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This Article is From Feb 06, 2026

संस्कृत के श्‍लोग में पीएम मोदी ने बताया कौन सी है सबसे सस्‍ती दवा, बताया कैसे आप फ्री में रह सकते हैं सेहतमंद

PM Modi Message: प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित शेयर किया. इस श्लोक में कहा गया है कि सभी औषधियों में हंसी को श्रेष्ठ माना गया है.

संस्कृत के श्‍लोग में पीएम मोदी ने बताया कौन सी है सबसे सस्‍ती दवा, बताया कैसे आप फ्री में रह सकते हैं सेहतमंद
PM Modi's Message: प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित शेयर किया.

Laughter Is Medicine: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और थकान आम बात हो गई है. लोग अच्छी सेहत के लिए महंगी दवाइयों, सप्लीमेंट्स और थेरेपी की ओर भाग रहे हैं, लेकिन अक्सर सबसे आसान उपाय को भूल जाते हैं हंसना. इसी सरल लेकिन गहरे संदेश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषित के माध्यम से देशवासियों तक पहुंचाया है. उन्होंने बताया कि हंसी न सिर्फ मन को हल्का करती है, बल्कि यह सबसे अच्छी और सहज दवा भी है.

पीएम मोदी ने क्या संदेश साझा किया?

प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित शेयर किया. इस श्लोक में कहा गया है कि सभी औषधियों में हंसी को श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि यह बिना किसी लागत के आसानी से उपलब्ध है और स्वास्थ्य व आनंद दोनों को बढ़ाती है.

इस सुभाषित के साथ पीएम मोदी ने एक छोटा वीडियो भी शेयर किया, जिसमें करीब 53 सेकेंड में इस श्लोक का अर्थ हिंदी और अंग्रेजी में समझाया गया. वीडियो का संदेश साफ है मुस्कुराते रहिए, क्योंकि यही सबसे प्राकृतिक इलाज है.

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हंसी को क्यों कहा गया सबसे अच्छी दवा?

मन और शरीर को एक-दूसरे से जुड़ा माना गया है. हंसने से न सिर्फ मूड बेहतर होता है, बल्कि इसके कई वैज्ञानिक फायदे भी हैं.

1. तनाव कम करने में मददगार: हंसने से शरीर में तनाव हार्मोन कम होते हैं और मन को तुरंत राहत मिलती है.

2. इम्युनिटी को मजबूत बनाती है: खुशी और सकारात्मक सोच शरीर की इम्यूनिटी को बेहतर बनाती है.

3. दिल और दिमाग के लिए फायदेमंद: रेगुलर हंसने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है.

4. रिश्तों में मिठास बढ़ाती है: मुस्कुराता हुआ इंसान दूसरों को भी पॉजिटिव एनर्जी देता है, जिससे सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते मजबूत होते हैं.

प्रधानमंत्री मोदी दिसंबर 2025 से लगातार संस्कृत सुभाषितों के माध्यम से प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. वे अपने भाषणों, मन की बात और सोशल मीडिया पोस्ट्स में इन श्लोकों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि लोग जीवन, नैतिकता, जिम्मेदारी और संतुलन को सरल शब्दों में समझ सकें.

संस्कृत की आज भी क्यों है अहमियत?

पीएम मोदी कई बार यह बात कह चुके हैं कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि विचारों और मूल्यों की धरोहर है. उन्होंने दूरदर्शन के सुप्रभातम कार्यक्रम का भी जिक्र किया, जहां रोज सुबह एक संस्कृत सुभाषित के जरिए दिन की सकारात्मक शुरुआत की जाती है.

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