- बिहार सरकार ने कहा कि भीड़ में फंस जाने के बाद एक कांस्टेबल ने हवा में चार गोलियां चलाई थीं
- सरकार ने यह भी कहा कि हथियार का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था की स्थिति में नहीं किया जाना चाहिए
- 22 से 25 जुलाई 2026 के बीच बिहार में कुल 69 FIR दर्ज की गईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया
नई दिल्ली: बिहार में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित बर्बरता को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर पुलिस पर ‘अनुपातहीन बल' के इस्तेमाल के आरोपों से इनकार किया है. सरकार ने कहा है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए. सीवान में पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से फायरिंग के मामले में राज्य सरकार ने कहा कि भीड़ में फंस जाने के बाद एक कांस्टेबल ने हवा में चार गोलियां चलाई थीं. सरकार के मुताबिक, AK-47 से चली गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं लगी.
सरकार ने यह भी कहा कि हथियार का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था की स्थिति में नहीं किया जाना चाहिए. AK-47 को ‘प्लाटून स्तर का हथियार' बताते हुए कहा गया है कि इसका इस्तेमाल विशेष अभियानों के लिए होता है. राज्य के DGP ने AK-47 के इस्तेमाल को लेकर निर्देश भी जारी किए हैं. हालांकि, जिस कांस्टेबल ने फायरिंग की थी, उसे निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है.
सरकार के अनुसार, हाथी चौक के पास एक ASI ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अपनी 9 एमएम पिस्टल से दो राउंड फायर किए. इस दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली गोली लगने की चोटें आईं. हालांकि, सरकार का कहना है कि इन तीनों को AK-47 से गोली नहीं लगी थी और वे उस स्थान पर भी मौजूद नहीं थे जहां AK-47 से फायरिंग हुई थी. घटना की बैलिस्टिक जांच जारी है, जिससे हथियार के प्रकार, गोली चलने की दूरी और फायरिंग के कोण जैसी जानकारियां जुटाई जा रही हैं.
22 से 25 जुलाई के बीच 69 FIR, 500 गिरफ्तारियां
एफिडेविट के मुताबिक, 22 से 25 जुलाई 2026 के बीच बिहार में कुल 69 FIR दर्ज की गईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत बिना आपराधिक इतिहास वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया, जबकि 75 किशोरों को जेजेबी के जरिए छोड़ा गया. सरकार ने कहा है कि 18 साल से कम उम्र के ऐसे सभी बच्चों को, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, साधारण बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया है. पुलिस का दावा है कि बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा रही है.
सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि प्रदर्शन के दौरान गांधी मैदान, जहानाबाद, पटना, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज और सीवान समेत कई स्थानों पर स्थिति हिंसक हुई. छपरा में 25 जुलाई को दोपहर तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहने के बाद भीड़ में असामाजिक तत्वों के शामिल होने और तोड़फोड़ तथा पथराव शुरू करने का आरोप लगाया गया है.
सरकार के अनुसार, इस दौरान 2 BDO, 3 पुलिस इंस्पेक्टर, 2 सब-इंस्पेक्टर और 11 कांस्टेबल घायल हुए. एक BDO की आंख चली गई, जबकि दूसरे BDO के सिर पर भारी वस्तु से गंभीर चोट लगी और उनकी हालत गंभीर बताई गई है.
157 पुलिसकर्मी और 7 सरकारी कर्मचारी घायल
राज्य सरकार ने दावा किया है कि पूरे प्रदर्शन के दौरान 157 पुलिसकर्मी और 7 सरकारी कर्मचारी घायल हुए. साथ ही, पुलिस द्वारा आंसू गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल की बात भी सरकार ने स्वीकार की है और माना है कि इससे प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं. सरकार ने हिंसा के लिए AISA और RYA की ओर से दिए गए प्रदर्शन के आह्वान का भी उल्लेख किया है. वहीं, 24 जुलाई को CJP के प्रदर्शन के आह्वान का बिहार में कोई खास असर नहीं होने का दावा किया गया है.
राज्य सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सभी वीडियो फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश अतिरिक्त DGP को दिए गए हैं. प्रदर्शन के दौरान जुटाई गई प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी और डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने को कहा गया है. सरकार का कहना है कि छात्रों समेत प्रदर्शनकारियों की पहचान संबंधी जानकारी प्रकाशित नहीं की जा रही है.
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