- असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों को सिर्फ वोटर नहीं बल्कि अपनी राजनीतिक एजेंसी बनानी होगी
- ओवैसी ने आतंक विरोधी कानूनों के दुरुपयोग और UAPA की धारा 15A के गलत इस्तेमाल की आलोचना की
- उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने UAPA में संशोधनों का समर्थन किया था जबकि उन्होंने इसका विरोध किया था
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों के पास अपनी राजनीतिक एजेंसी नहीं है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर आप सिर्फ वोटर बने रहेंगे तो आपका घर बुलडोज कर दिया जाएगा. सभी राजनीतिक पार्टियां जैसे कि बीजेपी, अजित पवार और एकनाथ शिंदे आपके वोट डर दिखाकर लेना चाहती हैं. कांग्रेस चाहती है कि आप सिर्फ वोटर बने रहें ताकि आप कुछ हासिल न कर सकें, आपको अपनी राजनीतिक एजेंसी बनानी होगी.”
#WATCH | Nagpur, Maharashtra | AIMIM chief Asaduddin Owaisi says, "Muslims don't have a political agency. If you remain just a voter, your house will be bulldozed... All the political parties, including the BJP, Ajit Pawar, and Eknath Shinde, want to gain your votes by scaring… pic.twitter.com/bQRu4Myzch
— ANI (@ANI) January 10, 2026
आतंक विरोधी कानून का दुरुपयोग
असदुद्दीन ओवैसी ने यह बयान 10 जनवरी को नागपुर में दिया. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि अपनी ताकत और संगठन खड़ा करना होगा ताकि वे अपने अधिकारों के लिए प्रभावी आवाज उठा सकें. ओवैसी ने कहा कि आतंकवाद विरोधी कानूनों का दुरुपयोग किया जा रहा है, और साथ ही ये भी दावा किया कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 15A का इस्तेमाल मुसलमानों, दलितों और आदिवासियों के खिलाफ किया जा रहा है.
ये भी पढ़ें : दिल्ली वक्फ बोर्ड की मिलीभगत से फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास चला बुलडोजर? AIMIM चीफ ओवैसी ने उठाए सवाल
ओवैसी ने कांग्रेस को भी घेरा
एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने आरोप लगाया कि UAPA में संशोधनों से अधिकारियों को दूर से भी व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित करने की अनुमति मिलती है, और कहा कि कांग्रेस ने भी इन बदलावों का समर्थन किया था, जिसका उन्होंने पहले संसद में विरोध किया था. ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने दो युवाओं को जमानत देने से इनकार कर दिया, क्योंकि डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान पी. चिदंबरम ने एक कानून में आतंकवाद को परिभाषित किया था. धारा 15A का इस्तेमाल मुसलमानों, दलितों और आदिवासियों के खिलाफ किया जाएगा.
शरजील और उमर पर कही ये बात
साल 2019 में, अमित शाह ने UAPA कानून में संशोधन किया, जिसमें कहा गया है कि दिल्ली में बैठा NIA अधिकारी नागपुर में किसी को भी आतंकवादी घोषित कर सकता है. इस कानून का कांग्रेस ने समर्थन किया था. मैंने विरोध किया और वोटिंग कराने की मांग की. कांग्रेस फिर भी पीछे नहीं हटी. हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश से जुड़े एक मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया, जबकि पांच अन्य आरोपियों को जमानत दे दी. यह देखते हुए कि अभियोजन और सबूतों के मामले में दोनों "गुणात्मक रूप से अलग स्थिति" में हैं.
ये भी पढ़ें : राजनीतिक दलों से पैसे ले ले लीजिए... लातूर में चुनावी रैली में बोले AIMIM चीफ ओवैसी
सुप्रीम कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को यह देखते हुए जमानत दे दी कि अगर उनकी कोई गलती है भी, तो वह सीमित प्रकृति की लगती है. हालांकि, कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को इसी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया.
(एएनआई इनपुट्स के साथ)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं