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This Article is From Feb 20, 2026

ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक में शामिल भारत ने क्या दिया मैसेज? 4 सवाल-जवाब में समझें

बोर्ड ऑफ पीस का निमंत्रण मिलने के बाद भारत ने तुरंत यह नहीं बताया था कि वह इसे स्वीकार करेगा या नहीं. भारत दावोस में इसके लॉन्च कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हुआ था.

ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक में शामिल भारत ने क्या दिया मैसेज? 4 सवाल-जवाब में समझें
डोनाल्ड ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक में भारत भी शामिल
  • डोनाल्ड ट्रंप द्वारा स्थापित बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में भारत ने पर्यवेक्षक देश के रूप में भाग लिया
  • बैठक में लगभग पचास देशों के प्रतिनिधि शामिल थे, जिनमें से 27 देश पूर्ण सदस्य और अन्य ऑब्जर्वर के रूप में शामिल
  • भारत की उपस्थिति यह संकेत देती है कि वह बोर्ड संग काम करने को इच्छुक है, भले पूर्ण सदस्यता अभी नहीं ली गई

अमेरिकी सरकार के न्योते पर विचार करने की बात कहने के एक हफ्ते बाद, भारत गुरुवार, 19 फरवरी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बनाए गए नए संगठन बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में शामिल हुआ. भारत इस बैठक में एक पर्यवेक्षक यानी ऑब्जर्वर देश के रूप में शामिल हुआ. भारत की तरफ से वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास में कार्यवाहक राजदूत नामग्या सी खम्पा बैठक में मौजूद थे. सवाल है कि बोर्ड ऑफ पीस क्या है, इसकी पहली बैठक में क्या हुआ, भारत का इसको लेकर क्या स्टैंड रहा है और उसका पहली बैठक में ऑब्जर्वर के रूप में शामिल होना क्या बताता है. चलिए समझते हैं.

Q- बोर्ड ऑफ पीस क्या है?

बोर्ड ऑफ पीस को ट्रंप ने पिछले महीने वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की सालाना बैठक में दावोस में पेश किया था. उस समय ट्रंप ने कहा था कि हर कोई इस संगठन का हिस्सा बनना चाहता है. उन्होंने यह भी कहा था कि यह संगठन आगे चलकर संयुक्त राष्ट्र (UN) को टक्कर दे सकता है. शुरुआत में इस बोर्ड का मकसद गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम की निगरानी करना था. साथ ही गाजा के पुनर्निर्माण और वहां के प्रशासन में भूमिका निभाने की बात थी. लेकिन बाद में ट्रंप की योजना इससे कहीं बड़ी हो गई. इसके चार्टर के अनुसार यह दुनिया के अन्य संघर्ष क्षेत्रों में भी शांति और स्थिरता के लिए काम कर सकता है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद इस बोर्ड के चेयरमैन हैं.

Q- बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में क्या हुआ?

वॉशिंगटन में यूएस इंस्टिट्यूट ऑफ पीस में हुई इस बैठक में करीब 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए. इनमें से 27 देश बोर्ड के सदस्य हैं. इनमें अजरबैजान, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजराइल, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्किये, यूएई, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं. भारत और यूरोपीय यूनियन समेत बाकी देश ऑब्जर्वर  के रूप में शामिल हुए.

बैठक में ट्रंप ने कहा कि कजाखस्तान, अजरबैजान, यूएई, मोरक्को, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत ने मिलकर गाजा के लिए 7 अरब डॉलर की राहत राशि देने पर सहमति जताई है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका बोर्ड ऑफ पीस के लिए 10 अरब डॉलर देगा, लेकिन यह नहीं बताया कि यह पैसा किस काम में लगेगा. वहीं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल के कमांडर मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स ने कहा कि मोरक्को, कजाखस्तान, कोसोवो और अल्बानिया ने गाजा में हजारों सैनिक भेजने का वादा किया है. वहीं मिस्र और जॉर्डन ने वहां के कर्मियों को ट्रेनिंग देने की बात कही है.

इस बीच यह आशंका भी जताई गई कि ट्रंप बोर्ड ऑफ पीस को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं. इस पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका फिर से संयुक्त राष्ट्र के साथ काम करेगा. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में बहुत क्षमता है, लेकिन वह अभी तक अपनी पूरी क्षमता पर काम नहीं कर पाया है. उन्होंने कहा कि भविष्य में संयुक्त राष्ट्र ज्यादा मजबूत होगा और बोर्ड ऑफ पीस यह देखेगा कि संयुक्त राष्ट्र सही तरीके से काम करे.

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र को मजबूत करेगा. उसकी सुविधाओं को बेहतर बनाएगा और उसे आर्थिक मदद देगा ताकि वह ठीक से काम करता रहे.

Q- बोर्ड ऑफ पीस पर भारत का क्या स्टैंड रहा है?

बोर्ड का निमंत्रण मिलने के बाद भारत ने तुरंत यह नहीं बताया था कि वह इसे स्वीकार करेगा या नहीं. भारत दावोस में इसके लॉन्च कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हुआ था. फिर 12 फरवरी को विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि अमेरिका सरकार से बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का निमंत्रण मिला है और भारत इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा था कि भारत हमेशा पश्चिम एशिया में शांति को बढ़ावा देने वाले प्रयासों का समर्थन करता रहा है. उन्होंने कहा था कि भारत के प्रधानमंत्री ने भी गाजा सहित पूरे क्षेत्र में लंबे समय तक शांति लाने वाली सभी पहलों का स्वागत किया है. इसलिए बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के निमंत्रण पर अभी विचार चल रहा है.

Q- पहली बैठक में शामिल होना क्या दिखाता है?

गुरुवार की बैठक में भारत की मौजूदगी से यह साफ हो गया कि भारत इस बोर्ड के साथ काम करने को तैयार है, भले ही अभी वह इसका पूर्ण सदस्य बनने के लिए तैयार न हो.

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