- दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके की फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध अतिक्रमण हटा दिया गया है.
- MCD ने हाई कोर्ट के आदेश के बाद अवैध निर्माण को ढहाया, इस दौरान पुलिस पर पथराव भी हुए.
- अब AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए दिल्ली वक्फ बोर्ड की मिलीभगत का आरोप लगाया.
Bulldozer Action Near Faiz-e-Ilahi Mosque: दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके की फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध अतिक्रमण हटाने को लेकर बड़ा बवाल मचा है. हाई कोर्ट के आदेश के बाद बुधवार आधी रात MCD ने अवैध निर्माण ढहा दिया. इस दौरान पुलिस पर पथराव भी किया गया. जिसमें पुलिस के कुछ जवान भी घायल हुए. जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे. फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुए बुलडोजर एक्शन पर अब AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की प्रतिक्रिया सामने आई है. असदुद्दीन ओवैसी ने इस पूरी कार्रवाई को गलत ठहराते हुए इसमें दिल्ली वक्फ बोर्ड की मिलीभगत की ओर इशारा किया है.
ओवैसी बोले- वो तमाम जायदाद वक्फ की
तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास MCD द्वारा चलाए गए अभियान पर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि देखिए इस बात को समझने की जरूरत है कि वो तमाम जायदाद वक्फ की है. हैदराबाद सांसद ने 1970 की गजट के इंट्री नंबर-40 का जिक्र करते हुए सरकार ने जो गजट जारी किया था, उसमें उसका जिक्र है.

RSS से जुड़ी संस्था की याचिका पर फैसला
ओवैसी ने आगे कहा कि यह बात बिल्कुल सही है कि 12 नवंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस पर फैसला सुनाया. हैरतअंगेज बात यह है कि RSS से जुड़े याचिकाकर्ता 'सेव इंडिया फाउंडेशन' ने अदालत का रुख किया. अदालत ने सर्वेक्षण का आदेश दिया, लेकिन इसमें वक्फ को पक्षकार नहीं बनाया गया.
ओवैसी ने पूछा- सर्वे में वक्फ बोर्ड के लोग क्यों नहीं?
सर्वे में MCD, रेवेन्यू, पुलिस विभाग के लोग है, लेकिन जो जायदाद वक्फ की है, उस वक्फ के लोग सर्वे में क्यों नहीं है? दिल्ली वक्फ बोर्ड को मामले में पक्षकार बनाया जाना चाहिए था और वक्फ राजपत्र अधिसूचना का उल्लेख किया जाना चाहिए था. दिल्ली वक्फ बोर्ड को अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए थी.
#WATCH | Chhatrapati Sambhajinagar, Maharashtra | On demolition drive carried out by MCD near Faiz-e-Elahi Masjid, Turkman Gate, AIMIM MP Asaduddin Owaisi says," The fact is that this whole land belongs to Waqf...On 12th November, the Delhi HC indeed gave a judgment. The… pic.twitter.com/DuyWF9ZvTO
— ANI (@ANI) January 7, 2026
वक्फ बोर्ड को पार्टी बनना चाहिएः ओवैसी
ओवैसी ने कहा कि अदालत ने गलत फैसला लिया. यह भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण (LDO) शहरी मामलों के मंत्रालय के अनुसार है. महत्वपूर्ण बात यह है कि 1947 में यह स्थान एक मस्जिद था. वक्फ को नुकसान हुआ है. दिल्ली वक्फ बोर्ड को इसमें पार्टी बनना चाहिए था. वक्फ बोर्ड को रिव्यू डालना चाहिए था. तीन महीने का समय था. फरवरी से पहले वक्फ बोर्ड को रिव्यू करना था.
जो हुआ वह सरासर गलतः ओवैसी
AIMIM चीफ ने कहा कि जो हुआ है वह सरासर गलत है. दिल्ली वक्फ बोर्ड और उसकी प्रबंध समिति को सर्वोच्च न्यायालय में जाकर सभी तथ्यों को बताना चाहिए और यथास्थिति बहाल करानी चाहिए..." प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि 1947 में यह जगह मस्जिद थी. संसद के बनाए कानून की भी धज्जियां उड़ा दी गई.
दिल्ली वक्फ बोर्ड पर ओवैसी ने उठाए सवाल
वक्फ बोर्ड पर सवाल उठाए हुए ओवैसी ने कहा कि दिल्ली वक्फ बोर्ड पूरी तरह से इसमें मुल्बिस है. वक्फ बोर्ड की मिलीभगत है. यह उनकी नादानी नहीं है. डेलिब्रेटली इन लोग आंख बंद कर लिया. ओवैसी ने उम्मीद जताई कि दिल्ली वक्फ बोर्ड के लोग जल्द सुप्रीम कोर्ट जाएं. अदालत को पूरे मामले की जानकारी दें.
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