- संसद के बजट सत्र का आरंभ राष्ट्रपति के अभिभाषण से हुआ, जिसे सामान्य सत्र माना जा रहा था
- विपक्ष ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा में पूर्व आर्मी प्रमुख की किताब का जिक्र किया
- लोकसभा अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए कार्यवाही स्थगित की, यह हालिया वर्षों में पहली बार हुआ
संसद का बजट सत्र शुरू हुआ राष्ट्रपति के अभिभाषण से, लग रहा था कि ये सत्र सामान्य रहेगा मगर किसी को मालूम नहीं था कि 2026 का यह बजट सत्र ऐतिहासिक बन जाएगा और इतिहास में इसकी चर्चा होगी.राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद बजट भी अच्छे माहौल में पेश हुआ मगर सोमवार को जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा शुरू हुई तो कुछ ऐसा घटा जो अक्सर संसद में देखने को नहीं मिलता है.लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान एक ऐसी किताब का जिक्र करना शुरू किया जो भारत में छपी भी नहीं है,मगर इसके पीछे की कहानी दिलचस्प है. राहुल गांधी से पहले कनार्टक से बीजेपी के सांसद तेजस्वी सूर्या बोले और उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर चौतरफ़ा हमला किया और कहा कि यूपीए सरकार ने आतंकवाद से निबटने के लिए कुछ नहीं किया.नक्सलवाद पर लगाम लगाने के लिए कुछ नहीं किया.सूर्या के इन्हीं बातों पर राहुल गांधी बिफर गए और जब उन्होंने बोलना शुरू किया तो सीधे पूर्व आर्मी प्रमुख जनरल नरवाने की किताब का जिक्र करने लगे.उस वक्त सदन में रक्षा मंत्री और गृह मंत्री भी मौजूद थे.
राहुल गांधी ने जैसे ही नरवाने की किताब का जिक्र किया रक्षा मंत्री ने विरोध जताया फिर गृह मंत्री ने भी एतराज जताया.सबका कहना था कि यह किताब भारत में छपी ही नहीं है.लोकसभा अध्यक्ष ने भी यही कहा कि जो किताब छपी ही नहीं है उसका आप उल्लेख कैसे कर सकते हैं. फिर राहुल गांधी ने एक पत्रिका में छपे एक लेख का जिक्र करने लगे जिसमें नरवाने के किताब पर एक लेख छापा था.लोकसभा अध्यक्ष ने इसकी भी अनुमति नहीं दी और इसी बात को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में ठन गई.विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने का मौका क्यों नहीं दिया गया.लोकसभा लगातार स्थगित होती रही कोई कामकाज नहीं हुआ.अब हालात यहां तक पहुंच गए कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री धन्यवाद प्रस्ताव पर बोल पाएंगे या नहीं.लोकसभा में विपक्ष लगातार करता रहा जब प्रधानमंत्री को बोलना था तब विपक्ष की कुछ महिला सांसद उनके सीट के सामने और बगल में खड़ी हो गई ऐसी स्थिति में लोकसभा अध्यक्ष ने सदन को स्थगित कर दिया और प्रधानमंत्री नहीं बोल पाए.
विपक्षी दल के सांसदों के हंगामे की वजह से कई सांसदों को लोकसभा अध्यक्ष ने बजट सत्र में हिस्सा लेने पर ही रोक लगा दी.बाद में लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही स्थगित की थी.हाल के वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है जब प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर नहीं बोल पाए हों. हालांकि 2004 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ भी यही हुआ था.लोकसभा में ना बोल पाने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यसभा में अपने भाषण में विपक्ष को जम कर आड़े हाथों लिया.
इसी के साथ लोकसभा का यह बजट सत्र इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया.अभी बजट सत्र के पहले भाग के सत्र में एक हफ्ता और बाकी है और केन्द्रीय बजट पर चर्चा होनी है.उम्मीद की जा रही है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कोई आम सहमति बने जिससे कि सदन आने वाले दिनों में सुचारू ढंग से चल पाए.सदन के बाहर की एक घटना ने भी खूब सुर्ख़ियां बटोरी और उस पर विवाद भी हुआ.
वाकया ऐसा है कि सदन से निलंबित सांसद संसद भवन की सीढ़ी पर धरना कर रहे थे तभी केंद्रीय मंत्री रवणीत सिंह बिट्टू वहां से गुजर वक्त उन सांसदों पर टिप्पणी की कि ऐसा लग रहा कि कारगिल जीत कर आए हो,इत्तेफाक से राहुल गांधी वहीं पर थे उन्होंने बिट्टू को कहा माय ट्रेटर फ्रैंड यानि मेरे गद्दार दोस्त,मुझे पता है तुम वापस कांग्रेस में आओगे.इसको लेकर अच्छा खासा विवाद हुआ.इन वजहों से भी बजट सत्र का ये हफ्ता याद किया जाएगा.
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