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क्या बिहार को मिल गया है उसका तुकाराम मुंढे, IAS कुमार रवि के निशाने पर हैं एक्सपायर्ड दूध से गंदी रसोई तक

आईएएस कुमार रवि को इस साल मई में खाद्य सुरक्षा आयुक्त बनाया गया था. बीते तीन महीनों में उनके विभाग ने 531 जगहों की जांच की है. इस दौरान 15 दुकानों और दूसरे प्रतिष्ठानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई और दो के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं.

क्या बिहार को मिल गया है उसका तुकाराम मुंढे, IAS कुमार रवि के निशाने पर हैं एक्सपायर्ड दूध से गंदी रसोई तक
पटना:

बिहार में खाने-पीने की चीजों में मिलावट और खराब सामान की बिक्री रोकने के लिए जांच तेज हो गई है. दूध, पनीर, मिठाई से लेकर होटल और रेस्टोरेंट की रसोई तक की जांच की जा रही है. एक्सपायर सामान बेचने और गंदगी में खाना बनाने वालों पर कार्रवाई हो रही है. बिहार के स्वास्थ्य सचिव और खाद्य सुरक्षा आयुक्त कुमार रवि इस अभियान की अगुवाई कर रहे हैं. इससे पहले वो बिहार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं. इसमें राजधानी पटना के डीएम समेत कई पद शामिल हैं. सार्वजनिक सेवा में बेहतरीन योगदान के लिए आईएएस कुमार रवि को कई पुरस्कार मिल चुके हैं.

बिहार में खाद्य सुरक्षा आयुक्त ने अब तक क्या कार्रवाई की है

कुमार रवि 2005 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. उनके बैचमेट तुकाराम मुंढे भी महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर सख्त कार्रवाई के लिए चर्चा में रहे हैं. अब बिहार में कुमार रवि के सामने भी बड़ी चुनौती है. उन्हें यह देखना है कि दुकानों और रेस्टोरेंट में बिकने वाला खाना सुरक्षित हो और लोग बिना किसी डर के खाने-पीने की चीजें खरीद सकें.

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के सभी 38 जिलों में पिछले तीन महीने में 531 जगहों पर जांच की गई. इस दौरान करीब 17.32 लाख रुपये के खाद्य उत्पाद जब्त किए गए या नष्ट किए गए. 15 दुकानों और दूसरे प्रतिष्ठानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई, जबकि दो के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए. पटना में सबसे ज्यादा 87 जगहों पर जांच हुई. रोहतास में 41, सारण में 40 और गोपालगंज में 37 जगहों पर अधिकारी पहुंचे. जांच में दुकानों, मिठाई की दुकानों, डेयरी, होटल, रेस्टोरेंट और ऑनलाइन सामान पहुंचाने वाली कंपनियों के गोदामों को भी शामिल किया गया.

रिपोर्ट के मुताबिक, 22 अक्टूबर को पटना में ब्लिंकिट के एक गोदाम से एक्सपायर्ड अमूल दूध की 40 लीटर खेप मिली. इसे जब्त कर नष्ट कर दिया गया. एक दूसरे स्टोर में एक्सपायर्ड घी, आटा और मसाले भी मिले. हाजीपुर के एक होटल की रसोई में गंदगी और कॉकरोच मिलने के बाद उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया गया.

अधिकारियों और कर्मचारियों को दी जा रही है ट्रेनिंग

इन मामलों से पता चलता है कि खाने-पीने की चीजों में मिलावट रोकना ही काफी नहीं है. सामान की एक्सपायरी तारीख देखना, उसे सही तरीके से रखना और रसोई को साफ रखना भी जरूरी है. गंदगी में बना खाना लोगों को बीमार कर सकता है. इसलिए खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ छापेमारी तक सीमित नहीं है. खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को जांच के लिए ट्रेनिंग भी दी जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें 14 दिन की शुरुआती ट्रेनिंग और इसके बाद 26 दिन तक काम करते हुए प्रशिक्षण दिया गया. अधिकारियों को हर दिन की जांच रिपोर्ट ऑनलाइन डालने और शिकायत मिलने पर जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. इससे यह पता चल सकेगा कि किस अधिकारी ने कहां जांच की और क्या कार्रवाई हुई. कुमार रवि चाहते हैं कि अधिकारी सिर्फ शिकायत मिलने का इंतजार न करें, बल्कि खुद भी दुकानों, होटलों और गोदामों की जांच करें.

कौन हैं IAS कुमार रवि

कुमार रवि बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने 2001 में IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की.आईआईटी प्रवेश परीक्षा में उनकी ऑल इंडिया रैंक 142 थी. पढ़ाई के बाद उन्होंने एक कंपनी में इंजीनियर के तौर पर काम किया. इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा की परीक्षा दी.साल 2003 की परीक्षा में उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के लिए हुआ था. उन्होंने आयकर विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर के तौर पर काम किया. बाद में वह 2005 बैच के आईएएस अधिकारी बने. इस परीक्षा में उनकी ऑल इंडिया रैंक 10 आई थी.

बिहार में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं हैं. साल 2008 में सुपौल का जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने कोसी क्षेत्र में आई बाढ़ के दौरान राहत कार्यों की जिम्मेदारी संभाली. वह दरभंगा और पटना के जिलाधिकारी भी रह चुके हैं. पटना में उन्होंने अतिक्रमण हटाने, ट्रैफिक सुधारने और शहर की दूसरी समस्याओं पर काम किया. उनके काम को देखते हुई आईआईटी कानपुर ने उन्हें 2020 में 'सत्येंद्र के. दुबे मेमोरियल अवॉर्ड' से सम्मानित किया था. 

इस साल मई में बिहार सरकार ने उन्हें स्वास्थ्य सचिव के साथ खाद्य सुरक्षा आयुक्त की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी थी. अब उनके सामने लोगों की सेहत और खान-पान की जिम्मेदारी है. कुमार रवि के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस अभियान को लगातार जारी रखने की है. उनका यह अभियान तभी सफल हो सकता है, जब नियमित जांच हो, शिकायतों पर जल्द कार्रवाई हो और नियम तोड़ने वालों पर सख्ती बरती जाए. उनके काम का मकसद केवल खराब सामान पकड़ना नहीं, बल्कि बिहार के लोगों को सुरक्षित खाना उपलब्ध कराना है.

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