बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए एक कथित एनकाउंटर में 26 साल के भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई थी. पुलिस का दावा है कि भरत ने उस पर फायरिंग की थी. इस एनकाउंटर का मामला इन दिनों बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस घटना को लेकर लोगों में आक्रोश है. एनडीटीवी ने घटनास्थल का दौरा किया. इस दौरान लोगों ने बताया कि भरत वहां बाढ़ पीड़ितों की लड़ाई लड़ रहे थे.
भोजपुर जिले का जवानियां गांव पिछले साल गंगा नदी के कटाव की वजह से नदी में समा गया. इससे करीब तीन सौ घर गंगा नदी में समा गए थे.इस वजह से यह गांव गूगल मैप से भी गायब हो गया.
कहां से विस्थापित होकर आए हैं
सरकार ने पीड़ित परिवारों को बिलौटी गांव में जमीन देकर बसाया है. जवानियां से विस्थापित होकर आए लोगों का कहना है कि उन्हें जो जमीन दी गई है, वह गड्ढा है. उनका कहना है कि अगर उन्होंने यहां फिर से घर बनाया गया तो, वहीं हाल होगा जो जवानियां में हुआ था. उनके घर फिर से पानी की ही चपेट में आ जाएंगे. गांव वालों का कहना था कि भरत भूषण तिवारी इन्हीं बाढ़ पीड़ित और विस्थापित लोगों की लड़ाई लड़ रहे थे.
भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर को लेकर लोगों में गुस्सा है. लोगों का कहना है कि भरत का एनकाउंटर करके पुलिस ने बहुत गलत काम किया है.भरत के गांव के लोगों ने बताया कि वह बहुत अच्छा आदमी था. पुलिस ने उसका एनकाउंटर करके बहुत गलत किया है.
मामला बढ़ने के बाद बिहार सरकार ने बीते शनिवार को इस मामले की न्यायिक जांच कराने का आदेश दिया था. पुलिस ने मंगलवार को इस मामले में कई अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की. पुलिस के मुताबिक भरत भूषण तिवारी की मां की शिकायत पर शाहपुर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. इसमें तत्कालीन जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ), तत्कालीन शाहपुर थाना प्रभारी (एसएचओ) और घटना में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया है.
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