Income Tax Budget 2026: आम बजट के दिन इनकम टैक्स में राहत की बात करें तो बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं हैं, क्योंकि पिछले साल की गई घोषणाओं में ही 12 से 15 लाख रुपये तक की सालाना आय टैक्स के दायरे से बाहर हो गई थी. लेकिन सरकार टैक्सेशन पॉलिसी में थोड़ा बदलाव कर सकती है. यह संभावना जताई जा रही है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पति और पत्नी को एक साथ इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने का प्रस्ताव ला सकती है. यानी पति पत्नी के लिए ज्वाइंट टैक्सेशन पॉलिसी लाई जा सकती है. अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों में ऐसी सुविधा मिलती है. अगर ऐसा होता है तो कामकाजी जोड़ों को काफी राहत मिल सकती है.
क्या ओल्ड टैक्स रिजीम खत्म होगी
संभावना यह भी जताई जा रही है कि आम बजट में ओल्ड टैक्स रिजीम को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने का ऐलान भी सरकार कर सकती है. आंकड़ों के मुताबिक, 72 फीसदी करदाता न्यू टैक्स रिजीम में शिफ्ट हो चुके हैं. ऐसे में सरकार पुरानी आयकर व्यवस्था (Old Tax Regime) को 5 सालों के भीतर खत्म करने का प्लान पेश कर सकती है. साथ ही स्टैंडर्ड डिडक्शन में छूट को 75 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये तक कर सकती है.
ये प्रस्ताव लागू होता है, तो सिर्फ एक कमाई पर निर्भर परिवारों को टैक्स में लाखों रुपये बचा सकेंगे. अभी भारत में हर करदाता को अपनी आय पर अलग-अलग टैक्स देना पड़ता है. शादीशुदा या अन्य मामलों में कोई बदलाव नहीं है. पति और पत्नी इनकम टैक्स अलग-अलग दाखिल करना पड़ता है. इनकम टैक्स छूट, टैक्स स्लैब और स्टैंडर्ड डिडक्शन भी अलग-अलग. इससे शादीशुदा जोड़े अपने जीवनसाथी की कर छूट का पूरा लाभ नहीं उठा पाते और टैक्स का बोझ बढ़ जाता है.
सिंगल इनकम परिवारों में क्या
भारत में तमाम परिवार ऐसे हैं जहां परिवार में पति या पत्नी एक ही व्यक्ति नौकरी करता है. दूसरा परिवार की देखभाल करता है. लेकिन दूसरे व्यक्ति द्वारा टैक्स सिस्टम में उनकी छूट का कोई अलग फायदा नहीं मिलता है. ऐसे परिवारों पर टैक्स बोझ ज्यादा पड़ता है.
ये भी पढ़ें - बदला मौसम, शुभ मुहूर्त और संडे का दिन ... आज का बजट क्यों है स्पेशल
जॉइंट टैक्सेशन क्या है?
जॉइंट टैक्सेशन (What is joint taxation) से अभिप्राय है कि शादीशुदा कपल अपनी आय को जोड़कर एक साथ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर पाएंगे. बजट 2026 में इसे विकल्प के तौर पर लाया जाएगा. अगर शादीशुदा जोड़े चाहें तो इनकम टैक्स अलग-अलग दाखिल करते रहें और फिर संयुक्त रूप से टैक्स रिटर्न फाइल करने का विकल्प चुन सकेंगे. दोनों का पैन कार्ड होना जरूरी होगा.
जॉइंट टैक्सेशन के फायदे
ज्वाइंट टैक्सेशन सिस्टम (joint taxation Benefits) में पति-पत्नी की कुल आय को जोड़कर एक अलग टैक्स स्लैब लाया जा सकता है. इससे परिवार की कुल टैक्स देनदारी एक साथ पता चल जाएगी. अगर परिवार में पति या पत्नी कोई एक ही शख्स कमाता है तो टैक्स में राहत मिल सकती है.
जॉइंट आयकर रिटर्न (ITR) से होम लोन के ब्याज और मेडिकल बीमा पर छूट को पति-पत्नी अपने हिसाब से समन्वय कर सकते हैं. पति 15 लाख रुपये कमाता है और पत्नी गृहिणी है, तो पूरे 15 लाख पर टैक्स लगता है. जॉइंट टैक्सेशन फाइल करने से दोनों की आयकर छूट सीमा (Exemption Limit) जुड़ जाएगी. इससे टैक्स का बोझ 50 फीसदी तक कम हो सकता है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं