफ जुटाए गए साक्ष्यों के साथ औपचारिक प्रत्यर्पण प्रस्ताव ओमान सरकार को भेजे. भारत सरकार की विभिन्न एजेंसियों, इंटरपोल की नेशनल सेंट्रल ब्यूरो इकाई और ओमान की सक्षम एजेंसियों के बीच समन्वय के बाद प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी हुई. मंजूरी मिलने पर सीबीआई की टीम मस्कट पहुंची और उसे भारत लेकर आई. सीबीआई ने इस कार्रवाई में सहयोग के लिए ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का आभार जताया है. एजेंसी ने कहा कि यह दोनों देशों की संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
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