- पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने अगले तीन महीनों के लिए संगठन से लेकर चुनाव प्रचार के लिए रणनीति बना ली है
- फरवरी में साइलेंट पीरियड के दौरान पार्टी बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने और पारंपरिक प्रचार पर ध्यान देगी
- राज्य के 81 हजार पोलिंग बूथों की समीक्षा के बाद चुनाव आयोग की नई सीमा के अनुसार बूथ संख्या बढ़ सकती है
पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए अगले तीन महीने बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं. पंद्रह वर्षों से सत्ता में काबिज ममता बनर्जी को हटाने के लिए बीजेपी एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है. बीजेपी सूत्रों के अनुसार, अगले तीन महीनों के लिए पार्टी ने रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है. इसमें संगठन पर जोर, राज्यभर में परिवर्तन यात्राएं निकालना और खुद को ममता के विकल्प के रूप में पेश करना भी शामिल है.
पश्चिम बंगाल में दसवीं और बारहवीं कक्षाओं की परीक्षाओं के कारण फरवरी का महीना साइलेंट पीरियड होता है. इस महीने में लाउडस्पीकरों के उपयोग पर प्रतिबंध है, लिहाज़ा बड़ी रैलियां या राजनीतिक कार्यक्रम नहीं हो सकते. बीजेपी इस समय का उपयोग संगठन की ताकत को मजबूत करने में लगाएगी. पार्टी के चुनावी अभियान से जुड़े एक प्रमुख नेता ने अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा कि पूरे फरवरी महीने में पार्टी का जोर बूथ स्तर पर संगठन को मजबूती देने और प्रचार के पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करने पर होगा.
81 हजार पोलिंग बूथ को लेकर बीजेपी कर रही है तैयारी
राज्य में चलाए जा रहे मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण अभियान के बाद 14 फरवरी को मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन होना है. ऐसे में बीजेपी इस पर भी नजर रखेगी और बूथ स्तर पर मतदाता सूचियों की समीक्षा की जाएगी. राज्य में अभी करीब 81 हजार पोलिंग बूथ हैं. चुनाव आयोग ने अब हर बूथ पर 1200 से अधिक मतदाता न होने की सीमा रखी है. ऐसे में बूथों की संख्या बढ़कर करीब एक लाख हो सकती है. फरवरी में बीजेपी नई संख्या के हिसाब से ही बूथों को तैयार करेगी.
6 जोन में बंगाल को बांटा गया
बीजेपी ने संगठन के हिसाब से राज्य को छह ज़ोन में बांटा है. हर ज़ोन की जिम्मेदारी बाहर से आए प्रमुख नेताओं ने संभाली है. आरएसएस के साथ तालमेल किया गया है और हर ज़ोन में संगठन के स्तर पर निगरानी के लिए प्रमुख नेताओं की तैनाती की गई है. विधानसभा सीटों के हिसाब से भी नेताओं को तैनात किया गया है.
जनवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राज्य का दौरा किया है. वे एक बार फिर 30 और 31 जनवरी को राज्य के दौरे पर हैं. गृह मंत्री अमित शाह ने सांसदों और विधायकों से जनसंपर्क बढ़ाने को कहा था. इसके बाद पार्टी ने राज्यभर में डेढ़ हजार से भी अधिक संपर्क सभाएं आयोजित कीं.
लोगों से सीधे संपर्क साधने की तैयारी में बीजेपी
राज्य में बीजेपी ने एक नया प्रयोग करते हुए छोटे-छोटे अड्डे आयोजित कराए हैं, जिनमें इन कॉर्नर मीटिंग्स के जरिए लोगों से सीधे संपर्क साधा गया है. आम लोगों को टीएमसी सरकार के खिलाफ अपना गुबार निकालने के लिए मंच भी दिया गया. बीजेपी ने राज्य में 162 सीटों पर पूरी ताकत झोंकने का फैसला किया है. पार्टी ने सभी 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है. तापस रे की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय संकल्प पत्र समिति का गठन भी कर दिया गया है.
पूरे राज्य में निकाले जाएंगे परिवर्तन यात्रा
फरवरी में साइलेंट पीरियड खत्म होने के बाद बीजेपी मार्च में पूरे राज्य में परिवर्तन यात्राएं निकालने जा रही है. राज्य के प्रमुख नेताओं को इन यात्राओं की जिम्मेदारी दी जाएगी. हर कोने से निकलने वाली इन यात्राओं को प्रमुख राष्ट्रीय नेता जैसे गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ आदि हरी झंडी दिखाएंगे.
ममता बनर्जी को लेकर क्या है रणनीति?
राज्य बीजेपी के प्रमुख नेता सुवेंदु अधिकारी, समिक भट्टाचार्य, सुकांत मजूमदार, अग्निमित्रा पॉल, लॉकेट चटर्जी, दिलीप घोष आदि इन यात्राओं में शामिल रहेंगे. सभी यात्राओं का समापन एक बड़ी रैली के माध्यम से कोलकाता में करने की योजना है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित कर सकते हैं. बीजेपी ने हिंदुत्व, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है. ममता बनर्जी पर सीधे हमले करने के बजाय उनकी सरकार पर निशाना साधा जाएगा.
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल सात मई को समाप्त हो रहा है. ऐसे में राज्य में मार्च के अंतिम सप्ताह से लेकर अप्रैल के अंतिम सप्ताह के बीच कुछ चरणों में विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं. 2021 में राज्य में आठ चरणों में 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच विधानसभा चुनाव कराए गए थे. हालांकि इस बार कम चरणों में चुनाव कराए जाने की संभावना है.
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