- पाकिस्तान की नई रणनीति में मिसाइल और आतंक नेटवर्क पर जोर दिया गया है
- पाकिस्तान लंबी दूरी की मिसाइल तकनीक विकसित कर रहा है जो दक्षिण एशिया से बाहर भी हमला कर सकती हैं
- PAK समर्थित आतंकी संगठन जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद अभी भी सक्रिय हैं और नए नामों से काम कर रहे हैं
अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन का एक बहुत मशहूर कोट है कि अगर आप अपने घर में सांप को पालेंगे, तो जरूरी नहीं वो पड़ोसी को ही काटे. मौका मिलने पर वो आपको भी काट लेगा. अमेरिका को शायद अब इस बात का एहसास हो गया है कि उसने एक सांप यानी पाकिस्तान को पाला हुआ है. फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की वाइट हाउस में इतनी आवभगत की, कि मुनीर का असली रंग शायद उन्हें दिख गया. और इस बात की तस्दीक करती है खुद अमेरिका की मार्च 2026 की खुफिया रिपोर्ट. इस रिपोर्ट में पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए हैं. रिपोर्ट में पाकिस्तान को दुनिया के लिए बढ़ते खतरे के रूप में बताया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान अब उत्तर कोरिया और ईरान जैसे देशों की श्रेणी में आ गया है. यानी अमेरिका को जितना खतरा उत्तर कोरिया और ईरान से है, उतना ही पाकिस्तान से भी है. उत्तर कोरिया और पाकिस्तान न्यूक्लियर पावर वाले देश हैं. और अमेरिका के ही मुताबिक ईरान भी भविष्य का संभावित न्यूक्लियर पावर बनने की दिशा में है.
रिपोर्ट में कई बड़े दावे किए गए हैं
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान लंबी दूरी की मिसाइल तकनीक विकसित कर रहा है. यह मिसाइलें दक्षिण एशिया से बाहर भी हमला करने में सक्षम हो सकती हैं. यूं तो पाकिस्तानी मिलिट्री की कोई भी रणनीति भारत को ध्यान में रख कर बनाई जाती रही है. लेकिन ईरान की तर्ज पर ही पाकिस्तान ने 'ब्लैकमेल' की स्ट्रेटेजी अपनानी शुरू की है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. इससे पश्चिमी देशों की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ सकता है.
पाकिस्तान आर्थिक संकट से जूझ रहा है. लेकिन आर्थिक संकट के बावजूद मिसाइल कार्यक्रम पर खर्च बढ़ाया जा रहा है. लश्कर-ए-तैयबा और जैश का नेटवर्क अब भी सक्रिय है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान समर्थित कई आतंकी संगठन अब भी सक्रिय हैं. इसमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का नाम सबसे प्रमुख है. इसमें अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले का भी जिक्र किया गया है.इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी. रिपोर्ट के अनुसार, ये संगठन नए नामों से काम कर रहे हैं.
ISKP के इस्तेमाल का आरोप
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान अब इस्लामिक स्टेट ऑफ खोरासान प्रोविन्स यानी ISKP का इस्तेमाल भी कर रहा है. इससे पाकिस्तान खुद को सीधे आरोपों से बचाने की कोशिश करता है. हमला करवाने के बाद वो आरोप आतंकी संगठनों पर डाल देता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे पाकिस्तान दो फायदे लेना चाहता है. पहला, वला हमलों से दूरी दिखाता है. दूसरा, वो खुद को भी आतंक का शिकार बताकर मदद अमेरिका से डॉलर लेने की जुगत में रहता है. क्योंकि सच्चाई तो यही है कि असलहा तो डॉलरों से ही आता है.
ईरान का उदाहरण दुनिया के सामने है. कैसे एक दशक से सैंक्शन झेल रहे एक देश ने सुपरपावर की नाक में दम किया हुआ है. और ये सब ईरान अकेले नहीं कर रहा. इसमें हमास, हिजबुल्लाह और हूती जैसे प्रॉक्सी गुट उसका साथ दे रहे हैं. कुछ ऐसी ही स्ट्रेटेजी पाकिस्तान भी अपना रहा है. एक तरफ वो किसी संभावित मिलिट्री एक्शन के लिए हथियारों का भंडार बढ़ा रहा है. दूसरी तरफ वो लश्कर, जैश, अल-कायदा जैसे प्रॉक्सी गुटों को शह दे रहा है. ऐसे में अमेरिका को ये एहसास हो रहा है कि पाकिस्तान को शह देना कहीं न कहीं, सांप को शह देने जैसा ही है. ओसामा, जो अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन था, उसे भी पाकिस्तान नें ही छुपा रखा था. इसलिए संभव है कि वो ऐसा कुछ फिर से दोहराने में हिचक नहीं करेगा.
अफगानिस्तान में हालात बिगड़े
रिपोर्ट में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव का जिक्र है. फरवरी 2026 में काबुल और कंधार में हमलों की बात कही गई है. यह पहली बार है जब पाकिस्तान ने अफगान शहरों को निशाना बनाया. इस स्थिति को गंभीर सुरक्षा संकट बताया गया है. इस रिपोर्ट में भारत की आर्थिक और तकनीकी प्रगति का भी जिक्र है. कहा गया है कि भारत तेजी से वैश्विक ताकत के रूप में उभर रहा है. वहीं पाकिस्तान की स्थिति कमजोर होती दिख रही है. साथ ही आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के आरोपों को अब वैश्विक समर्थन मिल रहा है.
पाकिस्तान अगर नहीं बदला रास्ता तो गंभीर होंगे हालात
कुल मिला कर रिपोर्ट में पाकिस्तान को साफ संदेश दिया गया है कि उसे आतंक नेटवर्क खत्म करने होंगे, सैन्य के बजाय नागरिक शासन को मजबूत करना होगा और भारत के साथ स्थिर संबंध बनाने होंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पाकिस्तान ने रास्ता नहीं बदला, तो आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं. इस रिपोर्ट का निष्कर्ष कुल मिला कर पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी है. अमेरिका को ये समझ आ रहा है कि अगर पाकिस्तान इसी राह पर चला तो एक और 'एबटाबाद' (लादेन किलिंग) से इंकार नहीं किया जा सकता. अब यह पाकिस्तान ही तय करेगा कि देश सुधार की राह पर जाता है या संकट की ओर बढ़ता है.
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