बिहार सरकार ने पुलिस प्रशासन में अहम बदलाव करते हुए राज्य में एक बार फिर जोनल पुलिस व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. इस निर्णय के साथ वह व्यवस्था वापस आ गई है, जिसे कुछ वर्ष पहले समाप्त कर दिया गया था. सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था की निगरानी अधिक प्रभावी बनेगी.
पहले बिहार में जोनल सिस्टम के तहत राज्य को कई पुलिस जोन में बांटा गया था. प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी आईजी रैंक के अधिकारी के पास रहती थी. वह अपने क्षेत्र के सभी जिलों की गतिविधियों पर नजर रखते थे और किसी बड़ी घटना की स्थिति में तुरंत आवश्यक कदम उठा सकते थे. जरूरत पड़ने पर दूसरे जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया जा सकता था.
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2019 में खत्म हुई थी व्यवस्था
वर्ष 2019 में तत्कालीन सरकार ने इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया था. उस समय यह तर्क दिया गया था कि पुलिस मुख्यालय से सीधे जिलों की निगरानी होने पर काम अधिक तेजी से होगा. इसके बाद जिलों की देखरेख सीधे मुख्यालय स्तर से की जाने लगी.
अब सरकार का कहना है कि बीते वर्षों में कानून-व्यवस्था की चुनौतियां बढ़ी हैं. कई बार एक साथ कई जिलों में तनावपूर्ण हालात उत्पन्न हो जाते हैं. ऐसी परिस्थितियों में मुख्यालय और जिलों के बीच एक मजबूत निगरानी तंत्र की आवश्यकता महसूस की गई, जिसके बाद जोनल व्यवस्था को फिर से लागू करने का निर्णय लिया गया.
बड़े अपराध और आपात हालात में मिलेगी तेजी
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक जोन का नेतृत्व एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी करेंगे. संबंधित जिलों के एसपी सीधे उनके संपर्क में रहेंगे. किसी जिले में बड़ा अपराध, दंगा, सांप्रदायिक तनाव, आंदोलन या अन्य गंभीर घटना होने पर जोन स्तर पर तुरंत समीक्षा की जाएगी और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे.
सरकार को उम्मीद है कि इससे जिलों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा और पुलिस मुख्यालय पर काम का दबाव भी कम होगा. त्योहारों, चुनावों, धार्मिक आयोजनों तथा आपात स्थितियों में पुलिस की प्रतिक्रिया पहले से अधिक तेज और प्रभावी हो सकेगी.
प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. जिस जोनल व्यवस्था को करीब सात साल पहले समाप्त कर दिया गया था, अब उसे फिर से लागू कर सरकार ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है.
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