- BSNL की स्थापना 19 अक्टूबर 2002 को हुई थी, जो जल्द ही देश की नंबर-1 टेलीकॉम कंपनी बन गई थी
- मोदी सरकार ने BSNL को बंद करने के बजाय चार बार तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का रिवाइवल पैकेज दिया है
- BSNL की माली हालत खराब होने के कारण हजारों कर्मचारियों को वॉलेंटियरी रिटायरमेंट दिया गया जिससे खर्च कम हुआ
भारतीय संचार निगम लिमिटेड यानी BSNL. 19 अक्टूबर 2002 को तब के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने BSNL की शुरुआत की थी. देखते ही देखते BSNL देश की नंबर-1 टेलीकॉम कंपनी बन गई. लेकिन फिर इसकी माली हालत बिगड़ने लगी और कंपनी पर हजारों करोड़ों का कर्ज चढ़ गया. एक वक्त तो इसे बंद करने की भी बात होने लगी थी. हालांकि, मोदी सरकार ने इसे बंद करने की बजाय इसे 'जिंदा' रखा. इसके लिए BSNL को लाखों करोड़ रुपये का 'रिवाइवल पैकेज' दिया गया.
2019 से 2025 तक सरकार 4 बार BSNL को 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का रिवाइवल पैकेज दे चुकी है. अब यही BSNL इसलिए सुर्खियों में आ गई है, क्योंकि इसके डायरेक्टर विवेक बंजल के प्रयागराज दौरे के लिए 'शाही प्रोटोकॉल' तैयार किया गया. आदेश जारी हुआ कि 25 और 26 फरवरी को विवेक बंजल प्रयागराज के दौरे पर रहेंगे. उनके दौरे के लिए खास व्यवस्था करने को कहा गया. उनके लिए अंडरवियर, कंघी, तेल, चिप्स, फ्रूट और जूस जैसी चीजों का इंतजाम करने का आदेश दिया गया. इसके लिए बकायदा 50 अफसरों को लगाया गया.
हालांकि, ये आदेश लीक हो गया और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इसके बाद आनन-फानन में BSNL के डायरेक्टर विवेक बंजल का दौरा रद्द कर दिया. केंद्र सरकार ने भी इसमें दखल दिया. विवेक बंजल के दौरे के लिए ऐसा आदेश जारी करने वाले अफसर का ट्रांसफर आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में कर दिया गया. विवेक बंजल को भी कारण बताओ नोटिस दिया गया है और उनसे 7 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है.
खर्च कम करने के लिए कर्मचारियों को VRS दिया
जिस BSNL के डायरेक्टर के 'शाही शौक' पूरे करने के लिए आदेश दिए जा रहे हैं, उसी BSNL की माली हालत बहुत खराब है. BSNL पर अभी भी हजारों करोड़ों रुपये का कर्ज है. केंद्र सरकार के मुताबिक, 31 मार्च 2024 तक BSNL पर 23,297 करोड़ रुपये का कर्ज था.
BSNL की हालत इतनी खराब है कि कभी इसमें काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या 1.70 लाख से ज्यादा थी. अब BSNL में 55 हजार से भी कम कर्मचारी हैं. BSNL की एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक कंपनी में 54,875 कर्मचारी थे. इनमें से 29,115 एग्जीक्यूटिव और 25,760 नॉन-एग्जीक्यूटिव कर्मचारी हैं.

BSNL की माली हालत सुधारने के लिए इसमें काम करने वाले हजारों कर्मचारियों को वॉलेंटियरी रिटायरमेंट (VRS) दे दिया गया था, ताकि खर्चों पर लगाम लगाई जा सके. संसदीय समिति की एक रिपोर्ट बताती है कि BSNL के 78,500 कर्मचारियों को VRS दिया गया था. इससे हर साल BSNL का कर्मचारियों की तनख्वाह पर होने वाला 7 से 8 हजार करोड़ कम हो गया.
वहीं, BSNL की सालाना रिपोर्ट बताती है कि 2023-24 में कंपनी ने कर्मचारियों पर 8,300 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए थे. 2024-25 में ये कम होकर 7,172 करोड़ रुपये हो गया. यानी, एक साल में BSNL का अपने कर्मचारियों पर खर्च 1,129 करोड़ रुपये कम हो गया.
टैक्सपेयर्स के पैसों पर सर्वाइव कर रही BSNL
BSNL पर कर्ज इतना बढ़ गया था और उसकी माली हालत इतनी खराब हो गई थी कि इसे बंद करने तक की मांग होने लगी थी. हालांकि, सरकार ने ऐसा नहीं किया और इसे बचाए रखने के लिए रिवाइवल पैकेज लेकर आई.
दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार ने संसद में बताया था कि 2019 के बाद से अब तक BSNL को 4 बार रिवाइवल पैकेज दिया जा चुका है. सबसे पहले 2019 में BSNL को 69,000 करोड़ का पैकेज दिया गया. इसके बाद 2022 में 1.64 लाख करोड़ रुपये दिए गए. 2023 में 4G/5G के लिए 89,000 करोड़ रुपये का पैकेज मिला. इसके बाद 2025 में 4G नेटवर्क के इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 6,982 करोड़ रुपये का पैकेज दिया गया.

इस हिसाब से सरकार BSNL को अब तक 3,28,982 करोड़ रुपये का रिवाइवल पैकेज दे चुकी है. सरकार ने ये भी बताया था कि इस पैकेज से अब तक 2,54,575 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं.
कितने घाटे में है BSNL?
BSNL को टैक्सपेयर्स का पैसा दिया जा रहा है ताकि उसकी स्थिति ठीक हो सके. हालात थोड़ी सुधरी है लेकिन बहुत ज्यादा नहीं.
2007 के बाद BSNL को अब तक सिर्फ एक ही बार मुनाफा हुआ है. अक्टूबर से दिसंबर 2024 वाली तिमाही में BSNL को 262 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था. हालांकि, ये मुनाफा सिर्फ एक ही बार हुआ. इसके बाद सारी तिमाही में BSNL को घाटा हुआ है.
BSNL की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर 2025 की तिमाही में कंपनी को 1,300 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. BSNL की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर-दिसंबर 2025 में कंपनी को 6,000 करोड़ की कमाई हुई थी लेकिन उसका खर्च 7,300 करोड़ रुपये रहा.
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