कांग्रेस पार्टी ने उत्तरप्रदेश में अपने प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को हटा कर अनुराधा मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, जो राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता हैं. मगर अनुराधा मिश्रा की पहचान केवल अपने पिता से नहीं है वो उत्तरप्रदेश की विधायक रहीं हैं. विधानसभा में कांग्रेस की नेता रही हैं और अब उत्तरप्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष बनाई गई हैं. कांग्रेस मुख्यालय में इस बात की चर्चा काफी दिनों से चल रही थी कि वो आज अध्यक्ष बनेगी या कल, दिन बीतता जा रहा था और आखिरकार अनुराधा मिश्रा उत्तरप्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष बन ही गईं.
चुनाव से पहले परिवर्तन
अब जब चुनाव सिर पर है कांग्रेस ने दो चुनावी प्रदेश पंजाब और उत्तरप्रदेश में अपने अध्यक्ष बदल दिए हैं. इन जगह जो पहले अध्यक्ष थे, उन्होंने अपने हिसाब से अपने जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की थी, अब जो नए अध्यक्ष बनाए गए हैं उनकी पूरी ताकत संगठन को अपने तरीके से खड़ा करने और चलाने की होंगी.
प्रमोद तिवारी नौ बार के विधायक रह चुके हैं और यह केवल कुछ नेताओं के साथ ही होता है. कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी नौ बार के सांसद रह चुके हैं और अभी दोनों राज्यसभा के सांसद हैं. खरगे जी राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष हैं तो प्रमोद तिवारी उपनेता.
भूमिहार को हटा कर ब्राह्मण को लाने से कांग्रेस को क्या मिलेगा?
एक सवाल यह भी है कि कांग्रेस ने एक भूमिहार नेता अजय राय को हटा कर ब्राह्मण अनुराधा मिश्रा को अध्यक्ष बना कर क्या हासिल कर लेगी? यह वक्त बताएगा. राजनीति के जानकार यह कह रहे हैं कि अजय राय को कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के खिलाफ बनारस से चुनाव लड़ाया और उन्होंने मजबूती से चुनाव लड़ा और हाल फिलहाल में जिसने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि का मुकदमा किया उसे क्यों हटाया गया?
ये बात भी सही है कि ये निर्णय बिना राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सहमति के नहीं लिया होगा मगर आप सोचिए यहि कल को अजय राय को दिल्ली में कोई जगह नहीं दी जाती है और वो किसी और पार्टी में चले जाते हैं तो कांग्रेस के लिए क्या स्थिति बनेगी?
कांग्रेस के दो अलग-अलग दांव
जो पत्रकार कांग्रेस कवर करते हैं उनको मालूम था कि ये होने वाला है और सबको मालूम था कि कौन उत्तरप्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनेगा, मगर सबसे बड़ा सवाल ये है कि अनुधारा मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष इसलिए बनाया गया है कि उनके पिता प्रमोद तिवारी के रिश्ते सपा प्रमुख अखिलेश यादव से बहुत अच्छे हैं और इससे सीटों के बंटवारे में कांग्रेस को आसानी होगी.
कहने का मतलब है कि कांग्रेस ने दो विपरीत रवैया अपनाने वाले लोगों को नियुक्त किया है. एक जो अच्छी बातें करे दूसरा जो मुस्लिम वोटों के लिए कांग्रेस के लिए लड़ें. इमरान मसूद बीएसपी और सपा में भी रह चुके हैं और लगातार सपा के खिलाफ बोलते रहे हैं जिसका पुरस्कार उन्हें मिला है. कांग्रेस ने जो बदलाव उत्तरप्रदेश में किया है उन्हें लगता है कि उससे उन्हें फायदा मिलेगा मगर इससे उत्तरप्रदेश की राजनीति और भी दिलचस्प हो गई है.
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