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नेशनल हाइवे के टोल प्लाजा पर 1 अप्रैल से बंद हो सकता है कैश में भुगतान, UPI और FASTag का होगा इस्तेमाल

अभी बिना वैध फास्टैग वाले वाहनों से टोल प्लाजा पर कैश पेमेंट के दौरान दोगुना शुल्क वसूला जाता है. यूपीआई से पेमेंट करने पर केवल 1.25 गुना शुल्क देना पड़ता है.

नेशनल हाइवे के टोल प्लाजा पर 1 अप्रैल से बंद हो सकता है कैश में भुगतान, UPI और FASTag का होगा इस्तेमाल
  • सरकार 1 अप्रैल से सभी राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर कैश पेमेंट सिस्टम बंद करने पर विचार कर रही है
  • इसके बाद टोल प्लाजा पर पेमेंट केवल फास्टैग या यूपीआई जैसे डिजिटल तरीकों से ही हो सकेगा
  • अभी बिना वैध फास्टैग वाले वाहनों से टोल प्लाजा पर कैश पेमेंट करने पर दोगुना शुल्क वसूला जाता है
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देश भर के नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों के लिए सरकार एक बड़ा फैसला करने जा रही है. सरकार ने शुक्रवार को कहा कि आगामी 1 अप्रैल से सभी नेशनल हाईवे टोल प्लाजा पर कैश पेमेंट की व्यवस्था पूरी तरह बंद की जा सकती है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है. 

कैश पेमेंट क्यों बंद करना चाहती है सरकार?

सरकार ये बड़ा फैसला राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल कलेक्शन के पूरे इकोसिस्टम को डिजिटल बनाने के इरादे से करना चाहती है. इस बदलाव के बाद टोल प्लाजा पर पेमेंट केवल फास्टैग या यूपीआई जैसे डिजिटल तरीकों से ही किया जा सकेगा. 

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के का कहना है कि इस प्रस्तावित कदम का मकसद टोल प्लाजा पर कामकाज को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाना है. इससे न सिर्फ टोल बूथों पर लगने वाले भीड़ को कम किया जा सकेगा बल्कि देशभर के 1,150 से अधिक टोल प्लाजा पर यात्रियों का समय भी बचेगा.

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फास्टैग की पहुंच 98% से अधिक

आंकड़े बताते हैं कि देश में फास्टैग की पहुंच 98 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है. इसने टोल कलेक्शन के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है. RFID तकनीक से लैस फास्टैग की मदद से वाहन बिना रुके टोल पार कर रहे हैं. एनएचएआई ने सभी टोल प्लाजा पर यूपीआई पेमेंट की सुविधा भी की है ताकि यात्रियों को डिजिटल भुगतान के कई विकल्प मिल सकें.

अभी कैश पेमेंट पर दोगुना शुल्क

अभी बिना वैध फास्टैग वाले वाहनों से टोल प्लाजा पर कैश पेमेंट करने पर दोगुना शुल्क वसूला जाता है. वहीं जो यात्री यूपीआई के जरिए पेमेंट करते हैं, उन्हें केवल 1.25 गुना शुल्क देना पड़ता है. सरकार का मानना है कि डिजिटल मोड पर पूरी तरह शिफ्ट होने से ट्रैफिक मैनेजमेंट बेहतर हो सकेगा. 

कैश पेमेंट से आती हैं कई दिक्कतें

टोल प्लाजा स्तर पर किए गए आकलनों में पाया गया है कि नकद भुगतान के कारण पीक आवर्स में लंबी कतारें लगती हैं, प्रतीक्षा समय बढ़ता है और लेनदेन से जुड़े विवाद भी अधिक होते हैं. पूरी तरह डिजिटल प्रणाली लागू होने से इन समस्याओं में कमी आने और ट्रैफिक प्रबंधन अधिक सुचारु होने की उम्मीद है.

लोकप्रिय हो रहा फास्टैग का सालाना पास 

सरकार ने फास्टैग का सालाना पास भी शुरू किया है. यात्री इसे काफी पसंद कर रहे हैं. इसे इस्तेमाल करने वालों की संख्या 50 लाख के पार पहुंच गई है. इसमें 3 हजार रुपये का एकमुश्त पेमेंट करने पर एक साल की वैधता या 200 बार टोल बूथ पार करने की सुविधा मिलती है. इससे फास्टैग को बार-बार रिचार्ज करने का झंझट खत्म हो जाता है.

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