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बिहार के लाल ने फिनलैंड से बनाई प्राइवेसी-फर्स्ट टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया को देना चाहते हैं नया विकल्प

बिहार के औरंगाबाद मूल के फिनलैंड निवासी टेक्नोलॉजी उद्यमी सुनील कुमार सिंह ZKTOR नामक एक प्राइवेसी-केंद्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित कर रहे हैं.

बिहार के लाल ने फिनलैंड से बनाई प्राइवेसी-फर्स्ट टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया को देना चाहते हैं नया विकल्प
कौन हैं सुनील कुमार सिंह और क्या है ZKTOR?

भारतीय मूल के फिनलैंड निवासी टेक्नोलॉजी उद्यमी सुनील कुमार सिंह सॉफ्टा टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के फाउंडर और सीईओ हैं. वह ZKTOR के चीफ आर्किटेक्ट भी हैं. मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद से आने वाले सुनील कुमार सिंह पिछले दो दशक से ज्यादा समय से फिनलैंड में हैं. उनका फोकस ऐसी डिजिटल टेक्नोलॉजी तैयार करने पर है, जिसमें लोगों की प्राइवेसी और डेटा की सुरक्षा को शुरुआत से ही सिस्टम का हिस्सा बनाया जाए. उनका कहना है कि ZKTOR को भारत में भारतीयों ने तैयार किया है और भारत को इसके रिसर्च और इनोवेशन का आधार बनाया गया है.

दक्षिण एशिया पर क्यों है फोकस?

सुनील कुमार सिंह के मुताबिक भारत और दक्षिण एशिया में भाषाओं, संस्कृतियों और स्थानीय जरूरतों की काफी विविधता है. यही वजह है कि ZKTOR के लिए यह क्षेत्र अहम है. उनका दावा है कि प्लेटफॉर्म में यूजर की गतिविधियों के आधार पर प्रोफाइलिंग और ट्रैकिंग को कम करने की कोशिश की गई है. कंपनी का कहना है कि उसका मकसद ऐसा सोशल मीडिया तैयार करना है, जहां प्राइवेसी बनाए रखने के लिए यूजर को टेक्नोलॉजी का विशेषज्ञ होना जरूरी न हो.

पांच साल में 200 से ज्यादा जिलों तक पहुंच का लक्ष्य

कंपनी का फोकस सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. ZKTOR छोटे शहरों और कस्बों में हाइपरलोकल डिजिटल नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है. कंपनी के मुताबिक अगले पांच साल में 200 से ज्यादा भारतीय जिलों में ग्राउंड टीम बनाने, 5,000 से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करने और बड़ी संख्या में MSME यानी छोटे और मझोले कारोबारों को नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य है. कंपनी का कहना है कि स्थानीय लोगों की भूमिका सिर्फ यूजर की नहीं होगी। वे नेटवर्क को बनाने, चलाने और उससे कमाई करने में भी हिस्सा ले सकेंगे.

अलग-अलग देशों के लिए अलग डेटा सिस्टम

भारत, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में डेटा और कानूनों से जुड़े नियम अलग हैं. ZKTOR का मॉडल साझा एप्लिकेशन के साथ देश के हिसाब से अलग डेटा सिस्टम पर आधारित है. कंपनी के मुताबिक यूजर का निजी डेटा संबंधित देश में मौजूद सर्वर क्लस्टर में रखा जाएगा. इसके साथ ही अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग परमिशन का इस्तेमाल किया जाएगा. कंपनी का कहना है कि इसका मकसद देशों के बीच बातचीत और डिजिटल सेवाओं को संभव बनाना है, लेकिन अलग-अलग देशों के निजी डेटा को एक जगह इकट्ठा करना नहीं.

सोशल मीडिया से आगे का मॉडल

ZKTOR खुद को सिर्फ एक सोशल मीडिया ऐप के तौर पर पेश नहीं करता. इसके पीछे सोशल मीडिया, मैसेजिंग, सर्च, AI, विज्ञापन और स्थानीय कारोबार को जोड़ने का मॉडल तैयार किया जा रहा है. कंपनी के मुताबिक यूजर की बातचीत, सर्च और खरीदारी को विज्ञापन के लिए एक प्रोफाइल में बदलने के बजाय स्थानीय जरूरत और यूजर की पसंद के आधार पर सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर है. इसमें स्थानीय दुकानदार, MSME, कंटेंट क्रिएटर और सर्विस प्रोवाइडर भी शामिल हैं.

महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर जोर

सुनील कुमार सिंह के मुताबिक ऑनलाइन दुनिया में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है. ZKTOR में इसी वजह से प्राइवेसी और डेटा सेफ्टी को सिस्टम के डिजाइन का हिस्सा बनाने की कोशिश की, गई है. कंपनी का एक खास सिस्टम 'No URL Media Architecture' है. इसके जरिए संरक्षित फोटो और वीडियो को लिंक के जरिए निकालने की संभावनाओं को सीमित करने का दावा किया गया है.

कंपनी यह भी मानती है कि सिर्फ टेक्नोलॉजी हर तरह के दुरुपयोग को नहीं रोक सकती. इसलिए शिकायतों की मानवीय समीक्षा और महिलाओं-बच्चों से जुड़े मामलों के लिए अलग व्यवस्था की बात कही गई है.

AI के दौर में प्राइवेसी की चुनौती

कंपनी का कहना है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में निजी डेटा और फोटो-वीडियो के दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ रहा है. ZKTOR का दावा है कि उसका मॉडल AI, सर्च और डिजिटल कम्युनिकेशन जैसी सुविधाओं को प्राइवेसी के साथ जोड़ने की कोशिश करता है. इसमें KHOZU सर्च, HOLA AI और निजी कम्युनिकेशन के लिए SNDESH जैसी सेवाओं पर काम किया जा रहा है.

भारत में सफलता का मतलब क्या होगा?

सुनील कुमार सिंह के मुताबिक ZKTOR के लिए सफलता सिर्फ यूजर्स की संख्या बढ़ना नहीं है. उनके अनुसार असली सफलता तब होगी, जब स्थानीय कारोबार इससे जुड़ें, लोगों के लिए कमाई के अवसर बनें और शिकायतों का प्रभावी तरीके से समाधान हो.

कंपनी का कहना है कि वह सरकारी अनुदान, बाहरी वेंचर कैपिटल और बड़े कारोबारी समूहों की फंडिंग के बिना टेक्नोलॉजी विकसित करने के मॉडल पर काम कर रही है. उसका लक्ष्य भारत में विकसित ऐसी टेक्नोलॉजी तैयार करना है, जिसे दुनिया के दूसरे देशों में भी इस्तेमाल किया जा सके और जिसमें डिजिटल दुनिया का हिस्सा बनने के लिए लोगों को अपनी निजी जानकारी पर नियंत्रण छोड़ना न पड़े.

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